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डिंडौरी, आगर-मालवा में सड़कों पर बिछी ओले की चादर, सागर में भी गिरे ओले; भोपाल में बादल

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मध्यप्रदेश में पिछले एक सप्ताह से तेज बारिश-आंधी और ओलावृष्टि हो रही है। प्रदेश के लगभग हर जिले में बेर के आकार के ओले गिरे हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में जमकर ओलावृष्टि के साथ बारिश हुई।

मंदसौर, डिंडौरी, खरगोन, रायसेन, आगर-मालवा, शिवपुरी, ग्वालियर के घाटीगांव में तो कश्मीर जैसा नजारा दिखा। यहां ऐसी ओलावृष्टि हुई कि सड़कों पर सफेद चादर बिछ गई। लोगों ने बाल्टियों में भरकर ओले फेंके। इससे खेतों में खड़ी गेहूं, चना और सरसों फसलें बर्बाद हो गईं। पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा मंडला में 1.57 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है।

सोमवार को भोपाल में दिनभर से बादल छाए हैं। सागर के जरुआखेड़ा और बांदरी गांव में शाम को ओलावृष्टि हुई है।

सागर में सोमवार को शाम में ओलावृष्टि हुई।

24 घंटे में कहां-कितनी बारिश

मंडला1.57 (बारिश इंच में)
रीवा0.79
सीधी0.69
खजुराहो0.55
दमोह0.43
रायसेन0.37
खरगोन0.34
गुना0.31
शिवपुरी0.25
बैतूल ​​​​​​​0.24
भोपाल शहर0.16
उज्जैन0.15
भोपाल0.14
उमरिया ​​​​​​​0.11
सागर0.09
नरसिंहपुर0.07
सतना ​​​​​​​0.07
नर्मदापुरम , छिंदवाड़ा, धार​0.03
खंडवा0.02
सिवनी0.01

आज भी नहीं मिलेगी राहत

मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को भी ऐसा ही मौसम रहेगा। ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग में तेज बारिश-आंधी के साथ ओलावृष्टि हो सकती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन समेत कई शहरों में भी बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली चमकने-गिरने के साथ बारिश की संभावना है।

भोपाल में रविवार को दिनभर बादल छाए रहे। वहीं, देर शाम करीब 7:30 बजे तेज बारिश शुरू हो गई। करीब डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक लगातार बारिश होती रही। इससे पहले शनिवार को जमकर ओलावृष्टि हुई थी। पानी भी गिरा।

भोपाल में रविवार देर रात बारिश शुरू हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक तेज आंधी भी चली।

अब देखते हैं कि प्रदेश का हाल

डिंडौरी में रविवार दोपहर बाद जमकर ओलावृष्टि हुई। यहां बजाग करंजिया क्षेत्र में आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई। यहां गोरखपुर और गिरवरपुर गांव में सड़क, खेत पर सड़क पर ओलों की सफेद चादर बिछ गई। गोरखपुर गांव के किसान दीपक तेकाम का कहना है कि चने की फसल खेत में पकी हुई है। मजदूर लगाकर कटाई करने ही वाले थे। गेहूं की फसल भी पकने वाली है। ओले और बारिश से फसल बर्बाद हो गई।रविवार को प्रदेश के कई जिलों में ओलावृष्टि हुई। इससे सड़क पर ओलों की जैसे सफेद चादर बिछ गई हो।

भिंड के रौन ब्लॉक में रविवार दोपहर छाए बादल आफत बनकर बरसे। यहां तेज बारिश के साथ ओले गिरे। इससे किसानों की फसल चौपट हो गई। ये हालत रौन के मछंड कस्बे के इंदुर्खी समेत अन्य गांव के हैं। यहां खेतों में पकी फसल को बेमौसम बारिश ने चौपट कर दिया। जिन खेतों में किसानों ने फसल काटकर रखी थी। वह फसल बारिश के कारण पानी में डूब गई।

भिंड में ओले और बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया। यहां कटी हुई फसल बर्बाद हो गई।

