तीन दिवसीय राष्ट्रीय नंदिनी लोक मित्र शिविर शुरू, कई विचारकों ने आज के परिदृश्य में ज्वलंत विषयों की तरफ ध्यान खींचा
महात्मा गांधी और भूदान आंदोलन के प्रणेता विनोबा भावे ने सीमाओं के परे जाकर सेवा के कार्य कर दुनिया को एक संदेश दिया। आज भी इन दोनों संतों के विचार प्रासंगिक हैं। अतः हमारा फर्ज है कि उनके विचारों को जन जन तक पहुचाएं। ये विचार देवी अहिल्या विश्व विधालय की कुलपति डॉ रेणु जैन के हैं जो उन्होंने तक्षशिला परिसर स्थित स्कूल ऑफ सोशल साइंस में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय, नंदिनी लोकमित्र शिविर के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि बतौर कहे।
आयोजन यूनिवर्सल पीस एंड सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी, विनोबा विचार प्रवाह और देवी अहिल्या विश्वविधालय, गांधी शोध पीठ के सहयोग से किया जा रहा है।
शिविर में मध्यप्रदेश सहित गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक आदि राज्यों की बहनें भाग ले रही हैं। डॉ रेणु जैन ने आगे कहा कि गांधी ने सत्य और प्रेम को ईश्वर कहा और विनोबा ने सबको समता का संदेश दिया। वे अंधानुकरण के खिलाफ थे और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के हामी थे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी प्रवीण जोशी ने दी।
स्वागत भाषण देते हुए यूनिवर्सल पीस एंड सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ अनिल भंडारी ने कहा कि विनोबा महात्मा गांधी की परछाई थे। विनोबा भावे और गांधी ने समाज में प्रेम को बांटा और समाज को जोड़ा। आज भूख से ज्यादा प्रेम की जरूरत है। विनोबा विचार प्रवाह के संयोजक रमेश भैया ने कहा कि नंदिनी का अर्थ महिलाओं को दिमागी तौर पर सशक्त करना जिसमें करुणा, ममता, प्रेम और दया हो। हमारी संस्था छोटे छोटे शिविर आयोजित करते हैं। इस वर्ष का यह 11वां शिविर है। इस वर्ष 4 शिविर और होने है। ब्रह्म विद्या मन्दिर पवनार की साधिका ज्योति पाटनकर ने कहा कि विनोबा भावे महिलाओं को बड़ा सम्मान देते थे। जब इंदौर में महिलाओं के भद्दे और गंदे पोस्टर लगे थे उसे हटाने का काम कर नारी शक्ति के सम्मान की रक्षा की। इस अभियान को 50 वर्ष बाद आज भी याद किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि पूरे देश मे इंदौर का बड़ा नाम है। यहां पर देवी अहिल्या बाई होल्कर ने बहुत सेवा कार्य किए। उस कार्य को अब कस्तूरबा ट्रस्ट आगे बढ़ा रहा है।
अच्छे विचार ग्रहण कर समाज में फैलाएं
अखिल भारतीय हरिजन सेवक संघ नई दिल्ली के राष्ट्रीय मंत्री संजय राय ने कहा कि शिविर में रहकर हम मैत्री, प्रेम, सद्भावना और परोपकार की भावना सीखें, अच्छे विचार ग्रहण करें और उसे समाज में फैलाएं। समाजसेवी सुधीर गोयल ने कहा कि शिविर में जो सीखें उसे व्यवहार में उतारें और उसे समाज के मध्य लेकर जाएं। गांधी शोध पीठ की जानकारी स्कूल ऑफ सोशल साइंस की हेड डॉ रेखा आचार्य ने दी। इस मौके पर जालंधर भाई, रूपल अजबे, विमला बहन ने गीत सुनाए।
प्रारंभ में आलोक खरे, श्याम पांडे, अशोक मित्तल ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में आबिदा बेगम, राजेंद्र जैन, योगेश सक्सेना सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन शफी शेख ने किया। अत में आभार माना पुष्पेन्द्र दुबे ने। 23 दिसंबर को शिविर की शुरुआत सुबह 10 बजे से होगी और दिन भर में विभिन्न सत्र होंगे।

