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लू लगने से बीमार हुए भगवान, अब 15 दिन बंद रहेंगे मंदिर के पट

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बुंदेलखंड में आज से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू हो गयी है. पन्ना में ये यात्रा 168 साल से निकाली जा रही है लेकिन बदले माहौल में इस बार कुछ परंपरा बदल गयीं. कोरोना के कारण यहां श्रद्धालुओं को कोविड टेस्ट के बाद प्रवेश दिया गया. परंपरा के मुताबिक भगवान जगन्नाथ को लू लग गयी है मंदिर के पट अब 15 दिन तक बंद रहेंगे.

ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर की तर्ज पर पन्ना में भी हर साल भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है. भगवान जगन्नाथ स्वामी को लू लग गयी है. अब वो आराम करेंगे. इसलिए 15 दिन के लिए जगन्नाथ स्वामी मंदिर के पट बंद कर दिए गए हैं. पुरी की तर्ज पर मंदिरों की नगरी पन्ना में भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा का कार्यक्रम 168 वर्षों से ज्यादा समय से होता आ रहा है.

पन्ना जिले में भगवान जगन्नाथ स्वामी का प्राचीन मंदिर है. यहां भगवान जगन्नाथ स्वामी अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ विराजमान हैं. मंदिरों की नगरी पन्ना में भगवान जगन्नाथ स्वामी मंदिर में रथयात्रा का कार्यक्रम बड़े धूमधाम के साथ मनाने की परंपरा 168 साल पहले शुरू हुई थी. लेकिन रथयात्रा के पहले भगवान लू लगने से बीमार पड़ जाते हैं. जगन्नाथ स्वामी को धूप में स्नान कराने से लू लग जाती है.

मंदिर में राज परिवार की उपस्थिति में भगवान के स्नान यात्रा की रस्म अदायगी की जाती है. इसी के साथ ऐतिहासिक रथ यात्रा महोत्सव का आगाज भी हो जाता है. लेकिन इस वर्ष राज परिवार के सदस्य किसी कारणवश नहीं शामिल हो पाए. भगवान के जल्द अच्छे होने के लिए भक्त प्रार्थना करते हैं. सबसे पहले मंदिर के गर्भगृह से भगवान को बाहर लाया जाता है. यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ औषधीय जल से भगवान को स्नान कराया जाता है. इसी दौरान लू लगने से भगवान बीमार पड़ जाते हैं.

भगवान के बीमार होने पर उनकी दिनचर्या और भोजन व्यवस्था भी बदल दी जाती है. ठीक होने तक उन्हें रोज वैद्य दवा देते हैं. इस दौरान मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद रहते हैं. इस साल कोविड जांच के बाद श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया. सीमित श्रद्धालुओं और पन्ना कलेक्टर, मंदिर पुजारियों की मौजूदगी में आज सारी रस्में निभायी गयीं.

जगन्नाथ स्वामी मंदिर के पुजारी राकेश गोस्वामी बताते हैं मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के 36 वर्ष बाद पन्ना में भी आषाढ़ शुक्ल की द्वितीया को जगन्नाथ जी की रथयात्रा निकालने की शुरुआत हुई. बीते 168 वर्षो से रथयात्रा निकालने का सिलसिला यहां अनवरत चला आ रहा है. इस रथ यात्रा में हजारों की भीड़ के साथ घोड़े-हाथी, ऊंट की सवारी निकलती है. लेकिन कोरोना काल में गाइडलाइंस के अनुसार रथयात्रा निकाली जाएगी.

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