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जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों में ग्लोबल कारपोरेट टैक्स पर सहमति

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वाशिंगटन। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यस्था वाले देशों के समूह जी-20 के बीच न्यूनतम 15 फीसद ग्लोबल कारपोरेट टैक्स पर सहमति बन गई है। इन देशों के वित्त मंत्रियों ने बड़ी कंपनियों को कम कर वाले यानी टैक्स हेवन देशों का सहारा लेने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय कराधान व्यवस्थामें व्यापक बदलाव का समर्थन किया है।
इटली के वेनिस शहर में आयोजित जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में अंतरराष्ट्रीय कर निर्धारण व्यवस्थामें बदलाव का प्रस्ताव पेश किया गया, जिसका सभी ने समर्थन किया।
बैठक में शामिल अमेरिकी वित्त मंत्री जैनेट येलेन ने कहा कि यह प्रस्ताव स्वयं को हराने वाली अंतरराष्ट्रीय कर प्रतियोगिता’ खत्म करेगा, जिसमें कई देशों ने कंपनियों को आकर्षित करने के लिए वर्षो से अपनी करें कम की हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐसी दौड़ थी जिसे किसी ने नहीं जीता। इसके बजाय इसने हमें उन संसाधनों से वंचित किया जिनकी हमें अपने लोगों, हमारे कार्यबल और हमारे बुनियादी ढांचे में निवेश करने की आवश्यकता थी।

 राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों की बैठक में होगा अंतिम निर्णय
इस प्रस्ताव पर पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन को विस्तार से काम करना है। उसके बाद रोम में 30-31 अक्टूबर को होने वाले जी-20 के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस समय जी-20 का अध्यक्ष इटली है इसलिए वित्त मंत्रियों की बैठक भी उसी के नेतृत्व में हुई। वैश्विक अर्थव्यवस्था में 80 फीसद हिस्सा इन्हीं जी-20 समूह के देशों का है।

अंतरराष्ट्रीय कराधान व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव
अंतरराष्ट्रीय कराधान व्यवस्था में बदलाव का यह प्रस्ताव इसलिए किया गया है ताकि बड़ी कंपनियों को उन देशों में अपना कारोबार ले जाने से रोका जा सके जहां बहुत कम कर है या कोई कर ही नहीं है। ये कंपनियां सिर्फ टैक्स बचाने के लिए ऐसे देशों में अपना कारोबार ले जाती हैं, जबकि वास्तव में उन देशों में ये बहुत कम कारोबार करती हैं या कारोबार करती ही नहीं हैं। नई व्यवस्था होने पर ज्यादा कर के चलते दूसरे देशों से भागने वाली कंपनियों को टैक्स हेवन वाले देशों में भी न्यूनतम कर देना होगा। इस तरह टैक्स हेवन देशों में कंपनियां स्थापित करने पर रोक लगेगी।

जलवायु चिंताओं को ध्यान में रखकर बनाएं सुधार की रणनीति : सीतारमण
जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की तीसरी बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण(Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने जी-20 देशों से आर्थिक सुधार की रणनीति बनाते समय जलवायु संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखने का अनुरोध किया। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत सरकार द्वारा हाल में लिए गए नीतिगत फैसलों को भी साझा किया। कोरोना वायरस के सामने आ रहे नए वैरिएंट को देखते हुए वित्त मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समन्वय और सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया।

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