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विधानसभा चुनाव के पहले मैहर-मुलताई  को जिलों की सौगात

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भोपाल। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले शिवराज सरकार दो तहसीलों को जिलों की सौगात दे सकती है। इसके लिए सरकार स्तर पर गंभीरता से मंथन किया जा रहा है। यह वे तहसीलें हैं, जिनको जिला बनाए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। इन दोनों ही जगहों को जिला घोषित कर सरकार सियासी समीकरण साधेगी।  इसको लेकर राजनीतिक गलियारों के साथ प्रशासनिक हल्कों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि जिन तहसीलों को जिला बनाए जाने की चर्चाएं हैं, उनमें मैहर के अलावा मुलताई या पाढुर्णा का नाम शामिल है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही मुख्यमंत्री द्वारा मऊगंज और नागदा को जिला बनाने की घोषणा की जा चुकी है। हालांकि मैहर का नाम परिवहन विभाग की वेबसाइट में जिले के रूप में दर्ज हो चुका है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में प्रवास के दौरान मुलताई और पाढुर्णा को मिलाकर नया जिला घोषित किया जा  सकता है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार शासन ने छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में शामिल दोनों ही तहसीलों को लेकर जानकारी मांगी है। पिछले माह सीएम के दौरे के समय इसकी घोषणा के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री का दौरा टल गया था। अब सीएम जनदर्शन और रोड शो के लिए जिलों में पहुंच रहे हैं, तो एक बार फिर यहां नए जिले के गठन को लेकर चर्चा है। माना जा रहा है कि छिंदवाड़ा में पूर्व सीएम कमलनाथ की ताकत कमजोर करने के लिए बीजेपी इन दोनों ही तहसीलों को मिलाकर नया जिला बनाने की पक्षधर हैं ताकि, लोगों को सुविधा मिल सके। दूसरी ओर मैहर को लेकर भी इसी तरह की स्थिति है। मैहर को मुख्यमंत्री रहते कमलनाथ ने तीन साल पहले जिला घोषित किया था, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं होने से मैहर जिला नहीं बन पाया। विधायक नारायण त्रिपाठी तब से लगातार मैहर को जिला बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय भाजपाई त्रिपाठी को इसका क्रेडिट नहीं लेने देना चाहते। इसलिए घोषणा टल रही है पर मैहर का नाम परिवहन विभाग की वेबसाइट में शामिल किए जाने और जिले का कोड 73 आवंटित बताने से मैहर के जिला घोषित होने की संभावना बढ़ गई है। अगर ये दो नए जिले घोषित हुए तो प्रदेश में जिलों की संख्या बढक़र 56 हो जाएगी। उधर, जिले की कवायद की वजह से अब त्रिपाठी के तीखे तेवर भी शांत नजर आना शुरु हो गए हैं।

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