हनुमानगढ़ के विहिप नेता सतवीर सहारण पर जानलेवा हमला। नोहर, भादरा, रावतसर आदि में नेट बंदी।
भीलवाड़ा में आदर्श तापडिय़ा की चाकू गोदकर हत्या। कोविड सहायकों को किसान नेताओं का समर्थन। =============
एस पी मित्तल, अजमेर
मरुस्थलीय प्रदेश माने जाने वाले राजस्थान में इन दिनों तापमान 46 डिग्री के पार है, भीषण गर्मी की वजह से लोगों का बुरा हाल है। इस पर 8 घंटे तक बिजली कटौती और पेयजल की किल्लत ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। एक ओर जहां तापमान का सितम है, तो वहीं दूसरी ओर साम्प्रदायिक माहौल में भी गर्मी हो गई है। 12 मई को ही गंगानगर जिले में विश्व हिन्दू परिषद के जिला अध्यक्ष सतवीर सहारण पर जानलेवा हमला किया गया। अब सहारण का इलाज बीकानेर के सरकारी अस्पताल में हो रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सहारण ने महिलाओं के साथ छेड़छाड़ का विरोध किया था, इसलिए असामाजिक तत्वों ने सहारण पर जानलेवा हमला कर दिया। सहारण पर हुए हमले के बाद हिन्दूवादी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया। हालात को बिगड़ते देख गंगानगर के नोहर, भादरा, रावतसर आदि क्षेत्रों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही जगह जगह फ्लैग मार्च किया जा रहा है। कलेक्टर एसपी, आईजी, डीसी तमाम अधिकारी मौके पर पहुंच गए है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि हमलावरों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने गंगानगर, बीकानेर क्षेत्र में सभी लोगों से शांति की अपील की है। राठौड़ का कहना है कि अपराधी तत्वों की कोई जाति नहीं होती है। लेकिन राठौड़ ने मांग की है कि सहारण के हमलावरों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। 11 मई को ही भीलवाड़ा में आदर्श तापडिय़ा नाम के युवक को सरेआम चाकू से गोद कर मार डाला गया। दो युवकों ने तापडिय़ा को पकड़ा और एक युवक ने लगातार चाकू से शरीर के विभिन्न हिस्सों में हमला किया। इससे तापडिय़ा की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद भीलवाड़ा के हालात नाजुक हो गए हैं। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल लगातार खराब हो रहा है। इसकी शुरुआत 2 अप्रैल को हिन्दू वर्ष पर करौली से हुई थी। करौली के बाद भरतपुर और फिर ईद के दिन जोधपुर में सांप्रदायिक तनाव हुआ। इस बीच अलवर जिले के राजगढ़ में मंदिर तोड़ने की घटना भी हुई। सीएम अशोक गहलोत सांप्रदायिक तनाव के पीछे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जिम्मेदार मानते हैं। गहलोत का कहना है कि यह सब चुनाव जीतने के लिए किया जा रहा है। लेकिन मौजूदा सांप्रदायिक तनाव उस समय हो रहा है, जब उदयपुर में 13 मई से तीन दिवसीय चिंतन शिविर होने जा रहा है। इस शिविर में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर मंथन होगा। शिविर में भाग लेने के लिए कांग्रेस के सभी बड़े नेता आ रहे हैं। एक और उदयपुर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर हो रहा है तो दूसरी ओर सांप्रदायिक तनाव की वजह से प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति नाजुक बनी हुई है।
कोविड सहायकों को किसान नेताओं का समर्थन:प्रदेश के 28 हजार बर्खास्त कोविड सहायक पिछले 42 दिनों से जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना दे रहे हैं। 12 मई को प्रदेश के किसान नेताओं ने भी कोविड सहायकों को अपना समर्थन दिया। प्रमुख किसान नेता धरना स्थल शहीद स्मारक पर पहुंचे। किसान नेताओं ने कहा कि कोविड सहायक किसान और मजदूर परिवारों के बच्चे हैं। सरकार को चाहिए कि उनकी बहाली जल्द करे। यदि सरकार ने बहाली नहीं की तो आने वाले दिनों में प्रदेश भर के किसान भी धरना प्रदर्शन करेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोविड मैनेजमेंट का श्रेय लेते हैं, लेकिन वहीं दूसरी ओर 28 हजार कोविड सहायकों को बर्खास्त कर दिया गया है। जबकि कोरोना काल में सरकारी अस्पतालों में इन्हीं कोविड सहायकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों का इलाज किया। 12 मई को किसान नेताओं की उपस्थिति को देखते हुए कोविड सहायक भी बड़ी संख्या में शहीद स्मारक पर मौजूद रहे। कोविड सहायकों ने उदयपुर में कांग्रेस के चिंतन शिविर में भी प्रदर्शन करने की घोषणा कर रखी है।