नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि वैश्विक अनिश्चितताओं को अब तेल नहीं बल्कि सोने की कीमतें ज्यादा सटीक तरीके से दर्शा रही हैं. उन्होंने बताया कि पहले भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक संकट की स्थिति में तेल की कीमतें तेजी से उछल जाती थीं, लेकिन अब तेल का प्रभाव घटा है और सोने ने उसकी जगह ले ली है.
बदलती वैश्विक तस्वीर
मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा समय में लगभग हर देश आर्थिक दबाव में है. व्यापार नीतियों की खींचतान और भू-राजनीतिक तनाव कई अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर पर असर डाल सकते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि निवेशकों को अधिक सावधानी बरतनी होगी क्योंकि शेयर बाजार में जल्द ही करेक्शन देखने को मिल सकता है. आरबीआई ने भी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर को 5.5% पर बनाए रखा है और कहा है कि भविष्य की तस्वीर अभी भी धुंधली बनी हुई है.
तेल की घटती अहमियत
आरबीआई गवर्नर ने कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2025 में कहा कि पहले दशकों तक तेल की कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर मानी जाती थीं. लेकिन अब GDP में तेल की हिस्सेदारी कम हो गई है. यही कारण है कि तेल की कीमतें भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद स्थिर बनी हुई हैं. इसके उलट, सोने की कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे हो रही हैं और यही वैश्विक अनिश्चितता का नया संकेतक बन चुका है.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सोना
पिछले सात हफ्तों से लगातार सोने की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. शुक्रवार को हाजिर सोना 3,867 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. वहीं, एक दिन पहले यह 3,896.9 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर थोड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ था. विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानकर उसकी ओर तेजी से रुख कर रहे हैं.

