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*जो एफएआर का लाभ नहीं लेना चाहते उन्हें नगद मुआवजा दे सरकार*

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एमजी रोड चौड़ीकरण को लेकर दायर पच्चीस से अधिक याचिकाओं का कोर्ट ने किया निराकरण

इन्दौर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने शहरी विकास हेतु बनाएं गये विभिन्न प्लान एवं योजनाओं हेतु संबंधित शासकीय संस्थानों द्वारा अधिगृहीत की जाने वाली जमीन अथवा उन विकास कार्य में बाधक मकान दुकान अथवा अन्य अचल सम्पत्ति की तोड़फोड़ को लेकर मालिक अथवा संबंधित आधिपत्यधारी को मुआवजा हेतु एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।

इसके बाद अब इन्दौर सहित देशभर के विभिन्न बड़े शहरों में विकास कार्य हेतु चल रही तोड़फोड़ और अधिग्रहण कार्रवाई में मालिक को राहत मिलेगी वहीं संबंधित सरकारी विभाग या संस्थान को भी अपनी योजनाओं को क्रियान्वयन करना आसान हो जाएगा। हाईकोर्ट ने देवास के एमजी रोड चौड़ीकरण के प्रभावितों द्वारा दायर पच्चीस से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई उपरांत अपने निर्णय में कहा कि जमीन मालिक एफएआर का लाभ नहीं लेना चाहता है तो उसे आर्थिक मुआवजा दिया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए एडवोकेटद्वय केशव नाहर व मेहुल शुक्ला के अनुसार देवास नगर पालिक निगम ने देवास विकास योजना (मास्टर प्लान) 2031 के तहत एमजी रोड चौड़ीकरण के लिए याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किए थे। इसमें कहा था कि मास्टर प्लान के हिसाब से सड़क की चौड़ाई 15 मीटर की जानी है।

याचिकाकर्ताओं का निर्माण इस जद में आ रहा है, इसलिए वे इसे हटा लें अन्यथा निगम हटा देगा। नोटिस में यह भी है कि चौड़ीकरण और विकास कार्य होने के बाद क्षेत्र की संपत्तियों के बाजार मूल्य में वृद्धि होगी और इसका लाभ प्रश्नाधीन भवन स्वामियों को मिलेगा। नोटिस में क्षतिपूर्ति रूप में अतिरिक्त तल क्षेत्र अनुपात (एफएआर) देने की बात कही गई थी। एडवोकेट्स के अनुसार निगम ने नोटिस में आर्थिक मुआवजा दिए जाने की कोई बात नहीं की थी। नोटिस का विरोध करते हुए दो दर्जन से ज्यादा याचिकाएं हाई कोर्ट में प्रस्तुत हुई। जिस पर सुनवाई दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से हमने कोर्ट को बताया कि निगम ने न तो सेंट्रल लाइन डाली, न ही आपत्तियों पर सुनवाई की।

नोटिस में इस बात का उल्लेख भी नहीं था कि जो लोग एफएआर का लाभ नहीं लेना चाहते, उनके मामले में मुआवजे का क्या होगा। इसके बाद कोर्ट ने सभी याचिकाओं का निराकरण करते हुए देवास निगम को आदेश दिया कि जो याचिकाकर्ता एफएआर का लाभ नहीं लेना चाहते, उन्हें आर्थिक मुआवजे का भुगतान करे। हालांकि कोर्ट ने देवास नगर निगम को भी हल्की राहत देते हुए कहा है कि सीमांकन और अंतिम आदेश पारित करने व मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद निगम मूल्यांकन और आर्थिक क्षतिपूर्ति के भुगतान की प्रतीक्षा किए बिना तुरंत संपत्ति का कब्जा लेने को स्वतंत्र होगा ताकि सड़क चौड़ीकरण के सार्वजनिक कार्य में बाधा न आए।

देवास नगर निगम द्वारा निर्माण में मुआवजे को लेकर आए इस महत्वपूर्ण फैसले का असर इन्दौर सहित सभी शहरों में शहरी विकास से प्रभावित शहरवासियों पर पड़ेगा।

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