9 फरवरी 2026 को आगे की सुनवाई तक प्रगति रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश|
सरदार सरोवर विस्थापितों को पिछले 25 वर्षों से 83 पुनर्वसाहटों में मकान निर्माण के लिए आबंटित 83 भूखंडों के रजिस्ट्रेशन तथा भूखंड आबंटन में त्रुटीयों के मुद्दे पर 5 जनवरी 2026 के रोज न्या. विजय कुमार शुक्ला और न्या. आलोक अवस्थी के प्रभागीय पीठ के समक्ष सुनवाई हुई| मेधा पाटकर, सार्वजनिक हित में याचिकाकर्ता ने तथा अधिवक्ता कुशाल गोयल ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की ओर से 14.10.2025 के मा. न्यायाधीशों के आदेश पर हुए अमल तथा ताजा स्थिति पर प्रस्तुति की!
न.घा.वि.प्रा. ने स्थितिजन्य रिपोर्ट में बताया कि बड़वानी, धार, खरगोन एवं अलिराजपुर जिलाओं के लिए भूखंड रजिस्ट्रेशन, नामांतरण, राजस्व भूअभिलेख बदलाव आदि कार्यों के लिए समितियां गठित की गयी है तथा खरगोन जिले में तीन बार शिबिर आयोजित किया गया और भूखंड धारकों से रजिस्ट्रेशन के लिए 524 विस्थापितों से अर्जीयाँ स्वीकार की गयी| उर्वरित भूखंड धारकों की सूची प्रस्तुत की गयी|
प्रतिवादी न.घा.वि.प्रा. ने अपने रिपोर्ट मे यह भी बताया कि भोपाल में 2 बैठके होकर SOP – स्टँडर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर का मसौदा, रजिस्ट्रेशन की कार्यप्रक्रिया के लिए बनाया गया है तथा इस कार्य में विस्थापितों को रजिस्ट्रेशन शुल्क एवं स्टॅम्प फी माफ करनी है, जिसके लिए 600 करोड़ रु. का बजट आबंटित होकर, दोनो मुद्दों पर मंत्रिमंडल के समक्ष सहमति के लिए प्रलंबित है| रजिस्ट्रेशन मूल भूखंड धारक विस्थापित या मृत व्यक्तियों के वारिसों के पक्ष में होगा|
याचिकाकर्ता मेधा पाटकर ने जिला अधिकारीयों से, उच्च न्यायालय ने उसे विस्थापित और प्रतिवादी, बीच मध्यस्थता का अधिकार देने पर भी बैठके नहीं हो पाने की स्थिति बयां करने पर प्रतिवादी न.घा.वि.प्रा. की ओर से जिलाधिकारीयों के साथ बैठके और उनके सलाह- सूचन को आदेशों का पालन करने में, ध्यान में लेने का आश्वासन न्यायालय में प्रस्तुत किया|
प्रतिवादीयों ने रजिस्ट्रेशन के कार्य में जटिलता और व्यापकता होने के कारण से 6 महिनों के समय की मांग करने पर न्यायालय ने अपना आदेश पारित करते हुए कहा है कि दो महिनों में कार्य पूरा करने का आदेश 14.10.2025 को पारित किया था, जो समय बीत चुका है तो अब चार सप्ताह/1 महिने बाद 09.02.2026 को अगली सुनवाई के पहले प्रतिवादी कार्य अहवाल प्रस्तुत करे|
याचिकाकर्ता ने न्यायालय के रोज बडवानी जिले के 10 पुनर्वसाहटों में बनी भूखंडों की बिक्री, भूखंडों पर अतिक्रमण, रिक्त भूखंड तथा न.घा.वि.प्रा. (NVDA) की उर्वरित भूमी इ. पर आकडाकीय जानकारी प्रस्तुत की| विविध शासकीय कागजातो / अहवालों में आबंटित भूखंडों की संख्या में विरोधाभास भी तक्ता के रूप में दर्ज किया| भूखंडों के संबंध में गंभीर समस्याओं पर विस्थापितों की सुनवाई के साथ न्याय का आग्रह रखा|
सरदार सरोवर के बैकवॉटर लेवल्स पुनरीक्षित करना अवैध और अवैज्ञानिक बताते हुए 2023 में केंद्रीय जल आयोग ने 1984 में कानूनन सुनिश्चित किये पुराने बैकवॉटर लेव्हल्स तक जलस्तर बढकर, हजारों मकान, सामान, ध्वस्त होना, मवेशी और इन्सानों की मौत इ. याचिका में अधिकृत कागजातों के साथ पेश किया ही है| उन सभी, मूल बैकवॉटर लेवल्स मंजूर करते हुए, उर्वरित हजारो भूखंड तथा गृहनिर्माण के लिए 5.80 लाख रु. देने की मांग फिर से रखी| अन्य मुद्दे, जैसे टीनशेड में या शासकीय भवनों में 2019 या 2023 से पड़े रहे, बेघर और मजबूर किये परिवारों को पुनर्वास के उर्वरित लाभ देना, एक भूखंड दो परिवारों को देने से पैदा हुई समस्या का त्वरित निराकरण, मूलगांव से 5 कि.मी. की दूरी अंतर्गत ही पुनर्वसित करने के आदेश अनुसार उर्वरित न.घा.वि.प्रा. को भूमी पर भूखंड देकर बसाना, सुविधाओं के इ. मुद्दे भी, प्रस्तुत किये|
इन तमाम मुद्दों पर प्रतिवादियों से अगली सुनवाई के (09.02.2026 के) पहले जवाब देने का आदेश न्यायालय ने जारी किया और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे बढने पर अगली सुनवाई के रोज इन मुद्दों पर याचिकाकर्ता की अधिक सुनवाई करना मंजूर किया| प्रतिवादियों ने प्रस्तुत किये स्थितिजन्य रिपोर्ट पर प्रतिजवाब याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत करने तथा याचिकाकर्ता ने दर्ज किये अंतरिम अर्ज़ी और कागजात/ जानकारी पर प्रतिवादियों ने जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश भी खंडपीठ ने अपने आदेश में दिये हैं|
अगली सुनवाई 09 फरवरी 2026 को निश्चित की गई है!

