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पूर्व सीएम दिग्वजय बोले – ऐसे लोगों से जनता को बचाना चाहते हैं, तो मंत्री को बर्खास्त करें, वर्मा बोले – सिलावट को पद से हटाएं, FIR हो

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इंदौर

रेमडेसिविर की कालाबाजारी में प्रभारी मंत्री की पत्नी के ड्राइवर का नाम आने के बाद राजनीति गरमा गई है। इंदौर के सभी कांग्रेसी नेता ने एक सुर में मंत्री सिलावट पर हमला बोला है। मैदान में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी आ गए हैं। दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से कहा है कि ऐसे लोगों से जनता को बचाना चाहते हैं, तो मंत्री को तत्काल बर्खास्त करें। वहीं, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने तो मंत्री पर हत्या का प्रकरण दर्ज करने तक की बात कह दी। वहीं, मंत्री सिलावट का कहना है कि मामले में मेरा कोई लेना-देना नहीं है।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह गंभीर आरोप है। मंत्री जी के घर से रेमडेसिविर इंजेक्शन बिक रहा हो और उसमें वे शामिल ना हों, क्या यह संभव है? शिवराज जी यदि बकौल उनके “नर पिशाचों” से जनता को बचाना चाहते हैं, तो मंत्री जी को बर्खास्त करें। अन्यथा यही माना जाएगा कि स्वयं शिवराज जी धंधे में शामिल हैं। विधायक संजय शुक्ला को मैं बधाई देता हूं, जिन्होंने तुलसी सिलावट मंत्री जी की चोरी पकड़ी।

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा – मंत्री तुलसी सिलावट पर हत्या का केस दर्ज होना चाहिए। सिलावट पर पहले भी आरोप लग चुके हैं, इसलिए मुख्यमंत्री को चाहिए कि उन्हें इंदौर के प्रभारी पद से हटा देना चाहिए। रेमडेसिविर बेचने का उनके परिवार पर आरोप लग रहे हैं। सिलावट पर लगे आरोपों की यदि जांच की गई, तो वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं। देश में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। प्रधानमंत्री का बयान नहीं आ रहा है। देश में हुई मौतों के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी हत्या का प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।

कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला – यह इंदौर के लिए शर्म की बात है। 10-12 दिन पहले मैंने आरोप लगाया था, प्रभारी मंत्री के परिवार द्वारा इंजेक्शन बेचे जा रहे हैं। विजय नगर चौराहे से पुनीत अग्रवाल पकड़ाया है। उसने बताया कि तुलसी सिलावट की पत्नी के ड्राइवर के साथ वे गाड़ी चलाते हैं। वह लगातार उसी से इंजेक्शन लेकर बेच रहा है। इससे प्रूफ होता है कि इंजेक्शन बेचे जा रहे हैं। मैंने जाे दावा किया था वह पुख्ता हाे गया। सीएम काे तत्काल मंत्री से इस्तीफा लेना चाहिए। रेमडेसिविर बेचते पाए जाने वाले पर तत्काल आरोपी पर रासुका की कार्रवाई हो।

जिला अध्यक्ष सदाशिव यादव – रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में ड्राइवर ने खुद कहा है कि वह मंत्री की पत्नी के ड्राइवर से 14000 रुपए में इंजेक्शन खरीद रहा था। 10 हजार रुपए पगार वाला ड्राइवर क्या रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर सकता है। विधायक ने मंत्री के बेटे का नाम लिया था कि वे इस मामले में शामिल हैं। यह सत्य साबित हो गया है। स्वास्थ्य मंत्री रहते भी इन पर कई आरोप लगे थे। ये भ्रष्टाचार में लिप्त है। इन्हें प्रभारी मंत्री के पद से मुक्त कर जांच को सीबीआई या एसटीएफ को सौंपी जाए।

शहर अध्यक्ष विनय बाकलीवाल – जिला चिकित्सा अधिकारी के ड्राइवर ने बताया है कि उसने मंत्री सिलावट की पत्नी के ड्राइवर गोविंद से इंजेक्शन खरीदे हैं। मैं सीएम से यही कहना चाहता हूं कि सिलावट को तत्काल मंत्री पद से मुक्त किया जाए।

मंत्री सिलावट का पक्ष : मंत्री सिलावट का कहना है कि गोविंद ट्रेवल एजेंसी का ड्राइवर है, उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। उसने ये इंजेक्शन कहां से लिए ये जांच का विषय है। पुलिस निष्पक्षता से जांच कर कार्रवाई करे। कानून अपना काम करेगी। जल्द ही सब पता चला जाएगा कि आखिर इंजेक्शन उसे कहां से मिले थे।

यह है मामला
विजय नगर पुलिस द्वारा सोमवार को आरोपी पुनीत अग्रवाल को इंजेक्शन बेचते पकड़ा गया था। पुनीत ने दावा किया है, जो इंजेक्शन वह बेचने के लिए लाया था, वह उसे ट्रैवल एजेंसी इम्पैक्ट के ही एक अन्य ड्राइवर गोविंद राजपूत ने 14 हजार रुपए में दिया था। हालांकि पुलिस का कहना है कि पुनीत का दो दिन का रिमांड मिला है, लेकिन अभी उसके आधिकारिक बयान नहीं हो पाए हैं। पुनीत इम्पैक्ट ट्रेवल एजेंसी पर काम करता है। छह महीने से जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पूर्णिमा गडरिया की गाड़ी चला रहा है। सोमवार को विजयनगर पुलिस ने उसे 15 हजार रुपए में रेमडेसिविर खरीदने के बहाने बुलाकर रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। मंगलवार को कोर्ट जाने से पहले मीडिया से चर्चा में पुनीत ने कहा कि गोविंद भी उसी एजेंसी में काम करता है। वह पहले भी कई लोगों को इंजेक्शन बेच चुका है। एजेंसी के मार्फत वह मंत्री तुलसी सिलावट की पत्नी की गाड़ी चलाता है।

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