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नए साल में दूसरी बार सरकार ने लिया एक हजार करोड़ का कर्ज

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भोपाल। आय में कमी और खर्च में हो रही बढ़ोत्तरी की वजह से सरकार के खाली खजाने की हालत बेहद गंभीर हो चुकी है। ऐसे में सरकार पूरी तरह से कर्ज के सहारे काम चला रही है। हालत यह हो चुकी है कि सरकार द्वारा हर माह कई बार कर्ज लिया जा रहा है। इस वित्त वर्ष में तो सरकार ने लगभग हर माह में ही कई बार में हजारों करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। इस माह में बीते सप्ताह ही कर्ज लेने के बाद अब फिर से सरकार एक हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले रही है।
इसके लिए सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक के नागपुर स्थित कार्यालय में आॅक्शन किया जा रहा है। जिसे दो दिन बाद 27 जनवरी को खोला जाएगा। दरअसल प्रदेश में सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन की वजह से इस तरह की स्थिति बनी है। आय कम और खर्च अधिक होने के बाद भी सरकार गैर जरुरी खर्च पर लगाम नहीं लगा पा रही है। यही वजह है कि 20 जनवरी को एक हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने के बाद अब फिर सरकार को एक हजार करोड़ का नया कर्ज लेना पड़ रहा है। यह नया कर्ज 16 साल के लिए लिया जा रहा है। इस नए कर्ज के साथ ही इस साल कुल सरकार द्वारा लिए गए कर्ज का आंकड़ा बढ़कर 20500 करोड़ रुपए हो जाएगा। इसमें अकेले चार हजार करोड़ का कर्ज तो सरकार ने बीते माह ही लिया है। इसमें बीते 16 और 23 दिसंबर को दो-दो हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। गैर जरूरी खर्च पर रोक नहीं लगने की वजह सें भी प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इसकी वजह से सरकार को खर्च चलाने के लिए बाजार से लगातार कर्ज लेने का ही विकल्प रह गया है। हाल ही में वित्त विभाग द्वारा विभागों पर खर्च की बंदिश को हटा दिए जाने से हालात और बिगड़ना तय हैं। आमतौर पर वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए वित्तीय वर्ष की समाप्ति के दो तीन माह पहले सरकार खर्च पर अंकुश लगा देती है , लेकिन इस बार प्रदेश में इसके उलटा कदम उठाया जा रहा है।

बीते तीन माह में लिया 10 हजार करोड़ का कर्ज
प्रदेश की शिव सरकार द्वारा बीते तीन माह से लगातार तीन हजार करोड़ से अधिक का कर्ज लिया जा रहा है। बीते माह इस राशि में एक हजार करोड़ की वृद्धि हो कर चार हजार करोड़ का नया कर्ज लिया गया था। अब इस माह इस दो हजार करोड़ का नया कर्ज सरकार पर होना तय हो गया है। इसे मिलाकर इस साल प्रदेश पर नया कुल कर्ज 20500 करोड़ रुपए हो जाएगा। प्रदेश में मार्च माह में भाजपा सरकार बनने के बाद उसी माह कुल 1500 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया गया था, इसे मिलाकर भाजपा सरकार के इस कार्यकाल में अब तक 22 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया जा चुका है।

दबाब में लेना पड़ रहा कम अवधि का कर्ज
बीते माह तक प्रदेश की शिव सरकार द्वारा 20 वर्ष की अवधि के लिए कर्ज लिया जा रहा था, लेकिन अब उसे 16 साल के लिए लेना पड़ रहा है। इसकी वजह है अब वित्तीय संस्थाओं का सरकार पर बढ़ता दबाव। यह संस्थाएं कम अवधि का कर्ज देने को ही तैयार हैं। यह कर्ज पूर्व में तय किए गए 6.76 फीसदी की ब्याज दर पर लिया जा रहा है। लॉकडाउन की अवधि में तो प्रदेश सरकार को महज ढाई वर्ष की अवधि के लिए ही कर्ज मिल पा रहा था।

कर्ज की वजह बताया जा रहा विकास कार्यों को
राज्य सरकार द्वारा इस बार लिए जा रहे कर्ज की वजह रिजर्व बैंक को पुराना ही विकास कार्य का कारण बताया है। इसमें कहा गया है कि इस कर्ज की आवश्यकता प्रदेश की अधूरी परियोजनाओं और विकास कार्यों के साथ ही लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करने के लिए पड़ रही है।

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