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2005 से अब तक 18 संचालक, आठ संयुक्त संचालक बदले, नहीं बना मास्टर प्लान

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भोपाल का मास्टर प्लान पांचवी बार रद्द, नया ड्रॉफ्ट 2047 की आबादी को ध्यान में रखकर तैयार होगा

भोपाल.भोपाल मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया में 2005 से अब तक 18 संचालक व आठ संयुक्त संचालक बदल गए। चार बार प्लान बनकर ड्राफ्ट जारी भी हुआ, लेकिन अंतिम नोटिफिकेशन नहीं हो सका। हाल में मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2031 को 2020 में जारी कर 2024 तक सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली थी।

50 साल में भोपाल शहर के छह मास्टर प्लान बने, लेकिन महज दो ही लागू हो पाए। इस समय भी हम 20 साल पुराने यानी 2005 तक के लिए बनाए मास्टर प्लान के अनुसार चल रहे हैं। 1975 में पहला प्लान 1991 के लिए बना था, जबकि 1997 में 2005 तक के लिए मास्टर प्लान बना। दोनों में हरियाली बचाने कुछ प्रावधान रहे, लेकिन इसके बाद जितने भी प्लान बने वे हरियाली में निर्माण की राह ही खोलते रहे हैं। शहर कंक्रीट का जंगल बन गया। बारिश का पानी जमीन में नहीं उतर पा रहा है। भोपाल का मास्टर प्लान क्यों नहीं बन पा रहा? हर आम और खास के मन में ये सवाल एक बार तो उठता ही है। चार मास्टर प्लान रद्द कर दिए और अब 2047 यानी अगले 23 साल के लिए प्लान बनाया जा रहा…क्या ये हरियाली बचाएगा? ये बड़ा सवाल है।

भोपाल विकास योजना 1991

1991 का मास्टर प्लान तत्कालीन आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश एमएन बूच के नेतृत्व में बनाया गया था। इस प्लान का 1994 में इसे बनाना शुरू किया गया था। इसमें शहर की सीमा से लेकर बढ़ते ट्रैफिक और अन्य जनउपयोगी सुविधाओं, भविष्य की जरूरतों व अनुपयोगी भूमि का स्पष्ट उल्लेख किया था। इसे एक आदर्श प्लान कहा जा सकता था।

1997 में टीएंडसीपी के तत्कालीन डायरेक्टर पीवी देशपांडे ने तैयार कराया था। 2005 के प्लान ने शहर किनारे वनक्षेत्र समेत कई छोटे जंगल बताकर यहां अर्द्ध सार्वजनिक भू उपयोग से वनभूमि में निर्माण की राह प्रशस्त की। इसके बाद बड़ा तालाब एफटीएल से 50 मीटर में मनोरंजन के नाम पर मैरिज गार्डन की राह बनाई। 13 फीसदी ही हरियाली का क्षेत्र यहां रहा।

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