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मौसम का कहर:मंदसौर में ओलावृष्टि से अफीम, गेहूं व चना सहित कई फसलों को भारी नुकसान,14 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट

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ओलावृष्टि और बारिश का कहर: नीमच में मक्का के आकार के ओले गिरे

नीमच जिले में रविवार दोपहर बाद अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी के साथ बारिश का दौर शुरू हुआ। मक्का के आकार के ओले और तेज आंधी के साथ बारिश ने किसानों के अरमानों और मेहनत पर पानी फेर दिया है। करीब आधे घंटे तक कई हिस्सों में बारिश ने सबसे ज्यादा अफीम और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया है। स्थिति यह रही कि अफीम के पौधे ओलों की मार से टूटकर नीचे गिर गए। वहीं गेहूं के पौधे भी आड़े हो गए। पालसोडा, जीरन, भंवरासा, झार्डा क्षेत्र में सर्वाधिक नुकसान हुआ है। बर्बादी का आलम देखकर किसान अब सरकार से मुआवजे की गुहार लगा रहा है। किसी क्षेत्र में 30 मिनट तक बारिश और ओलावृष्टि हुई तो किसी क्षेत्र में 10 मिनट तक। इतने कम समय में ही सबकुछ तबाह कर दिया।

सड़क ने लिया शिमला जैसा रूप
जिले के पालसोडा से भंवरासा फंटे को जोड़ने वाली सड़क पर शिमला जैसे हालात नजर आए। सड़क पर बर्फ की चादर बिछ गई। लोगों को शिमला जैसे नजारे दिखाई दिए।

अफीम की फसल चौपट
नीमच जिले में सर्वाधिक संख्या में अफीम की खेती होती है। रविवार शाम को हुई ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान अफीम की फसल को हुआ है, क्योंकि अफीम के पौधों में फूल आ रहे थे, पौधा की मौटाई भी थी। ऐसे में मक्का से भी ज्यादा आकार के ओलों की मार को सहन नहीं कर पाए और टूटकर नीचे गिर गए। इसके अलावा गेहूं की फसल भी नष्ट हुई है। गेहूं के पौधे जमीन पर लेट गए हैं।

इन क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि
नीमच जिले के पालसोडा, जीरन, हर्कियाखाल, भंवरासा, गोपालपुरा, सेमली मेवाड़ सहित कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ बारिश हुई है, ये हिस्से मंदसौर जिले की सीमा से भी जुड़े हुए हैं। बारिश और ओलावृष्टि मंदसौर जिले के कई हिस्सों में भी हुई है।

नीमच सूखा, हर्कियाखाल फंटे में ओलावृष्टि
ओलावृष्टि और बारिश का अलग ही नजारा नीमच जिले में रविवार को देखने को मिला। नीमच शहर में सूखा था तो वहीं मात्र 10 किलोमीटर दूरी पर जोरदार ओलावृष्टि हुई। नीमच शहर के लोगों ने जब वीडियो और फोटो देखे तो पता चला कि बिल्कुल पास में ओलावृष्टि और बारिश हुई है।

ओलावृष्टि से अफीम की फसल पड़ी आड़ी


ओलावृष्टि के बाद सड़क किनारे लगा ओलों का ढेर

मंदसौर जिले में रविवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। जिले के मल्हारगढ़ तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि देखने को मिली। मंदसौर जिले के अनेक क्षेत्रों में तेज बारिश हुई, जबकि मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम झारड़ा सहित आसपास के गांवों में ओलावृष्टि के दृश्य सामने आए। रविवार शाम करीब आधे घंटे तक तेज बारिश के साथ ओले गिरे, जिससे सड़कों और खेतों में बर्फ जैसी सफेद चादर बिछ गई। कई स्थानों पर लोग घरों के आंगन में फावड़े से ओले समेटते नजर आए। मंदसौर जिले की सीमा से लगे ग्राम पालसोडा और भंवरासा क्षेत्र में भी ओलावृष्टि हुई, जहां का नजारा मिनी कश्मीर जैसा दिखाई दिया। अचानक बदले मौसम से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश और ओलावृष्टि के कारण कई इलाकों में अफीम सहित गेहूं चना की फसल आड़ी हो गई, जिससे नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

14 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने नीमच, मंदसौर सहित 14 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटे तक प्रदेश के कई हिस्सों में बादल और कोहरे की स्थिति बने रहने की संभावना है।


ओलावृष्टि पर प्रशासन सक्रिय, सर्वे के निर्देश
मंदसौर जिले में विशेष रूप से मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के झारड़ा, काचरिया देव, किशनगढ़, मनासा खुर्द, हरमाला, अरनिया देव, पामाखेड़ा सहित अन्य गांवों में असमय बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान होने की सूचना मिली है। ओलावृष्टि की जानकारी मिलते ही मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग से दूरभाष पर चर्चा कर प्रभावित गांवों में तत्काल मौके पर पहुंचकर सर्वे करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों की टीम भेजकर फसल नुकसान का आकलन किया जाए।देवड़ा ने कहा कि मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के साथ हर परिस्थिति में खड़ी है। किसान चिंतित न हों, जहां भी ओलावृष्टि या असमय बारिश से नुकसान हुआ है, वहां सरकार राहत और सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

ओलावृष्टि से फसलें नष्ट, किसानों को तत्काल मुआवजा दे सरकार
मन्दसौर जिले के मल्हारगढ़ ब्लॉक के मनासा खुर्द, गोपालपुरा, झारड़ा, हरमाला सहित कई गांवों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। अफीम, गेहूं, सरसों, धनिया, अलसी, चिया सीड, मेथी, मसूर और चना जैसी प्रमुख फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर ने इसे अत्यंत दुखद और चिंताजनक बताते हुए कहा कि जब फसलें कटाई के लिए तैयार थीं, तब प्राकृतिक आपदा ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। विशेष रूप से अफीम फसल के नुकसान से क्षेत्र के किसानों की स्थिति और गंभीर हो गई है।
गुर्जर ने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए, जिसमें राजस्व, कृषि और नारकोटिक्स विभाग की संयुक्त टीम शामिल हो। उन्होंने किसानों को त्वरित और उचित मुआवजा देने, नुकसान के अनुसार प्रति एकड़ कम से कम 1.5 से 2 लाख रुपये सहायता देने, अफीम उत्पादकों को विशेष राहत, कर्ज पर ब्याज माफी और फसल बीमा दावों का शीघ्र निपटारा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी है और यदि सरकार ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई तो किसानों के साथ मिलकर आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। 

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