श्योपुर जिले की बीरपुर तहसील में रविवार शाम बारिश के साथ बेर के आकार के ओले गिरे। इससे खेतों में खड़ी गेहूं और चने की फसल बर्बाद हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान श्यामपुर कस्बे के आसपास के खेतों में हुआ है। यहां दोपहर में 15 मिनट तक ओलावृष्टि से जमीन पर बर्फ की चादर बिछ गई। किसानों का कहना है कि अनाज के साथ मवेशियों को भूसे की भी किल्लत होगी। रविवार को बीरपुर, बड़ागांव, श्यारदा, पांचो, नितनवांस, दिमरछा, जाखेर, गोहर, घूघस, नदीगांव, श्यामपुर, जमूर्दी से लेकर दर्जनभर से ज्यादा ग्राम पंचायतों के 20 से ज्यादा गांवों के किसानों को नुकसान हुआ है।

श्योपुर जिले के दर्जनभर गांवों में इस तरह खेतों में ओलों की सफेद चादर बिछ गई।

रीवा में रविवार शाम तेज बारिश होने लगी। बेमौसम बारिश और ओले गिरने से खेतों में खड़ी गेहूं, चना, मसूर, सरसों व राई की फसल को नुकसान पहुंचा है।

ग्वालियर में केन्द्रीय मंत्री ने शनिवार दोपहर घाटीगांव, आरोन-पाटई के ओला प्रभावित गांवों में पहुंचे। यहां उन्होंने खेतों में पहुंचकर ओलावृष्टि से नष्ट हुई फसलों का मूल्यांकन किया है। नष्ट फसलें, बुजुर्ग किसानों की आंखें नम देख सिंधिया भी भावुक हो गए। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि अन्नदाता पर आए संकट की घड़ी में हम उनके साथ हैं। उन्होंने अफसरों को जल्द मूल्यांकन कर मदद के लिए कहा है।

ग्वालियर के घाटीगांव में हुई ओलावृष्टि का केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जायजा लिया।

आगर मालवा जिले में बारिश के साथ ओले गिरने से किसानों की चिंता फिर बढ़ गई है। दिन भर मौसम बदला-बदला सा रहा। आसमान में काले घने बादल छाए रहे। शाम को जिले में कहीं तेज तो कहीं रिमझिम बारिश हुई। आगर के ग्राम पालड़ा, पिपलोन, सुल्तान पुरा सहित कई जगह ओलावृष्टि हुई।

आगर-मालवा में खेतों में इस तरह ओलों की बारिश हुई।

विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र में रविवार को जमकर ओले गिरे। शाम को यहां झमाझम बारिश हुई। पथरिया व आसपास हल्के ओले गिरे, जबकि गुना रोड पर रतन बर्री, भगवंत पुर, मलिया खेड़ी, राय खेड़ी में करीब 15 मिनट तक बेर के आकार के ओलावृष्टि गिरे। मौसम के इस बदलाव से फसलों को नुकसान हुआ है।

विदिशा के सिरोंज क्षेत्र के कई इलाकों में इस तरह ओलावृष्टि हुई।

सिवनी जिला मुख्यालय समेत आसपास क्षेत्रों में जोरदार बारिश हुई। लखनादौन विधानसभा क्षेत्र में भी तेज बारिश के साथ ओले भी गिरे। वहीं, मौसम का मिजाज अभी भी बदला हुआ है। जिले के कई जगह कहीं कम तो कहीं ज्यादा बारिश हुई। इससे फसलों को काफी नुकसान हुआ है।

सिवनी के कई क्षेत्र में रविवार को ओले गिरे।

छतरपुर में बुंदेलखंड के केदारनाथ कहे जाने वाले श्री जटाशंकर धाम में रविवार दोपहर 4 से 5 बजे जोरदार बारिश हुई। इससे पहाड़ों का पानी सीढ़ियों और गोमुख के झरने से सावन के मौसम जैसे पानी बहने लगा। इससे मणि कुंड और मुनि कुंड उफान पर आ गए। घंटों तक सीढ़ियों पर भी पानी बहता रहा। शाम करीब 6 बजे से बिजावर और आसपास के क्षेत्र में भी बारिश हुई।

मार्च महीने में ही श्री जटाशंकर धाम में अगस्त जैसा नजारा दिखा।

मार्च में दो बार तेज बारिश, ओले और आंधी का सिस्टम

मार्च में दो बार ऐसी स्थिति बनी है। ऐसे में सरकार फसलों का सर्वे भी करा रही है। मार्च के पहले ही सप्ताह में 25 से ज्यादा जिलों में फसलें तबाह हो गई थी, तब भी सरकार ने सर्वे कराकर मुआवजा देने की बात कही थी। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो पिछले एक सप्ताह से बिगड़े सिस्टम की वजह से गेहूं, चने और सरसों की फसलों पर असर पड़ा है।

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