एस पी मित्तल,अजमेर
राजस्थान में पशुओं खास कर गायों में फैल रहे लम्पी स्किन डिजीज के मामले में जिस बात का डर था, वही हुआ। डिजीज की शुरुआत में ही सरकार से बार बार आग्रह किया कि प्रदेश की गौशालाओं को इस संक्रमित रोग से बचाया जाए, लेकिन समय रहते सरकार की ओर से कोई ठोस उपाय नहीं उठाए गए। जयपुर की सबसे बड़ी हिंगोनिया गौशाला सहित प्रदेश की अधिकांश गौशालाओं से गायों के संक्रमित होने की सूचनाएं आने लगी है। जिस देश में गाय को माता का दर्जा दिया गया है उस देश के राजस्थान में लम्पी स्किन डिजीज से हजारों गाय बेदम हो गई हैं। गायों के शरीर पर घूमड़ हो गए है तथा उन्होंने चारा पानी छोड़ दिया है। संक्रमित गायों पर जो मोटी मक्खियां बैठ रही हैं, उसेस यह रोग अन्य स्वास्थ्य गायों में तेजी से फैल रहा है। हालांकि कुछ गौशालाओं के प्रबंधकों ने संक्रमित गायों को अलग बाड़ों में रखने की व्यवस्था की है, लेकिन संक्रमित गायों पर बैठने वाली मक्खियों को किसी बाड़े में बंद नहीं किया जा सकता। वैसे भी बरसात के मौसम में गायों को गौशालाओं में सुरक्षित रखने की समस्या रहती है। ऐसे में संक्रमित गायों को अलग रखना बहुत मुश्किल है। जानकार पहले ही आशंका जता रहे थे कि यदि गौशालाओं में लम्पी की एंट्री होती है तो हालात संभाले नहीं जा सकेंगे। राज्य सरकार ने चेतावनी के बाद भी कार्यवाही नहीं की। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लगता है कि लम्पी के बारे में अखबारों में विज्ञापन देकर रोग को नियंत्रित कर लिया जाएगा। सीएम को यह समझना होगा कि गाय और अन्य पशु अखबार नहीं पढ़ते हैं। लम्पी से बचने के लिए पशुओं को टीका लगाया जाना चाहिए। सरकार ने 106 लाख रुपए की जो राशि कागजों में स्वीकृत की है, उससे बड़ी मात्रा में टीेके खरीदे जाएं। सरकार जब तक युद्ध स्तर पर पशुओं के टीके नहीं लगवाएगी, तब तक लम्बी पर नियंत्रण नहीं पाया जा सकता है। यह सही है कि बेजुबान पशु अपनी जान बचाने के लिए कोई आंदोलन भी नहीं कर सकते हैं। सीएम गहलोत को स्वयं ही टीके लगवाने की पहल करनी होगी। गौशालाओं में केमिकल का छिड़काव करने की भी सख्त जरुरत है। प्रदेश में पशु चिकित्सक नहीं के बराबर है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के स्वयं सेवी संगठनों का सहयोग लिया जाना चाहिए। सीएम गहलोत को यह भी समझना चाहिए कि राज्य की आय का एक मुख्य स्त्रोत पशुधन भी है। पशुओं को नुकसान होता है तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ेगी।

