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*दक्षिण अफ्रीका के समुद्री तटों पर चीन-रूस-ईरान के खतरनाक जंगी जहाज का जमावड़ा*

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 दक्षिण अफ्रीका के समुद्री तटों पर इस वक्त दुनिया की तीन बड़ी शक्तियों का जमावड़ा लगा हुआ है. चीन, रूस और ईरान के खतरनाक जंगी जहाज केप टाउन के करीब पहुंच चुके हैं. ये सभी देश ब्रिक्स (BRICS) समूह के साझा नौसैनिक अभ्यास ‘विल फॉर पीस 2026’ में हिस्सा लेंगे. यह युद्धाभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब वेनेजुएला संकट को लेकर तनाव चरम पर है. हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर लिया है. इसके अलावा अमेरिका ने तेल के टैंकरों को भी अपने कब्जे में लिया है. ट्रंप प्रशासन ने पहले ही ब्रिक्स को ‘अमेरिका विरोधी’ संगठन करार दिया है. इस सैन्य अभ्यास का नेतृत्व मुख्य रूप से चीन कर रहा है. दक्षिण अफ्रीका के सिमन्स टाउन नेवल बेस पर इन जहाजों की हलचल काफी तेज हो गई है. वाशिंगटन इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रख रहा है.

केप टाउन के तट पर इन देशों का आना एक बड़ा कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है. अमेरिका ने हाल ही में वेनेजुएला में जो आक्रामक कदम उठाए हैं उससे चीन और रूस नाराज हैं. ये देश अब अपनी समुद्री ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं. चीन इस पूरे ड्रिल का नेतृत्व कर रहा है. वह दुनिया को दिखाना चाहता है कि ब्रिक्स के पास भी अपनी सैन्य शक्ति है. ट्रंप ने ब्रिक्स को ‘एंटी-अमेरिकन’ बताया है. ऐसे में यह युद्धाभ्यास आग में घी डालने का काम कर सकता है. ईरान भी 2024 में इस समूह का हिस्सा बना था. अब वह भी अपनी ताकत दिखा रहा है.

दक्षिण अफ्रीका का सिमन्स टाउन बेस इस वक्त युद्ध के मैदान जैसा दिख रहा है. यहां हिंद महासागर और अटलांटिक महासागर का मिलन होता है. चीनी नौसेना का 161 मीटर लंबा डिस्ट्रॉयर ‘तांगशान’ (Tangshan) चर्चा का केंद्र बना हुआ है. इसके अलावा रूस और ईरान के आधुनिक जहाज भी यहां लंगर डाले हुए हैं. ये जहाज अगले शुक्रवार तक समुद्री सुरक्षा का अभ्यास करेंगे. इसमें समुद्री डकैतों से लड़ने और सुरक्षा बढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी. दक्षिण अफ्रीका ने 2023 में भी इन देशों की मेजबानी की थी. अब यह सहयोग और भी ज्यादा गहरा होता जा रहा है.

दक्षिण अफ्रीका की विदेश नीति इस वक्त अमेरिका की आंखों में चुभ रही है. ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए दक्षिण अफ्रीका की फंडिंग काट दी है. उनका आरोप है कि दक्षिण अफ्रीका दुनिया के ‘बुरे किरदारों’ का साथ दे रहा है. अमेरिका खास तौर पर ईरान के साथ इसके रिश्तों से नाराज है.

दक्षिण अफ्रीका खुद को गुट-निरपेक्ष यानी ‘न्यूट्रल’ देश बताता है. लेकिन रूसी जहाजों की मौजूदगी से उसके रिश्ते अमेरिका से खराब हो रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका की अपनी विपक्षी पार्टी ‘डेमोक्रेटिक अलायंस’ भी इस ड्रिल के विरोध में है. उनका कहना है कि सरकार प्रतिबंधित देशों के साथ सैन्य रिश्ते बढ़ा रही है.

इस ड्रिल में कुल 11 ब्रिक्स देशों को शामिल होना है. लेकिन अभी तक सभी देशों की भागीदारी साफ नहीं है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अपने जहाज भेजने की उम्मीद है. इंडोनेशिया, इथियोपिया और ब्राजील इस अभ्यास में ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल होंगे. भारत, मिस्र और सऊदी अरब की भूमिका पर अभी सस्पेंस बना हुआ है.

दक्षिण अफ्रीकी नौसेना का कहना है कि भागीदारी की पूरी जानकारी ड्रिल के दौरान ही दी जाएगी. यह युद्धाभ्यास पहले नवंबर में होना था. लेकिन जी-20 शिखर सम्मेलन की वजह से इसे टाल दिया गया था. अब यह पूरी दुनिया के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है.

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