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शव वाहन के सामने फोटो खिंचवाने से भी बाज नहीं आए पूर्व महापौर आलोक शर्मा

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भोपाल।एक तरफ इंदौर में ऑक्सीजन का टैंकर रोककर भाजपा नेताओं ने खूब फोटो बाजी की और अब भोपाल में भाजपा के पूर्व महापौर आलोक शर्मा भी इससे बाज नहीं आए। उन्होंने तो शव वाहन के सामने फोटोशूट करवा लिया। संकट काल में एक तरफ हर आदमी परेशान है लेकिन इसके बावजूद भाजपा नेता फोटो की राजनीति करने से चूक नहीं रहे है। अपना राजनीतिक सिक्का चमकाने के लिए आम आदमी को ताक पर रखकर इस तरह का कृत्य किया जा रहा है। इस तरह की निरलज्ज और घटिया हरकत करते समय पूर्व महापौर फरमा रहे है कि विभिन्न सामाजिक संगठनों को भी इस तरह आगे आना चाहिए।दरअसल, राजधानी में हर दिन कोरोना संक्रमित मरीज की मौत का सिलसिला रूकने का नाम ही नहीं ले रहा है। हालात यह है कि संक्रमित मरीजों के शव को विश्राम घाट तक ले जाने के लिए शव वाहन कम पड गए है। नगर निगम के पास जो शव वाहन है वह शवों को विश्राम घाट तक पहुंचाने के लिए नाकाफी साबित हो रहे है। इस बीच भोपाल के बाहर से आए लोगों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड रहा है।

यह समस्या लोगों के सामने आई तो पूर्व महापौर आलोक शर्मा को इस आपदा में फोटो शूट कराने का अवसर दिखाई दिया। उन्होंने आनन-फानन में कुछ वाहन किराए पर लिए और इसमें अपने नाम का पोस्टर और बैनर बनाकर अस्पतालों को सौंपने के लिए जेपी अस्पताल में सोमवार को एक कार्यक्रम ही कर डाला। इस कार्यक्रम के दौरान जेपी अस्पताल में एक पीडित परिवार आया और उसने शव को तत्काल विश्राम घाट पहुंचाने की आलोक शर्मा से गुजारिश की। इस पर आलोक शर्मा ने आव-देखा न ताव शव को गाडी में डलवाया और सीधे वाहन विश्राम घाट भेजने की वजाए ड्रायवर और सहायक को पीपीई किट पहनाने लगे ताकि फोटो शूट अच्छा हो जाए।

हर जगह सिर्फ वे ही वे दिखाई दें। फोटो शूट तक यह शव वाहन रोककर रखा और बाद में इसे रवाना कर मीडिया में बयान देना शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने बडे-बडे दावे कर दिए कि उन्होंने शमशान घाट में 21 ट्रक लकडी पहुंचाई। शव वाहनों का जो एक महीने का खर्च आएगा वह वे उनकी जेब से देंगे। ड्रायवर को वेतन देंगे। इस बीच फोटोशूट वाला वीडियो किसी ने इंटनेट मीडिया में वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद आम जनता ने आलोक शर्मा की खूब आलोचना की।

इन अस्पतालों को सौंपे जाएंगे वाहन

जेपी अस्पताल, हमीदिया, एम्स, भोपाल, एनएल मेडिकल कॉलेज, पीपुल्स अस्पताल और चिरायु अस्पताल।

इनका कहना

यह गंदी राजनीति का हिस्सा है। मैने पवित्र मन से कोरोना संक्रमण काल में लोगों की मदद करनी चाही तो इसे तोड-मरोडकर पेश किया गया और राजनीतिक का हिस्सा बना दिया गया। मुझे फोटोशू का कोई शौक नहीं है लेकिन इस तरह से राजनीती होगी तो कोई भी व्यक्ति दूसरों की मदद के लिए सामने नहीं आएगा। मैंने तो लोगों की समस्या को देखते हुए भले मन से यह सब करना चाहा था लेकिन कुछ लोगों ने इसे गलत तरीके से पेश किया है। जिससे मन बहुत दुखी है।

आलोक शर्मा, पूर्व महापौर

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