अगर साल 2025 को सर्राफा बाजार में तेजी के लिहाज से शानदार कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। साल की शुरुआत में जो निवेशक वैश्विक अनिश्चितताओं से घबराए हुए थे, साल के अंत में वही सबसे ज्यादा मुनाफे में हैं। 24 दिसंबर 2025 को बाजार बंद होने तक, सोने ने1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया, जबकि चांदी ने औद्योगिक मांग के दम पर 2.23 लाख रुपये प्रति किलो का नया कीर्तिमान रच दिया।2025: 24 दिसंबर को सोने ने 1.39 लाख रुपये और चांदी ने ₹2.32 लाख रुपये का ऐतिहासिक स्तर छूकर निवेशकों को दिया बंपर रिटर्न दिया है। जानें सर्राफ बाजार में 2025 की पूरी कहानी और 2026 के लिए क्या है विशेषज्ञों की राय।
वर्ष 2025 को वैश्विक वित्तीय इतिहास में एक ऐसे निर्णायक वर्ष के रूप में याद किया जाएगा, जब ‘हार्ड एसेट्स’ (Hard Assets) ने कागजी मुद्रा के वर्चस्व को सीधी चुनौती दी। यह केवल कीमतों में बढ़ोतरी का साल नहीं था। यह उस भरोसे के टूटने का साल था जो दशकों से पारंपरिक वित्तीय प्रणाली पर कायम था। निवेशक, केंद्रीय बैंक और आम उपभोक्ता सभी एक ही दिशा में भागते नजर आए। सुरक्षा की ओर। और वित्तीय दुनिया में सुरक्षा का दूसरा नाम ‘सोना’ है।
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क्रिसमस सप्ताह 2025 के दौरान जब दुनिया छुट्टियों के जश्न में डूबी थी, वैश्विक सर्राफा बाजार में एक अलग स्तर की तेजी दिखी। 22 दिसंबर 2025 को सोने ने वैश्विक बाजार में 4,400 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर को ध्वस्त कर दिया, जबकि चांदी ने 70 डॉलर प्रति औंस के दरवाजे पर दस्तक दी। यह उछाल सामान्य नहीं था; यह 1979 के बाद का सबसे बड़ा वार्षिक लाभ था, जिसने इक्विटी, बॉन्ड्स और यहां तक कि क्रिप्टोकरेंसी के रिटर्न को भी बौना साबित कर दिया।
क्या यह केवल एक तेजी थी या एक बड़ा बदलाव? आइए, अखिल भारतीय सर्राफा बाजार (आईबीजेए) और कॉमेक्स (कॉमेक्स) के सटीक आंकड़ों के जरिए समझते हैं। 2025 में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़त की पूरी कहानी।
सर्राफा बाजार में कैसा रहा 2024 से 2025 का सफर
निवेशकों के लिए पिछले दो साल किसी लॉटरी से कम नहीं रहे। अगर हम 1 जनवरी 2024 के भावों की तुलना 24 दिसंबर 2025 के भावों से करें, तो तस्वीर एकदम साफ हो जाती है।
भारतीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बदलाव
चांदी (1kg)
₹93,500 ₹2,32,741 + ₹139,241 की बढ़त
सोना (10g)
₹76,214 ₹1,39,216 + ₹63,002 की बढ़त
भारतीय निवेशकों की संपत्ति में केवल चांदी के निवेश से ही प्रति किलो लगभग 1.39 लाख रुपये का इजाफा हुआ है। सोने ने भी प्रति 10 ग्राम पर 63 हजार रुपये से ज्यादा का मुनाफा दिया है, जो किसी भी अन्य सुरक्षित निवेश विकल्प (जैसे FD या बॉन्ड) से कई गुना अधिक है।
वैश्विक बाजार में बदलाव
गोल्ड स्पॉट
1 जनवरी 2024 (USD/oz) 24 दिसंबर 2025 (USD/oz) बदलाव (डॉलर में)
$2,063 $4,480 + $2,417
सिल्वर स्पॉट
$23.80 $71.85 + $48.05
2025 के लिए सर्राफा बाजार का रिपोर्ट कार्ड
सर्राफा बाजार के जानकारों के लिए यह साल किसी सपने से कम नहीं रहा। 24 दिसंबर की क्लोजिंग के आधार पर सोने और चांदी ने जबरदस्त रिटर्न दिया है।
1. भारतीय सर्राफा बाजार (IBJA & MCX)
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन और एमसीएक्स के आंकड़ों के मुताबिक, शादियों के सीजन और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने कीमतों को सहारा दिया। 24 दिसंबर को एमसीएक्स पर सोना ₹1,38,247 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ। इंट्रा-डे में इसने ₹1,38,428 का उच्च स्तर भी छुआ। खुदरा बाजार (GST सहित) में कीमतें कई शहरों में ₹1.41 लाख के करीब पहुंच गई हैं। वहीं, चांदी ने इस साल सोने से भी तेज दौड़ लगाई। कल चांदी ₹2,23,359 प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर ट्रेड करती नजर आई।
2. अंतरराष्ट्रीय बाजार
ग्लोबल बेंचमार्क कॉमेक्स पर भी हलचल तेज रही। डॉलर में कमजोरी और फेडरल रिजर्व की नीतियों ने यहां आग में घी का काम किया। 24 दिसंबर को स्पॉट गोल्ड $4,480.60 प्रति औंस पर बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि $4,500 का स्तर अब एक मजबूत सपोर्ट बन सकता है। दूसरी ओर, सिल्वर स्पॉट 70 डॉलर प्रति औंस का औसत पारकर 71.85 प्रति औंस पर पहुंच गया। वैश्विक बाजार में आई इस तेजी को केवल मांग और आपूर्ति के नियम से नहीं समझा जा सकता। इसके पीछे तीन बड़े मैक्रो-इकोनॉमिक कारक जिम्मेदार थे।
पहला- चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ी, क्रिटिकल मिनरल की लिस्ट में शामिल
2025 में चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण केवल निवेश में इजाफा नहीं रहा। 2025 में इसे ‘ग्रीन मेटल’ के रूप में नई पहचान मिली। अमेरिका की ओर से चांदी को ‘क्रिटिकल मिनरल’ की सूची में शामिल करने और सोलर पैनल/ईवी बैटरी सेक्टर में मांग बढ़ने से लंदन और न्यूयॉर्क के वॉल्ट्स में चांदी की भारी कमी देखी गई।
दूसरा- सेंट्रल बैंकों की आक्रामक खरीदारी
चीन, रूस और ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने 2025 में डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने के भंडार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की। ‘वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल’ के मुताबिक, यह खरीदारी पिछले 50 वर्षों में सबसे अधिक रही।
तीसरा- ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव
साल भर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और मध्य-पूर्व में जारी तनाव ने निवेशकों को शेयर बाजार के जोखिम से हटाकर सोने की सुरक्षा की ओर मोड़ा।
2026 का आउटलुक
वरिष्ठ विश्लेषकों और ब्रोकरेज हाउस (जैसे गोल्डमैन सैक्स) का मानना है कि 2026 में भी यह बुल रन जारी रह सकता है। 2026 के लिए सोने का अगला लक्ष्य $4,900 – $5,000 प्रति औंस और चांदी का लक्ष्य $85 – $90 प्रति औंस (लगभग ₹2.50 लाख प्रति किलो) रखा जा रहा है।

