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हरियाणा में भाजपा-जजपा नेताओं के खिलाफ किसानों ने किया विरोध प्रदर्शन

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हरियाणा के भाजपा और जजपा नेता अपने किसान विरोधी रवैये और व्यवहार का खामियाजा भुगत रहे हैं। इन नेताओं के खिलाफ पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन जारी है। नेताओं को अपने घोषित कार्यक्रमों को गुप्त तरीके से करना पड़ रहा है, और विरोध करने वाले किसानों के साथ बिल्ली और चूहे के खेल का सहारा लेना पड़ रहा है, यह उन्हें वोट देकर सत्ता में लाने वाले लोगों की पीड़ा है। यह बताया गया है कि मुख्यमंत्री ने कल पंचकूला में हेलीकाप्टर से नियमित के बजाय एक अज्ञात हेलीपैड को विकल्प के रूप में चुनकर अपने कायक्रम को निर्धारित किया । सीएम के विरोध में कल पंचकूला के क्राइम पुलिस स्टेशन में पाँच घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में लिए गए 70 से अधिक प्रदर्शनकारियों को उनकी तत्काल रिहाई की मांग को लेकर थाने में सैकड़ों समर्थकों के इकट्ठा होने के बाद उन्हें रात में रिहा कर दिया गया।  उनके साथ पुलिस द्वारा किए गये दुर्व्यवहार के लिए माफी मांगने के बाद बगैर कोई मामला दर्ज किए उन्हे छोड दिया गया ।
प्रदर्शनकारियों के सवालो से बचने के लिए मंत्री और विधायक आधी रात को अपने घोषित कार्यक्रमों को रद्द करने या कार्यक्रमों को अंजाम देने का सहारा ले रहे हैं। हिसार में विधायक विनोद भयाना ने कल (रविवार) रात एक पार्क में पानी के फव्वारे का उद्घाटन किया । कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपनी इस योजना को रद्द किया था जिसका उद्घाटन किसानों ने खुद किया था, एक रक्तदान शिविर जिसे राज्य भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ द्वारा शुरू किया जाना था, किसानों के विरोध के कारण फिर से निर्धारित किया गया, बाद में कार्यक्रम शुरू होने पर वे आए। भिवानी में आज कृषि मंत्री जेपी दलाल को काले झंडों के साथ सैकड़ों प्रदर्शनकारियों का सामना करना पड़ा । चरखी दादरी में आज योग दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची बबीता फोगट को भी विरोध का सामना करना पड़ा । अंबाला में शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर को काले झंडे दिखाए गए । पुलिस सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को चंडीगढ़ मटका चौक से उठाकर सेक्टर 17 पुलिस स्टेशन ले गई। इस मीडिया नोट के जारी होने के समय हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा कराने के लिए सैकड़ों समर्थक थाने पहुंच रहे हैं ।
हरियाणा की फार्म यूनियनों ने बार-बार भाजपा और जजपा नेताओं को किसानों को बेवजह भड़काने के खिलाफ चेतावनी दी है। नेताओं को, किसानों के आक्रोश और पीड़ा को बेझिझक बाहर निकालने की कोशिश करने के बजाय, उन किसानों के पक्ष में खड़ा होना चाहिए, जिन्होंने उन्हें वोट देकर सत्ता में लाया। ये नेता, यदि वे वास्तव में नेता हैं, तो केंद्र सरकार को तीन काले कानूनों को निरस्त करने और सभी किसानों के लिए एमएसपी की गारंटी के लिए एक नया कानून लाने के लिए आवाज उठानी चाहिए।
जैसा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही कहा है, चल रहे आंदोलन के लिए भरपूर स्थानीय समर्थन प्राप्त है । इसी तरह के समर्थन को प्रदर्शित करते हुए सिंघू बार्डर पर लंगर सेवा के लिए आज खरकोंडा और उसके आसपास के ग्रामीणों द्वारा कम से कम दस ट्रॉली लोड गेहूं भेजा गया। यह समर्थन राष्ट्रीय किसान महासंघ की मदद से जुटाया गया था। इस कड़ी में, सोनीपत और उसके आसपास के गांवों से 40 से अधिक ट्राली गेहूं की खेप बीकेयू  – चदूनी के सहयोग से पहुंच रही है।
आज अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन(एआईकेकेएमएस) के आह्वान पर देश के कई राज्यों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसमें हरियाणा, असम (दक्षिण सलमारा मनकाचर, गोलपारा, लखीमपुर आदि), ओडिशा (पुरी, जाजपुर, अंगुल, कोरापुट, संबलपुर और अन्य जिले), कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और बिहार (मुंगेर, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, बांका, औरंगाबाद एवं अन्य जिले ) के कई गांव शामिल थे ।

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