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सरकार ने 10 प्रॉपर्टी बेच कमाए 82 करोड़,42 विभागों ने 53 संपत्तियां बेचने के लिए सहमति दी

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भोपाल

प्रदेश में सरकारी विभागों की अनुपयोगी व खाली पड़ी संपत्ति को बेचकर राज्य सरकार ने एक साल में 82.40 करोड़ कमा लिए हैं। रिजर्व कीमत से 62% ज्यादा मूल्य देकर लोगों ने यह संपत्ति खरीदी है। 42 विभागों ने अपनी ऐसी अनुपयोगी 53 संपत्तियां बेचने के लिए सहमति दी है, जबकि 227 अन्य खाली संपत्तियों को अभी सरकारी उपयोग में लाने का विकल्प दिया।

सरकार ने अब तक ऐसी 10 संपत्तियां बेची हैं, जिनका रिजर्व मूल्य 51.60 करोड़ रखा था, पर इसके एवज में सरकार को 30 करोड़ ज्यादा मिले हैं। अभी 9 संपत्तियों के टेंडर जारी हो चुके हैं, जिनकी रिजर्व कीमत 58.9 करोड़ है। पिछले साल ही सरकार ने ऐसी संपत्तियों के प्रबंधन व अनुपयोगी संपत्ति को बेचने के लिए लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग का गठन किया था।

इनके टेंडर जारी… बस डिपो पन्ना 6.26 करोड़, बुकिंग ऑफिस एवं दुकानें सुवासरा मंदसौर 0.72 करोड़, सरस्वती नगर, जवाहर चौक भोपाल में 4 मकान, 4 दुकान 4.81 करोड़, पुराना जिला पंचायत भवन, मंदसौर 6.68 करोड़, कॉस्मो आनंद, सिरोल ग्वालियर 4.51 करोड़, गायत्री नगर कटनी में बिजली कंपनी की 6.715 हेक्टेयर जमीन आदि शामिल हैं।

इन्हें बेचने की प्रक्रिया शुरू… लेडीज डफरिन अस्पताल, सागर। राज्य परिवहन निगम की केंद्रीय प्रेस, बैरागढ़। तिलहन प्लांट, मुरैना। सोयाबीन प्लांट, बानापुरा और खरगौन। ग्वालियर, मुरैना, गुना, ब्यावरा, महिदपुर, आलीराजपुर बस डिपो।

मुंबई-दिल्ली की भी संपत्ति बिकेगी… सरकारी विभागों ने मुंबई और दिल्ली सहित अन्य स्थानों की भी अनुपयोगी संपत्ति को चिह्नित किया है। इसमें भोपाल में खाली हुआ वाणिज्यिक कर भवन, प्रिंसेस बिल्डिंग मुंबई सिटी, टैंक बंडर रोड मुंबई सिटी, नई दिल्ली की जमीन आदि।

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