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विवादित बयान देकर गुलाबचंद कटारिया अपने पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार रहे हैं

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एस पी मित्तल, अजमेर

राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। यह कहा जा सकता है कि भाजपा के प्रदेश नेताओं में कटारिया सबसे वरिष्ठ हैं, इसलिए संगठन ने उन्हें प्रतिपक्ष का नेता बना रखा है। विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री की सुविधाएं मिलती है। कटारिया की योग्यता में भी कोई कमी नहीं है, लेकिन कटारिया अपने विवादित बयानों से अक्सर स्वयं का नुकसान कर लेते हैं। इसलिए जब मुख्यमंत्री पद की बात आती है तो कटारिया का नाम पिछड़ जाता है। कटारिया ने सीता माता के अपहरण को लेकर रावण पर जो बयान दिया है उससे तो कटारिया ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी ही मार ली हे। एक सभा में कटारिया का कहना रहा कि सीता का अपहरण कर रावण ने कोई बड़ा पाप नहीं किया, क्योंकि अपहरण के बाद रावण ने सीता को छुआ तक नहीं। जो भाजपा अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनवा रही है, उस भाजपा का जिम्मेदार नेता सीता के अपहरण को रावण का बड़ा पाप नहीं मानता हो तो फिर कांग्रेस को हमला करने का अवसर मिलता ही है। 20 अप्रैल को दिल्ली प्रवास में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कटारिया को मेंटल डिस्टर्ब व्यक्ति बता दिया। गहलोत ने दिल्ली में जानबूझकर बयान दिया ताकि भाजपा हाईकमान कटारिया के खिलाफ कार्यवाही करे। कटारिया अब अपने बयान पर कितनी भी सफाई दें, लेकिन कटारिया ने कांग्रेस को भाजपा पर हमला करने का अवसर दे दिया है। यदि मामले ने तूल पकड़ा तो कटारिया का नेता प्रतिपक्ष का पद भी छीना जा सकता है। यह पहला अवसर नहीं है, जब  कटारिया  ने विवादित बयान दिया है। इससे पहले महाराणा प्रताप की वीरता को लेकर भी कटारिया ने गैर जिम्मेदाराना बयान दिया था, तब उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी। कटारिया अपने बयानों से भाजपा के सामने तो समस्या खड़ी करते ही है, साथ ही स्वयं के लिए परेशानी भी पैदा करते हैं। ऐसे विवादित बयानों से कटारिया की एक गंभीर राजनेता की इमेज नहीं बन पाती है। अन्य भाजपा नेताओं की तरह कटारिया भी चाहते हैं कि वे राजस्थान के मुख्यमंत्री बने, लेकिन सीता के अपहरण को रावण बड़ा पाप नहीं मानने की बात कह कर क्या कटारिया मुख्यमंत्री बन सकते हैं? यदि ऐसा बयान कांग्रेस के नेता दिया होता तो भाजपा वाले अब तक तूफान खड़ा कर देते। 

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