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*चार माह के लिए गढ़चिरौली के 500 आदिवासियों की जिंदगी में छा जाता है अंधेरा*

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महाराष्ट्र में मानसूनी बारिश का कहर जारी है। ऐसे में नागपुर के गढ़चिरौली के आसपास के कई आदिवासी इलाकों में रोजमर्रा की आवश्‍यक वस्‍तुओं की कमी हो जाती है। यहां के लोग बारिश शुरू होने से पहले ही दैनिक उपयोग का जरूरी सामान एकत्रित कर लेते हैं।नागपुर के गढ़चिरौली में छह बस्तियों में रहने वाले सैकड़ों आदिवासियों के लिए मानसून किसी परीक्षा से कम नहीं है। यहां के लोगों के लिए बारिश शुरू होने से पहले आवश्यक वस्तुओं और दवाओं का स्टॉक करना एक चुनौती है।

क्योंकि बारिश के कारण आई बाढ़ से इन स्थानों का जिले के बाकी हिस्सों से संपर्क मार्ग टूट जाता है। इससे यहां रहने वाले 500 आदिवासी चार महीने तक गुमनाम होकर जिंदगी गुजारने को मजबूर हो जाते हैं।

महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित, बिनागुंडा, तुरेमार्का, कोवाकोडी, पेरिमिलबट्टी, फोडेवाड़ा और दमनमार्का गांव राज्य की सीमा बसे हैं। इन गांव में आदिवासी जातियां रहती हैं।

इन स्थानों से लगभग 36 किलोमीटर दूर भामरागढ़ में स्थित एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि “पहाड़ियों से घिरी छह बस्तियां राज्य की सीमा पर सबसे दूर और अंतिम गांव हैं।”

चार महीने के लिए मुख्यालय से कट जाता है रास्ता

उन्होंने कहा, “इन गांवों के लगभग 500 आदिवासी ज्यादातर बांस काटकर और कोसरी नामक बाजरा की खेती करते हैं”। इन बस्तियों में बिजली की आपूर्ति नहीं है, लेकिन कुछ घरों में सौर ऊर्जा का प्रबंध है। “

अधिकारी ने बताया कि मानसून आते ही यहां के लोगों को जरूरी सामानों और रहने के लिए सुरक्षित जगह की चिंता सताने लगती है। क्योंकि जुलाई से अक्टूबर तक बारिश के कारण गुंडिनूर नाला अपने उफान पर होता है। इस नाले पर पुल नहीं हैं। इससे बस्तियां जिला मुख्यालय से कट जाती हैं।

18 से 25 किलोमीटर चलना पड़ता है पैदल

अधिकारी ने कहा कि इन गांवों के आदिवासियों को या तो लाहेरी गांव तक 18 से 25 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। या फिर डोंगा (लकड़ी की छोटी नाव) के सहारे नाले को पार करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि मानसून से पहले, प्रशासन इन गांवों में आवश्यक और जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए पहुंचता है। यहां का निकटतम स्वास्थ्य केंद्र लगभग 18 किमी. दूर है।

नाले पर पुल की मिली है मंजूरी

अधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने चार ‘कोतवाल’ (स्थानीय राजस्व कर्मचारी) भी नियुक्त किए हैं। जो बाढ़ की स्थिति से अधिकारियों को अवगत कराने के लिए इन गांवों का दौरा करते रहते हैं।

इस साल बारिश शुरू होने से पहले प्रशासन ने इन गांवों की गर्भवती महिलाओं को एहतियात के तौर पर भामरागढ़ के एक आश्रय में भेज दिया था। साथ ही गुंडिनूर नाले पर एक पुल के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा था, जिसकी मंजूरी मिली है।

लाहेरी गांव में रहने वाले एक कोतवाल ने बताया कि वह उस क्षेत्र में जाने से असमर्थ है। क्योंकि हाल ही में हुई बारिश के दौरान कई छोटी धाराएं और नाले अपने उफान पर हैं।

कोतवाल ने कहा कि उन्होंने आखिरी बार 11 जुलाई से पहले गांवों का दौरा किया था। उसके बाद, क्षेत्र में भारी बारिश और नाले में बाढ़ के कारण ये बस्तियां जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गईं।

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