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*लगातार बढ़ रहे  बीफ और गौ मांस निर्यात पर रोक लगाए सरकार* 

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 *गौमांस निर्यात रोकने के लिए बालाजी सेवा संस्थान ने शुरू किया अभियान, राष्ट्रपति के नाम दिया ज्ञापन*

इंदौर भारत में बीफ व गौमांस के निर्यात में लगातार हो रही बढ़ोतरी से पशु प्रेमियों में आक्रोश है । सरकार से लगातार मांग की जा रही है कि बीफ निर्यात को तत्काल रोका जाए अवैध कत्लखाने बंद किए जाएं । इस मांग को बल देने के लिए इंदौर में अभियान की शुरुआत हुई । बालाजी सेवा संस्थान और अन्य समाज सेवी  संगठनों के माध्यम से वरिष्ठ समाज सेवी रामबाबू अग्रवाल के नेतृत्व में यह अभियान शुरू हुआ है ।

अभियान के पहले चरण में बालाजी सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामबाबू अग्रवाल के नेतृत्व में एक  प्रतिनिधि मंडल ने संभाग  आयुक्त कार्यालय पहुंचकर संभागायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया । जापान में मांग की गई है बीफ निर्यात और गौमांस निर्यात पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा देश में चल रहे कत्लखानों को दी जा रही सुविधा बंद की जाए । प्रतिनिधि मंडल में रामबाबू अग्रवाल, रामस्वरूप मंत्री, अशोक व्यास, नंदकिशोर अग्रवाल,मुकेश चौधरी, मोहम्मद अली सिद्दीकी सहीत कई समाज सेवी और सामाजिक कार्यकर्ता शरीक थे ।

राष्ट्रपति के नाम दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार एक ओर बीफ के उत्पादन एवं व्यापार को नियन्त्रित करने के लिए एक नये केन्द्रीय कानून बनाने की बात कर रही है और दूसरी ओर बीफ मिश्रित तरह-तरह के खाद्य पदार्थों को बनाने और बेचने वाली केएफसी, मेकडोनाल्ड, सब वे एवं डोमिनो जैसी विदेशी कम्पनियों को धड़ल्ले से लाइसेन्स दे रही है। ये कम्पनियां हर रोज लाखों जानवरों का वध कराती हैं और अपने भारतीय ग्राहकों, जिनमें ज्यादातर हिन्दू होते हैं को लजीज बीफ व्यंजन परोस कर करोड़ों रुपए का मुनाफा कमाती हैं।वर्तमान सरकार ने अपने पहले बजट में नये बूचड़खाने बनाने एवं पुरानों के आधुनिकीकरण करने के लिए 15 करोड़ रुपए की सब्सिडी देने का प्रावधान किया। नजीजतन इस सरकार के मात्र एक साल के कार्यकाल 2014-15 के दौरान भारत ने बीफ निर्यात में ब्राजील को पीछे छोड़ दिया और वह नम्बर वन हो गया।

 दिल को दहला देने वाला एक तथ्य यह है कि आजादी के समय भारत में गोवंश गाय, बछड़े, बैल और सांड की जनसंख्या कुल मिलाकर 1 अरब 21 करोड़ के आसपास थी। तब भारत की जनसंख्या 35 करोड़ बतायी जाती थी। अब हालत उलट हो गए हैं।

पूरे देश में मांस के उत्पादन पर रोक नहीं है। यहां तक कि मांस के उत्पादकों को भारत के आयकर अधिनियम की धारा 80 आई.वी.जेड.इलेवन.ए के तहत आयकर में छूट प्राप्त है। मांस के परिवहन पर दी जाने वाली 23 प्रतिशत की छूट अगर पिछली सरकार ने समाप्त भी कर दी, तो भी मास उत्पादन और कत्लखाने की स्थापना में दी जाने वाली 13 प्रकार की छूट ज्यों की त्यों है। मांस के कारखाने में लगने वाले प्री.कूलिंग सिस्टम में 50 प्रतिशत, हीट ट्रीटमेंट प्लांट में 50 प्रतिशत, कोल्ड स्टोरेज में 100 प्रतिशत, पैकिंग में 30 प्रतिशत, इससे जुड़े साहित्य के प्रकाशन पर 40 प्रतिशत, कंसल्टेशन फीस में 50 प्रतिशत, कत्लखाने के आधुनिकीकरण पर 50 प्रतिशत, कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर 50 प्रतिशत छूट दिए जाने के प्रावधान हैं।

हिंदूत्व का दावा करनेवाली केन्द्र सरकार के राज में गाय और भैंस संकट में है। अतः हमारा आपसे आग्रह है कि जन-भावना का आदर करते हुए केन्द्र सरकार निर्यात पर प्रतिबंध लगाए। तथा गौवंश की रक्षा करे। विदेशी मुद्रा का मोह छोडने हुए तत्काल बीफ एवं गौमांस निर्यात पर रोक लगाए।

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