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प्रदेश के आठ नए जिलों में सरकार का छोटे उद्योगों पर रहेगा जोर

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भोपाल। मप्र की शिव सरकार ने आत्म निर्भर मप्र के तहत अब प्रदेश के आठ पिछड़े जिलों में छोटे उद्योगों को स्थापित करने के लिए फोकस करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार की मंशा इसके पीछे स्थानीय अर्थतंत्र को मजबूत कर लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की है। दरअसल कोरोना काल में प्रदेश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में शहरी और बड़े शहरों की तुलना में सूक्ष्म, लघु व मध्यम इकाइयों ने अच्छा काम किया है। यही वजह है कि अब राज्य सरकार ने एमएसएमई सेक्टर के तहत आने वाले सूक्ष्म, लघु, मध्यम, उद्यमों के लिए आठ जिलों में नए एमएसएमई इंडस्ट्रियल सेक्टर स्थापित करने की घोषणा की है। यहां नई इकाइयों को जमीन देने के साथ ही छोटे उद्योग स्थापित करने में मदद की जाएगी। इससे इन जिलों से होने वाले पलायन पर भी रोक लग सकेगी।
कोरोना काल में बड़ी संख्या में लौटे मजदूरों कों रोजगार देने में आयी समस्या को देखते हुए ही बीते कई माह से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार देने की योजना पर फोकस किया हुआ है। इसके तहत ही प्रदेश में एक जिला एक उत्पाद के अलावा आत्म निर्भर मध्यप्रदेश में कई इसी तरह के प्लान तैयार कराकर उन पर अमल शुरू कराया जा रहा है। यह प्लान पूरी तरह से लोगों के लिए रोजगारपरक होने के साथ ही प्रदेश में अर्थव्यवस्था की मजबूती को ध्यान में रखकर तैयार कराए गए हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में एमएसएमई सेक्टर में आठ नए औद्योगिक क्षेत्र बनाना तय किया गया है।
इन जिलों का किया गया है चयन
एमएसएमई के तहत जिन आठ नए जिलों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का फैसला किया गया है उनमें अनूपपुर जिले की तहसील के कदमटोला में 22.796 हेक्टेयर भूमि पर, शिवपुरी जिले के करैरा तहसील मुख्यालय में 5 हेक्टेयर, अलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आजाद नगर तहसील के सेजावाड़ा में 21.83 हेक्टेयर, उमरिया जिले के चंदिया तहसील के बड़वार में 4.85 हेक्टेयर, अशोकनगर जिला मुख्यालय के पलकाटोरी में 36.40 हेक्टेयर, उज्जैन जिले के आगर रोड उद्योगपुरी में 0.303 हेक्टेयर, खरगौन जिले के कसरावद तहसील के निमरानी में 121.86 हेक्टेयर और ग्वालियर के चिरवाई शामिल है। चिरवाई में 3.646 हेक्टेयर भूमि पर एमएसएमई इंडस्ट्रियल एरिया बनाया जाएगा।

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