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*मध्य प्रदेश में पहली बार होगा शतावधान विधा का दुर्लभ आयोजन*

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बाल मुनि शतावधान द्वारा इंदौर के अभय प्रशाल में १० अगस्त, रविवार को

इंदौर, मध्य प्रदेश – भारतीय संस्कृति और जैन दर्शन की गूढ़ परंपराओं को जीवंत करता हुआ एक ऐतिहासिक आयोजन 10 अगस्त, रविवार को इंदौर के अभय प्रशाल में आयोजित होने जा रहा है। यह कार्यक्रम तिलक नगर स्थित तिलकेश्वर पार्शवनाथ तीर्थ धार्मिक पारमार्थिक सार्वजनिक न्यास के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा, जो अपने आप में एक अभूतपूर्व और विरल आयोजन होगा।

इस विशेष अवसर पर बाल मुनि विजयचंद्र सागर जी जो कि परम पूज्य श्री नयनचंद्र सागरसूरजी महाराज के शिष्य हैं, शतावधान विधा के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं और ज्ञान जिज्ञासुओं के 100 अनियमित प्रश्नों के उत्तर देंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 9 बजे से होगा।

क्या है शतावधान विधा?

शतावधान एक अत्यंत प्राचीन भारतीय विद्या है, जो विशेषतः जैन मुनियों और विद्वानों के बीच विकसित हुई है। इसमें साधक एक समय में स्मृति, ध्यान और उत्तर देने की अद्वितीय क्षमता का प्रदर्शन करता है। इस विधा में मुनि बिना किसी पूर्व सूचना के, श्रोताओं द्वारा पूछे गए 100 प्रश्नों को याद रखते हैं और उन्हें क्रम या बिना क्रम के सटीकता से उत्तरित करते हैं।

क्यों है यह आयोजन विशेष?

• मध्य प्रदेश में पहली बार इस दुर्लभ विद्या का सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शन होने जा रहा है।

• यह कार्यक्रम जैन दर्शन, स्मृति विज्ञान और ध्यान साधना को समझने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करेगा।

• बाल मुनि जी का यह प्रदर्शन न केवल आध्यात्मिक स्तर पर प्रेरणा देगा, बल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिकता और गहराई से भी परिचित कराएगा।

• यह आयोजन धार्मिक अनुभूति के साथ-साथ बौद्धिक, सांस्कृतिक और मानसिक क्षमताओं के विकास का भी माध्यम बनेगा।

आयोजन स्थल और समय:

 स्थान: अभय प्रशाल, इंदौर

 तारीख: 10 अगस्त, रविवार

 समय: प्रातः 9 बजे से प्रारंभ

इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने के लिए समस्त श्रद्धालुजन, विद्यार्थिगण, विद्वान, साधक और संस्कृति प्रेमियों से आयोजन समिति ने समय पर पहुँचने का अनुरोध किया है।

देंवेद्र झंवेरी अध्यक्ष

श्री तिलकेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ धार्मिक परमार्थी सार्वजनिक नियास

आचार्य श्री नयचंद्र सागर सुरेश्वर जी महाराज साहब के के शिष्य  गणिवर्य डॉ अजीत चंद्र सागर जी महारा साहब द्वारा प्रवचन में “मैं और मेरा परिवार” के ऊपर प्रवचन हुए चंद्रप्रभु मंगली भवन में प्रवचन हुए। करीब 700 श्रावक और श्राविकाओं ने प्रवचन का लाभ लिया। उन्होंने मेरे परिवार के ऊपर जो विशेष बात कही है की सबसे बड़ी समस्या समझ में आज ह्यूमन रिलेशन की हो चुकी है मनुष्य के परिवार को सुधारने के लिए उसके सॉल्यूशन के लिए चार मुख्य बातें बताई।

1. परिवार को सुनो (listen your family) म्हारा साहब जी ने फरमाया कि पहले बात को सुने अपनी बात कहने या सुनने की जल्दी ना करें। सुनने से ही कोई रास्ता निकलेगा।  बाहर के लोग ही तकलीफ देते है। माता कैकई ने मंत्र की सुनी तो श्री  राम जी को वनवास हुआ और आज के समय में मंत्र अभी भी जिंदा है परिवार में आंग बाहर के लोग लगाते हैं, घर के लोगों सुनो तो हमेशा घर बना रहता है । संगठित होना चाहिए तो परिवार बना रहता है आप बाहर का व्यक्ति आपका सौंदर्य, संपत्ति, बुद्धि पसंद करता है परंतु घर के लोग आपके अपने लोग आपको इसलिए चाहते हैं क्योंकि आपको अपना समझते हैं ।परिवार में समय देना चाहिए ।

2. लव योर फैमिली : अपने परिवार को प्यार करो श्रीपाल मेना सुंदरी के जीवन से, राम सीता के जीवन से, हम सीखते हैं कि आपसी प्रेम से किस प्रकार उन्होंने अपना जीवन को आगे बढ़ाया। मेना सुंदरी और श्रीपाल जी ने तो इतना अच्छा एक दूसरे को समझा कि दोनों नो जन्मों तक रहा और मोक्ष में गए। उनके साथ सामने वाला समझे तो ठीक है यह तो अपनी समझदारी दिखाओ श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को 68 तीर्थ की यात्रा करवाई थी, यह पता होना चाहिए कि उनके माता-पिता ने जब तीर्थ जाने को कहा तो श्रवण कुमार ने कहा कि आपको दिखाई तो देता नहीं है कैसे भगवान दर्शन करोगे, तो माता-पिता ने कहा कोई बात नहीं भगवान हमारा हमें देख लेंगे। तो माता-पिता की बात को समझ कर श्रवण कुमार ने कांवड़ में 68, तीर्थों की यात्रा कराई।

3. अंडरस्टैंड योर फैमिली:  अपनी इच्छाओं और भावनाओं का बलिदान देकर परिवार को समझो।अंडरस्टैंड योर फैमिली करके अपने परिवार को समझो सामने वाला क्या कह रहा है उसको समझ करके समझदार दिखाओ ।

4.  केयर योर फैमिली : निस्वार्थ परिवार की चिंता करके उनके विषय में सोचना चाहिए। चिंता करो परिवार के प्रति समर्पण होना चाहिए नियंत्रित जीवन जीना चाहिए इसी से परिवार एक रहता है।

महाराज साहब का तृतीय सप्ताह में 27 जुलाई 2025 को मैं और मेरा धर्म पर चर्चा करेंगे तथा इसी क्रम में 10 अगस्त 2025 को अभय प्रसाद में सुबह 8:30 बजे बाल शतावधान का कार्यक्रम बाल मुनि श्री विजय चंद्र सागर जी द्वारा किया जाएगा। उक्त जानकारी हमे विजय ओसवाल, अध्यक्ष श्री तिलकेश्वर पार्श्वनाथ जैन युवा संघ इंदौर ने दिया।

विजय ओसवाल

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