दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन की पूजा होती है और इस साल मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला आदर्श गौशाला में गोवर्धन महोत्सव बड़े ही उल्लास के साथ मनाया गया. इसके लिए यहां कई दिनों से चल रही तैयारियों के तहत 108 टन गोबर के गोवर्धन बनाए गए थे. जो संभवतः प्रदेश के सबसे बड़े गोवर्धन हैं. ग्वालियर के लाल टिपारा में स्थित आदर्श गौशाला में गोवर्धन पूजा के लिए मेरठ से कारीगर बुलाए गए थे. जिनके द्वारा 108 टन गोबर का उपयोग कर गोवर्धन पर्वत तैयार किया गया. साथ ही गोवर्धन भगवान का विग्रह भी इसमें दर्शाया गया. आदर्श गौशाला प्रबंधन की माने तो यहां प्रदेश के सबसे बड़े गोवर्धन भगवान बनाए गए हैं. सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता यह आयोजन पूरी तरह जैविक थीम पर रहा. जिसमें गोवर्धन से लेकर अनकूट प्रसादी और गौ प्रसादी भी पूरी तरह जैविक सामग्री से तैयार की गई थी.
ग्वालियर में बुधवार को गोवर्धन पूजन किया गया. मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गोवर्धन लालटिपारा स्थित गोशाला में 108 टन गोबर से बनायर गया. यहां 21 फीट ऊंचा और 11 फीट चौड़ा गोवर्धन पर्वत बनाया गया, जिसकी पूजा करने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. यहां मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, संभागीय आयुक्त मनोज खत्री, कलेक्टर रुचिका चौहान, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय सहित अनेक अधिकारी भी मौजूद थे. गोशाला में आसपास के 50 से ज्यादा गांव के लोग अलग-अलग समय में सामूहिक पूजन करने पहुंचे. मुख्य वक्ता आरएसएस के यशवंत इंदपुरकर थे. गोवर्धन पर्वत बनाने का काम मेरठ से आए साधुओं के दल ने किया था.
गोशाला में उगाई गई सब्जियों की प्रदर्शनी लगाई गई
गोशाला के संरक्षक संत श्री ऋषभ देव आनंद महाराज ने बताया कि लाल टिपारा स्थित गोशाला में हर साल की तरह इस वर्ष भी दीपावली की पड़वा पर गोवर्धन पूजा का आयोजन किया गया. इसमें सनातन धर्म को मानने वाले और विभिन्न समाज सेवी संगठन के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए. साथ ही आसपास के गांव के लोग पूजा में शामिल हुए. इस मौके पर गौशाला मे उगाई गई सब्जी, मिलेट्स और फलो कि प्रदर्शनी भी लगाईं गई जो गोबर के खाद से उगाई गई है. इससे लोगो का स्वास्थ्य निरोगी रहेंगे. इस अवसर पर गौशाला में सुबह 11:30 बजे से 108 टन गोबर से निर्मित गोवर्धन पर्वत और 8 फीट ऊंची गोबर से निर्मित भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा का पूजन किया जाएगा. कार्यक्रम में अलग-अलग विधाओं के संस्कृतिक कार्यक्रम एवं देशी खेलों के प्रदर्शन के साथ भी लोगों को सम्मानित किया गया, जिनमें चिकित्सक, गौ सेवक, समाजसेवी, शिल्पी, प्रकृति प्रेमी आदि शामिल हुए. देसी उत्पाद के स्टॉल आदि की व्यवस्था भी रही.

