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लंबे समय से रीवा में विकास की उलटी गंगा बह रही  

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ऐतिहासिक जय स्तंभ चुनावी मुद्दा होगा : अजय खरे

रीवा । समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि विकास के नाम पर मची लूट का विरोध करते हुए अच्छे प्रत्याशियों को चुना जाना चाहिए । होने वाले चुनाव में फिजूलखर्ची रोकी जानी चाहिए । बेहद खर्चीले चुनाव लोकतंत्र के लिए घातक एवं पूंजीपतियों के मददगार हैं , जिसका बोझ जनसाधारण पर पड़ेगा । श्री खरे ने कहा कि मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव के साथ-साथ नगरीय निकाय के चुनाव भी होने जा रहे हैं। रीवा नगर पालिक निगम में महापौर के चुनाव के साथ-साथ 45 वार्डो के पार्षदों का चुनाव भी हो रहा है । जातिगत धार्मिक आधार पर मतदाताओं को भ्रमित करने का गंदा खेल शुरू है । पैसा दारू मुर्गा के आधार पर वोट लेने के हथकंडे भी शुरू हैं । शहर में जहां बड़े पैमाने पर धार्मिक स्थानों पर अतिक्रमण है  , वहीं धर्म की आड़ में सार्वजनिक स्थानों और पार्कों में अतिक्रमण होने से अराजक माहौल देखने को मिल रहा है । प्रशासनिक अमला किंकर्तव्यविमूढ़ स्थिति में होने से कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है । लोगों को विकास की मृग मारीचिका में उलझाए रखा गया है । रीवा के ऐतिहासिक जय स्तंभ को बचाए जाने के लिए अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने इस बात को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया है । जय स्तंभ को लेकर राजनीतिक प्रत्याशियों को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए । नगरीय निकाय चुनाव का यह महत्वपूर्ण मुद्दा होगा । विकास के नाम पर हो रही खुली लूट और सरकारी जमीनों को बड़े पूंजीपतियों के हवाले किए जाने की बात का कहीं स्पष्ट विरोध दिखाई नहीं दे रहा है । शहर और आसपास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरे भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से शहर का पर्यावरण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है । पूरा रीवा शहर बेढंगे विकास की विनाश लीला के चपेट में है । मनमाने तरीके से बनाए गए फ्लाई ओवरों के चलते मुख्य सड़कों का स्वरूप विकृत हो गया है । नए बस स्टैंड से बाणसागर कॉलोनी की ओर जाने वाली नीचे की सड़क फ्लाईओवर के चलते खतम जैसी हैं । शहर से गुजरने वाला पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग मनमाने तरीके से बनाए गए फ्लाई ओवरों के चलते तंग गलियों में तब्दील हो गया है । फ्लाईओवर के नीचे बड़े पैमाने पर गलत तरीके से चलाए जा रहे दुकानीकरण से यातायात व्यवस्था बुरी तरह चौपट हुई है । फ्लाई ओवरों की भी हालत खस्ता होने से आम जीवन को बड़ा भारी खतरा बना हुआ है । रीवा जिले की 25 लाख से भी ज्यादा आबादी को रीवा को दिल्ली मुंबई महानगर बनाए जाने के झूठे सपने दिखाकर लंबे समय से भ्रमित एवं ठगा जा रहा है । शहर में मीठे पानी के नाम पर बदबूदार और जहरीले पानी की आपूर्ति की जा रही है । पर्यावरण का विनाश करके रीवा शहर को बुरी तरह से कंक्रीट के जाल में जकड़ दिया गया है । शहर में 25 सालों से भी अधिक समय से एक ही पार्टी का महापौर रहा है लेकिन कोई बुनियादी बदलाव देखने को नहीं मिला है । मामूली पानी गिरने पर भी कृत्रिम बाढ़ की चपेट में पूरा शहर आ जाता है । विकास की उलटी गंगा बह रही है जिसके चलते शहर की व्यवस्था चौपट हुई है और घर नीचे और सड़कें ऊंची हुई हैं। लंबे समय का कटु अनुभव यह है कि नदी में बाढ़ नहीं लेकिन शहर कृत्रिम बाढ़ से जूझता नजर आता है । इस बार भी जब कभी बारिश होगी तो यही भयावह नजारा देखने को मिलेगा । श्री खरे ने कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए अच्छे ईमानदार छवि वाले प्रत्याशियों को चुनने की व्यापक पहल करनी होगी ।

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