पंकज भारती
महंगाई से परेशान जनता को राहत देने की कवायद सरकार कर रही है। विशेष कर खाद्य पदार्थों की महंगाई को नियंत्रित करने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। इसके चलते गत दिनों उपभोक्ता मामले को सचिव निधि खरे ने मप्र सहित देश के सभी चना उत्पादक राज्यों के किसानों से अधिक से अधिक मात्रा में चने की बुआई करने का आग्रह किया था। लेकिन मप्र में इंदौर संभाग के किसानों ने केन्द्र सरकार की यह बात मानने से इंकार कर दिया है।

कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों से इसका खुलासा हुआ है। मप्र में चने के सबसे बड़े उत्पादक क्षेत्र इंदौर संभाग में 9 दिसंबर तक की बुआई आंकड़ों के अनुसार, चने की बुआई पिछले साल के मुकाबले 13.02 फीसदी कम हुई है। किसानों ने पिछले साल कम कीमत मिलने के कारण इस बार चने के बजाय मक्का बोना उचित समझा। इस बार मक्का की बुआई गत वर्ष के मुकाबले 8.4 फीसदी अधिक हुई है। मटर की बुआई भी 14 फीसदी कम हुई है। वहीं मसूर की बुआई तीन फीसदी बढ़ी है। इंदौर संभाग में 9 दिसंबर तक चने की बुवाई 315570 हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है जबकि पिछले साल रकबा 363595 हेक्टेयर था। वहीं चने की बुवाई पिछले वर्ष की बुवाई के मुकाबले फिलहाल 13.2 फीसदी कम हुई है। मक्का का रकबा 80317 हेक्टेयर से बढ़कर 87028 हेक्टेयर पर पहुंच गया है। मक्का का बुवाई क्षेत्र 8.4 फीसदी बढ़ गया है। इंदौर संभाग में आठ जिले आते हैं, जिसमें इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर जिले शामिल हैं।
उपभोक्ता मामले की सचिव निधि खरे ने कहा था कि प्रमुख दाल उत्पा मध्यप्रदेश, -उत्तरप्रदेश में इस रबी सीजन में चना की कम बुआई चिंता की बात है। खरे ने कहा कि चना की उपलब्धता देश में महंगाई और मूल्य स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।
महंगाई रोकने चना उत्पादन बढ़ाने की कवायद कर रही केन्द्र सरकार
एमएसपी बढ़ाना भी नहीं आया काम
किसानों की चने के प्रति दिलचस्पी बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार ने साल 2025-26 के लिए चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 250 रुपए बढ़ाकर 5650 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। इसके बावजूद किसानों की रुचि चना बोने में कम दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि सरकार एमएसपी की घोषणा तो कर देती है लेकिन एमएसपी मिलता नहीं है।
केन्द्र सरकार के आह्वान को इंदौर संभाग के किसानों ने किया नजरअंदाज
विदेशों से मंगवाना पड़ा था चना
पिछले साल देश में चने का उत्पादन 10 फीसदी गिरावट के साथ 11.03 मिलियन टन हुआ था। दालों का उत्पादन 7 फीसदी घटकर 24.24 मिलियन टन रह गया। वहीं घरेलू आपूर्ति को पूरा करने के लिए इस बार सरकार को तंजानिया और ऑस्ट्रेलिया से चना और पीली मटर का आयात करना पड़ा है।
कृषि विभाग के आंकड़ों में इंदौर संभाग की स्थिति
इंदौर
इंदौर जिले में 8529 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चने की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल चने का रकबा 7255 हेक्टेयर का था। इस प्रकार इंदौर जिले में चने की बुवाई 17.5 फीसदी अधिक हुई है। यदि मक्का की बात की जाए तो इंदौर जिले में मक्का की बुवाई गत वर्ष के मुकाबले फिलहाल 28.5 फीसदी कम हुई है। पिछले साल 856 हेक्टेयर में मक्का बोया गया था जबकि इस साल 9 दिसंबर तक 615 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्के की बोवनी हो चुकी थी।
आलीराजपुर
अलीराजपुर में चने की बुवाई 5.5 फीसदी कम हुई है। 9 दिसंबर तक 18546 हेक्टेयर में चने की बोवनी हो चुकी थी जबकि पिछले साल 19605 हेक्टेयर में चना बोया गया था। अलीराजपुर में मक्का का रकबा 27 फीसदी बढ़ गया है, पिछले साल 17101 हेक्टेयर में मक्का बोया गया था जबकि इस बार 9 दिसंबर तक 21741 हेक्टेयर में मक्के की बुवाई हो चुकी है।
धार
धार जिले में चने की बोवनी 9 दिसंबर तक 16.5 फीसदी कम हुई है। पिछले साल 64480 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चना बोया गया था जबकि इस बार 9 दिसंबर तक 53950 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चने की बोवनी की जा चुकी है। धार जिले में मक्का की बोवनी पिछले साल के मुकाबले अब तक 16.28 फीसदी अधिक हुई है। पिछले साल 8350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का बौया गया था जबकि इस वर्ष 9 दिसंबर तक 9710 हेक्टेयर में मक्के की बोवनी हो चुकी है।
खरगोन–झाबुआ
झाबुआ जिले में चने का बुवाई रकबा 7 फीसदी घटा है। पिछले साल 19192 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चना बोया गया था जबकि इस बार 9 दिसंबर तक 17900 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चना बोया गया है। यहां मक्के की बुवाई में भी 5 फीसदी की गिरावट फिलहाल देखी जा रही है। 9 दिसंबर तक 5780 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्के की बुवाई हो चुकी थी, जबकि पिछले साल 5975 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का बोया गया था।
चने का सबसे ज्यादा उत्पादन और रकबा खरगोन जिले में है। खरगोन जिले में चने की बुवाई 5.5 फीसदी कम हुई है। गत वर्ष 132425 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चना बोया गया था जबकि इस साल 125210 हेक्टेयर में चने की बुवाई हो चुकी है। यहां किसानों का रुझान चने के बजाय मक्का में है। जिले में मक्के की बुवाई 8.2 फीसदी बढ़ गई है। पिछले साल 14057 हेक्टेयरके मुकाबले इस साल 15210 सेक्टर में मक्के की बुवाई हो चुकी है।
खंडवा–बड़वानी
बड़वानी जिले में चने की बुवाई सबसे अधिक पिछड़ी हुई है। यहां पर 9 दिसंबर तक चने की बुवाई 32 फीसदी कम हुई है। पिछले साल 24212 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चना बोया
13 फीसदी कम बोया चना… मक्का की बोआई भोग गाथा जब इस साल 19 क्रिफल में मुवाई हो चुका है।
गया था जबकि इस वर्ष 16585 हेक्टेयर में चने की बुवाई हो 23.5 फीसदी कम बोया गया है। पिछले साल के 19942 हेक्टेयर के मुकाबले इस साल 15275 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का बोया गया है।
हैम वर्ष 20750 हेक्टेयर चना बोया गया था जबकि इस साल 4800 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही चना बोया है। यहां मक्के की बुवाई तीन पीसदी बढ़ गई है। पिछले साल 12150 हेक्टेयर में मक्का बोया गया था जबकि इस साल 12500 हेक्टेयर में हो चुकी है।