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*फर्जी अंकसूची का मामला:गोगावा जनपद अध्यक्ष की बहू गिरफ्तार*

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खरगोन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भर्ती घोटाला: पुलिस ने की बड़ी कार्रवाई मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के गोगावा जनपद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भर्ती घोटाले में पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कदम…

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के गोगावा जनपद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भर्ती घोटाले में पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस मामले में भाजपा समर्थित जनपद अध्यक्ष गंगाबाई मंडलोई की बहू मनीषा अजीत मंडलोई को **फर्जी अंकसूची** के जरिए नौकरी हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी उच्च न्यायालय के आदेश पर की गई है, जिसने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया।

गोगावा थाना प्रभारी एम.आर. रोमडे ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी से रिमांड अवधि के दौरान पूछताछ की जाएगी। इसके साथ ही, मूल अंकसूची और हैंडराइटिंग की जांच भी कराई जाएगी ताकि मामले की गहराई से पड़ताल की जा सके।

भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताएं
2022-23 में गोगावा जनपद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के लिए 9 पदों पर भर्ती प्रक्रिया का आयोजन किया गया था। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन थी। इसी भर्ती के तहत पेनपुर गांव की आंगनवाड़ी क्रमांक-1 के लिए मनीषा का चयन किया गया, जो कि जनपद अध्यक्ष गंगाबाई मंडलोई की बहू हैं।

आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान मनीषा ने अंकसूची में हेरफेर कर अपने अंकों को बढ़ा लिया, जिसके कारण वह चयन सूची में शामिल हो गईं। इस पर अन्य महिला उम्मीदवारों ने आपत्ति जताते हुए नियुक्ति को रद्द करने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने की मांग की थी। उनका कहना था कि मनीषा का चयन अनियमितताओं के आधार पर किया गया है, जो न केवल अन्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठाता है।
हाईकोर्ट की सख्ती और पुलिस की निष्क्रियता
स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इस मामले में शिकायत के बावजूद लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे पीड़ित महिलाओं में निराशा फैल गई। अंततः, 12 सितंबर 2024 को इन महिलाओं ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए 4 नवंबर को गोगावा थाने में धारा 420 और 467 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।

इसके बाद भी जब पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं की, तो फरियादियों ने पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय ने इस बार सख्ती दिखाई और गिरफ्तारी के आदेश जारी किए। परिणामस्वरूप, मंगलवार को पुलिस ने मनीषा को गिरफ्तार कर लिया, जो कि इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है।

भर्ती घोटाले का सामाजिक प्रभाव
इस तरह के भर्ती घोटाले न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर करते हैं, बल्कि समाज में युवाओं के बीच निराशा और असंतोष की भावना को भी बढ़ावा देते हैं। जब योग्य उम्मीदवारों को उनकी मेहनत के मुताबिक अवसर नहीं मिलते हैं, तो यह देश के विकास में एक बाधा बनता है।

आंगनवाड़ी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्यकर्ताओं की भर्ती में पारदर्शिता और निष्पक्षता आवश्यक है। इस प्रकार के घोटालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने से ही हम समाज में विश्वास और न्याय की भावना को बना सकते हैं।

भविष्य के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता
इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन को भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने की आवश्यकता है। केवल तभी हम युवा पीढ़ी को सही तरीके से आगे बढ़ने का अवसर दे सकते हैं। आने वाले समय में, यह आवश्यक होगा कि प्रशासन ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

समाज के हर वर्ग को इस तरह की अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और प्रशासन से मांग करनी चाहिए कि वह इस तरह के धोखाधड़ी के मामलों में सख्त कार्रवाई करे। यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि समस्त समाज का है, जो एक बेहतर और ईमानदार भविष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रयासरत है।

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