क्या देश भर की नौकरशाही राजस्थान के आईएएस डॉ. समित शर्मा की पारदर्शी पहल से सीख लेगी
एस पी मित्तल, अजमेर
राजस्थान ही नहीं बल्कि देश भर के अधिकांश नौकरशाहों को लेकर यह शिकायत रहती है कि जन समस्याओं को लेकर लापरवाही बरतते हैं। साहब मीटिंग में हैं, यह बहाना कर चपरासी भी पीडि़त व्यक्ति को चैम्बर में घुसने नहीं देता है। भले ही ऐसे साहब चैम्बर में अपने यार दोस्तों के साथ गपशप कर रहे हों। चूंकि साहब के चैम्बर में पारदर्शी दरवाजा या खिड़की नहीं होती, इसलिए यही माना जाता है कि साहब मीटिंग में व्यस्त हैं। लेकिन अब राजस्थान के सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने सचिवालय स्थित अपने कक्ष में कांच की बड़ी खिड़की लगवाई है। इस खिड़की से कोई भी व्यक्ति देख सकता है कि डॉ. शर्मा क्या कर रहे हैं। यदि डाू. शर्मा मीटिंग में है तो भी पता चल जाएगा। वैसे तो किसी भी पीड़ित व्यक्ति को डॉ. शर्मा के कक्ष के बाहर इंतजार नहीं करना पड़ता। है, क्योंकि डॉ. शर्मा पीड़ित व्यक्ति से मिलने को हमेशा तत्पर रहते हैं। डॉ. शर्मा ने अपने कक्ष में कांच की बड़ी खिड़की लगाकर जो पारदर्शी पहल की है उसे देशभर के नौकरशाहों को अपनाना चाहिए। लोकतंत्र में जनता मालिक होती है और प्रशासनिक तंत्र नौकर। अब यदि नौकर है के दफ्तर के बाहर मालिक खड़ा रहे तो यह लोकतंत्र के लिए शर्म की बात है। लोकतंत्र के महत्व को बनाए रखने के लिए ही डॉ. शर्मा ने अपने कक्ष में पारदर्शी खिड़की लगवाई है। डॉ. शर्मा उन चुनिंदा आईएएस में से हैं जो यह मानते हैं कि जनता के टैक्स से ही हमें वेतन मिलता है, इसलिए हमारी जवाबदेही जनता के प्रति है। रिश्वत लेना ही भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि निर्धारित समय पर दफ्तर नहीं आना भी भ्रष्टाचार है। डॉ. शर्मा का कहना है कि जब सरकार हमें पूरा वेतन देती है, तब विलंब से दफ्तर पहुंचे भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। मैंने अपने कक्ष में कांच की खिड़की इसलिए लगवाई है ताकि सरकारी कामकाज और मेरी उपस्थिति में पारदर्शिता बनी रहे। डॉ. शर्मा ने बताया कि सामाजिक न्याय विभाग के तहत जरूरतमंद व्यक्तियों को लाभ दिलवाने में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बेहद संवेदनशील है। यही वजह है कि विभाग ने तमाम जानकारियां ऑनलाइन कर दी है। अब समाज के सभी वर्गों के लोगों को समय पर पेंशन, छात्रवृत्ति, अनुदान आदि मिल रहा है। आवेदन भी ऑनलाइन मांगे जाते हैं, ताकि जल्द निस्तारण किया जा सके। डॉ. शर्मा ने कहा कि वे स्वयं को जनता का सेवक मान कर ही आईएएस के दायित्व का निर्वाह करते हैं।
जवाबदेह कानून जल्द:
प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही जवाबदेह कानून लाने जा रही है। इस कानून के संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय और निखिल डे ने एक मसौदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समक्ष प्रस्तुत किया है। इन दोनों ने सीएम गहलोत से कहा कि मौजूदा समय में सूचना का अधिकार कानून है, इसके माध्यम से जरूरतमंद व्यक्ति को सरकारी विभागों की सूचनाएं मिल जाती है, लेकिन जिस अधिकारी की वजह से कार्य में विलंब हो रहा है, उस पर कोई कार्यवाही नहीं होती है। अरुणा राय और निखिल डे ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि जिस अधिकारी की वजह से कार्य में विलंब हो रहा है, उसकी जवाबदेही भी निर्धारित होनी चाहिए। तभी सरकार की योजनाओं की क्रियान्विति प्रभावी तरीके से हो सकती है। सरकार अनेक योजनाएं बनाती है, लेकिन उसका लाभ नौकरशाही के कारण नहीं मिलता है। फाइलों को लंबे समय तक लंबित रखा जाता है। यदि जवाबदेही कानून बनता है तो संबंधित अधिकारी को समय पर काम करना होगा।

