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घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट:यहां रोजगार है बड़ा मुद्दा…

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भोपाल। बैतूल जिले की घोड़ाडोंगरी विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। इस सीट पर आदिवासी मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं। यहां पर 60 फीसदी आदिवासी मतदाता हैं। वर्तमान में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। घोड़ाडोंगरी विधानसभा के सियासी इतिहास की बात करें तो अब तक हुए कुल 14 चुनावों में कांग्रेस ने 5 बार तो भाजपा ने 6 बार जीत हासिल की है। वहीं जन संघ ने 2 बार और जनता पार्टी ने 1 बार जीत दर्ज की। अब जब विधानसभा चुनाव होने में कम समय बचा है तो भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां जीत के लिए तैयारियों में जुट गईं हैं। कांग्रेस का प्रयास जहां एक बार फिर इस सीट पर जीत हासिल करने की है तो वहीं भाजपा इस सीट पर वापसी करने की कोशिश कर रही है।
विकास के मामले में यह क्षेत्र काफी पिछड़ा हुआ है. हालात ये हैं कि बुनियादी सुविधाओं तक के लिए तरस रहे हैं लोग। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार इन तीनों मोर्चो में यह क्षेत्र काफी पीछे है। लोगों को कहना है कि सरकार किसी की भी हो। विकास कितना भी करा लो। पर रोजगार नहीं है तो सब बेकार है। स्थानीय निवासी विशाल पांडे ने कहा, गांव में रोजगार के कोई साधन नहीं हैं। युवा बाहर जा रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का भी अभाव है। सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना दिया है, लेकिन डॉक्टर नहीं है। इलाज के लिए आज भी 24 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय बैतूल जाना पड़ता है।
भाजपा-कांग्रेस में कई दावेदार
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के ब्रह्मा भलावी भाजपा की गीता उइके को 17900 वोटों से हराकर विजयी हुए थे। लंबे समय तक शाहपुर ब्लॉक की एक ग्राम पंचायत के सरपंच रहे ब्रह्मा भलावी का पूरे विधानसभा क्षेत्र में कोई वर्चस्व नहीं था, लेकिन अब वह पूरे क्षेत्र की प्रखर आवाज बन गए हैं। वर्तमान में ब्रहमा भलावी का कोई खासा लोक संपर्क नहीं है लेकिन, कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़ा रहना उनकी ताकत है। फिलहाल भाजपा की गुटबाजी के चलते उन्हें अगले चुनाव में भी लाभ मिल सकता है। भाजपा की तरफ से मंगल सिंह धुर्वे पूर्व विधायक है वह 2016 में हुए उपचुनाव के दौरान विधायक बने थे,लेकिन गंभीर आरोपों के चलते 2018 में उनकी टिकट काट दी गई थी अब एक बार फिर हेमंत खंडेलवाल ग्रुप इन्हें भाजपा से टिकट के लिए प्रयासरत है। उनके अलावा राजेश परते पाढर भाजपा के मंडल अध्यक्ष है और इनकी छवि कार्यकर्ताओं और जनता में ठीक है, मिशनरीज प्रभाव वाले क्षेत्र में राजेश के पिता जनसंघ के जमाने से भाजपा का झंडा लिए रहे हैं। दीपक उइके भाजपा अजजा मोर्चा के प्रदेश मंत्री है वे पूर्व विधायक रामजीलाल उइके के पुत्र है। हालांकि उनकी मां एक बार चुनाव हार चुकी हैं। अरविंद धुर्वे का नाम भी अहम दावेदारों में एक है वे, चोपना मंडल के महामंत्री हैं। पूर्व विधायक गंगाबाई उइके भी एक बार फिर भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रही हैं। मनीष कुमरे शाहपुर भाजपा मंडल के अध्यक्ष हैं वे भी प्रबल दावेदार हैं। नरेंद्र उइके सरपंच है और अजजा मोर्चे के पदाधिकारी हैं। इनके अलावा अजजा मोर्चे के ही राधेश्याम उइके भी अपनी दावेदारी पेश कर यहां सक्रिय हैं।  वहीं कांग्रेस से ब्रह्मा भलावी का चुनाव लडऩा तय माना जा रहा है। वह क्षेत्र में सक्रिय भी हैं। इनके अलावा घोड़ाडोंगरी जनपद अध्यक्ष राहुल उइके का नाम भी दावेदार के रूप में है। वह मौजूदा विधायक के दामाद भी है और भाजपा के मजबूत गढ़ चोपना क्षेत्र में इनका प्रभाव अच्छा माना जाता है। बैतूल के डॉक्टर राकेश ककोडिया भी इस सीट पर सक्रिय है उन्हें कांग्रेस से टिकट का भरोसा है और पूरी ताकत से इस समय यहां जनता के बीच पैठ बनाने में लगे हैं।
जातीय समीकरण
