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19 साल पुराने पारधी हत्याकांड में बरी पूर्व मंत्री  सुखदेव पांसे

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कांग्रेस के पूर्व विधायक और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को 2007 के मुलताई पारधी दंपति हत्याकांड और हिंसा मामले में आरोपी थे. अब उन्हें बड़ी राहत मिली है और उन्हें हत्या, आगजनी और दंगा भड़काने के आरोप में बरी कर दिया हैं. भोपाल में मौजूद विशेष न्यायालय में इक्कीसवें अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एमपी और एमएलए) स्वयं प्रकाश दुबे ने यह फैसला सुनाया. उनकी पैरवी एडवोकेट वीके सक्सेना और संजय रावत ने कोर्ट के समक्ष उनका पक्ष रखा.

बरी होने के बाद क्या बोले सुखदेव पांसे
अदालत से बरी होने पर सुखदेव पांसे ने कहा कि हमें न्यायालय पर भरोसा था और सच्चाई पर विश्वास था. हम कोर्ट में लगातार उपस्थिति देते रहे. अदालत का आदेश सिर माथे पर है. आज हमारे पक्ष में फैसला आया है. हम क्षेत्र की जनता का भी आभार करते हैं कि उनकी दुआएं हमारे साथ थीं और आज हम निर्दोष साबित हुए.

सुखदेव पांसे के वकील ने कही ये बात
एडवोकेट विजेंद्र कुमार सक्सेना ने कहा कि हत्या हुई थी, जिसके लिए सीबीआई ने जांच करके इन लोगों को मुजरिम नहीं बनाया था. कोर्ट में चार्जशीट पेश नहीं हुई थी. जब पारधी समुदाय की तरफ से कोर्ट में गवाह पेश हुए, तो सीबीआई ने जिन लोगों को मुजरिम बनाया था. उनके खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला. आज एमपी-एमएलए कोर्ट ने इन्हें बरी कर दिया है.

19 सालों तक चली सुनवाई
पारधी कांड मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री सुखदेव पांसे और जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार बरी हो गए हैं. पारधी कांड के बाद कुल 16 लोगों के खिलाफ हत्या, दंगा भड़काने और आगजनी की धाराओं का मामला दर्ज किया गया था. हालांकि 19 सालों से सुनवाई के दौरान कई लोगों की मौत हो गई.

क्या था पारधी हत्याकांड?
9 सितंबर 2007 को बैतूल के चौथिया गांव में पारधी समुदाय की बस्ती में आगजनी की गई थी. इस घटना में दो लोगों की मौत भी हो गई थी और इनके शव कुएं से बरामद किए गए थे. इसके बाद ही पारधी कांड चर्चा में आया था. इस मामले में सुखदेव पांसे और अन्य पर आगजनी के आरोप लगाए गए थे. इस घटना के बाद पारधी समुदाय का पुनर्वास किया गया था.

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