नई दिल्ली। सरकार नैशनल अकाउंट्स की गणना के लिए बेस ईयर बदलने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को संसद में बताया कि नया बेस ईयर 2022-23 होगा। यह बदलाव 27 फरवरी से लागू होगा। यह बदलाव मौजूदा डेटा को अर्थव्यवस्था के अनुसार और सटीक बनाने के लिए किया जा रहा है। अभी तक बेस ईयर के तौर पर 2011-12 का इस्तेमाल हो रहा है। यह एक दशक से भी ज्यादा पुराना हो चुका है।
वित्त मंत्री ने कहा कि बेस ईयर अपडेट करने से नैशनल अकाउंट्स देश की मौजूदा आर्थिक गतिविधियों को ज्यादा सही तरीके से दिखाएगा। वित्त मंत्री का यह बयान आईएमएफ की एक रिपोर्ट में भारत के नैशनल अकाउंट्स डेटा को मिले C ग्रेड के बाद आया है। उन्होंने साफ किया कि यह ग्रेड डेटा की गुणवत्ता पर नहीं बल्कि पुराने बेस ईयर की वजह से दिया गया था।
जीडीपी के आंकड़े
अब सरकार बेस ईयर को 2022-23 कर रही है। यह मुद्दा तब और चर्चा में आया जब राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जुलाई से सितंबर की तिमाही के ताजा जीडीपी आंकड़े जारी किए। देश की रियल जीडीपी 8.2% बढ़ी, जो उम्मीद से कहीं ज्यादा थी। बजट बनाने के लिए 7 जनवरी को जो शुरुआती अनुमान जारी होंगे वे अभी पुराने आंकड़ों पर ही आधारित होंगे। फरवरी में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय खुदरा महंगाई के नए आंकड़े भी जारी करेगा। ये 2023-24 की कीमतों पर आधारित होंगे और जनवरी की महंगाई को मापेंगे।
यह बदलाव मौजूदा डेटा में कुछ खास कमियों को भी दूर करेगा। मसलन अभी पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के तहत मिलने वाले अनाज पर कोई खर्च नहीं दिखाया जाता क्योंकि लोगों को इसके लिए सीधे पैसे नहीं देने पड़ते। मंत्रालय अभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में भी सुधार कर रहा है। इसका मकसद है कि वस्तुओं के वजन को अपडेट किया जाए, कंजम्पशन बास्केट को बदला जाए और इंडेक्स को और मजबूत बनाने के लिए तरीकों में सुधार किया जाए।