इस सीट का जातिगत विश्लेषण किया जाए तो यह तथ्य सामने आता है कि गोंड जनजाति कभी भाजपा, तो कभी कांग्रेस के साथ बहुमत में जाता रहा है। पिछले सात-आठ वर्षो में क्रिश्चियन ईसाई मिशनरियों के षड्यंत्र और जयस के बढ़ते संपर्क के कारण गोंड जनजाति मतदाताओं ने भाजपा से कतिपय दूरी बनाई है। 2018 के विधानसभा चुनाव में गोंड बड़े पैमाने पर कांग्रेस के साथ गए थे, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में लगभग 50 प्रतिशत गोंड वोटरों ने पुन: भाजपा को वोट दिया था।  वर्तमान में गोंड मतदाताओं में भाजपा की पैठ कमजोर हुई है ऐसा स्थानीय जानकारों का कहना है। कोरकू जनजाति भी कभी भाजपा-कभी कांग्रेस के साथ रहा है वर्तमान में लोगों का कहना है कि कोरकू जाति के मतदाताओं में भाजपा और कांग्रेस का समान प्रभाव बना हुआ है। यादव मतदाताओं का बहुमत भाजपा के साथ आता है। कुछ हिस्सा कांग्रेस के साथ रहता है। कतिया समाज को परम्परागत रूप से कांग्रेस का समर्थक वोटर माना जाता है। मेहरा समाज अजा श्रेणी में आता है और यह माना जाता है कि मेहरा समाज कांग्रेस को बहुमत में वोट करता रहा है। राठौर साहू मतदाता इस सीट पर फिलहाल कांग्रेस के करीब नजर आ रहे हैं। कलार भाजपा और कांग्रेस के साथ जाते रहे हैं। कुर्मी मतदाता भाजपा के ज्यादा करीब है। चोपना पुनर्वास क्षेत्र में निवास करने वाले करीब 19000 बंगाली भाषी मतदाताओं में से अधिसंख्य मतदाता भाजपा का साथ देते आए हैं। सामान्य वर्ग के ब्राम्हण, वैश्य, पंजाबी और ठाकुर मतदाता भाजपा के पक्ष में रहते आए हैं। अन्य ओबीसी जातियाँ इनमें प्रजापति, विश्वकर्मा, ओझा सहित अन्य ओबीसी जातियों के अधिकांश मतदाता भाजपा के पक्ष में रहते आए हैं। मुस्लिम और ईसाई मतदाता भाजपा के खिलाफ वोट करते रहे हैं। इस सीट पर हितग्राहियों का बड़ा वोट वर्ग है, लेकिन लाभ देने वाली संस्थाओं में भ्रष्टाचार भी बड़ा मुद्दा है।
जयस ने बढ़ाई अपनी पैठ
 इस सीट पर भाजपा के लिए आपसी गुटबाजी के साथ- साथ जयस की गतिविधियों ने भी चिंता की लकीरें खींची हैं। पिछले साल हुए पंचायत चुनावों में यहां जयस ने बड़ी संख्या में अपने अलग उम्मीदवार खड़े किए थे और कसीस ने इस संगठन के साथ रणनीतिक साझेदारी सी कर रखी है। भाजपा को अगर यह सीट जीतनी है ,तो उसे नए और युवा चेहरे को मौका देना चाहिए। फैक्ट यह है कि इस सीट पर भाजपा को 2023 में जीतना वर्तमान में थोड़ा सा कठिन नजर आ रहा है। इस सीट पर जिन जनजाति ग्रामों में भाजपा के कार्यकर्ता लोगों की मदद करते हैं वहां यह समाज भाजपा के साथ हैं । अन्य ग्रामों में जयस, कांग्रेस और ईसाई मिशनरियां जनजाति समाज को भाजपा के खिलाफ करने में सतत रूप से लगी हुई हैं। घोड़ाडोंगरी विधानसभा में स्थित तीन नगर परिषदों में से घोड़ाडोंगरी नगर परिषद में कांग्रेस का, चिचोली नगर परिषद में भाजपा का और शाहपुर नगर परिषद में निर्दलीय अध्यक्ष है। इसी तरह 3 जनपद पंचायतों में से मात्र शाहपुर जनपद पंचायत में भाजपा का अध्यक्ष है, जबकि घोड़ाडोंगरी एवं चिचोली जनपद पंचायत में कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। स्थानीय जानकारों का कहना है कि 2023 में किसी नए और स्थानीय चेहरे को भाजपा को टिकट देनी चाहिए, क्योंकि पुराने जनजाति नेताओं खासकर पूर्व विधायकों को आम वोटर और पार्टी कैडर स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है। जयस और मिशनरियों के जाल ने भाजपा को यहां बहुत तगड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आम कार्यकर्ताओं एवं जानकारों का कहना है कि भाजपा को पूर्व विधायक मंगल सिंह, गीता उडक़े को उम्मीदवार बनाने से बचना चाहिये। घोड़ाडोंगरी विधानसभा में जयस और मिशनरीज का नेटवर्क सरकारी तंत्र में भी जबरदस्त तरीके से विकसित हो चुका है। यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, महिला बाल विकास एवं ग्रामीण विकास जैसे मैदानी रूप में सक्रिय महकमों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों का सीधा दखल जयस और मिशनरियों के साथ देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार बड़ी संख्या में कर्मचारियों द्वारा इन संगठनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है साथ ही जयस की नियमित बैठकों में भी कर्मचारियों का आना जाना आम बात है। यह गठबंधन मिशनरियों के एजेंडे पर भाजपा के विरुद्ध जनजातीय समाज में अलगाव की जमीन तैयार कर रहे हैं।

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