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न्यूनतम वेतन पर स्थगन उच्च न्यायालय ने किया खारिज  

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मजदूरों को 1 अप्रैल से एरियर सहित भुगतान किया जाए- 

इन्दौर/ 

तमाम जद्दो-जहद, धरने और प्रदर्शनों के बाद सरकार ने 10 वर्ष के बाद वेतन पुनरीक्षण समिति की सिफारिश के आधार पर मध्य प्रदेश शासन ने 1 अप्रैल 2024 से न्यूनतम वेतन की घोषणा की थी। जबकि यह पुनरीक्षण नवंबर 2014 मे होना था। इसके बावजूद कारखाना मालिकों के पेट में दर्द हुआ और उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में न्यूनतम वेतन बढ़ाये न जाने की याचिका पेश की, और हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर स्थगन आदेश जारी कर दिया।

फलस्वरूप एक माह बाद प्रदेश के लाखों मजदूरों का बढ़ा हुआ वेतन काम कर दिया गया। इस पर सीटू ने उच्च न्यायालय में इंटरवीनर (हस्तक्षेपकर्ता) बन हस्तक्षेप किया।किन्तु बीजेपी का बीएमएस संगठन मजदूर हितों के साथ कहीं भी नहीं रहा इसी श्रृखंला में सीटू के बाद इंटक,एटक, एच एम एस एंव संयुक्त अभियान समिति भी इन्टर विंग बने जिसका प्रतिफल यह हुआ कि माननीय हायकोर्ट इन्दौर के द्वय जजों ने मजदूरों को बड़ी राहत के लिए लगी रोक पर अहंम बात कहते हुए लगा स्टे हटा वेंकेन्ट कर दिया । आज की बहस में हायकोर्ट अधिवक्ता बाबुलाल जी नागर, श्वेता उपाध्याय,शशी चोरसिया ने माननीय कोर्ट को मजदूर पक्ष को मजबुती से रखा तो कोर्ट ने जारी स्थगन आदेश खारिज किया यह संयुक्त प्रयास स्थानीय युनियनों के श्याम सुन्दर यादव,रूद्र पाल यादव,कैलाश लिम्बोंदिया, सी एल सर्रावत, भागीरथ कछवाय,हरिओम सुर्यवंशी, कविता मालवीय ने संयुक्त रुप से बताया ,आज की हायकोर्ट कार्यवाही में सी एल सर्रावत, रूद्र पाल यादव शरीक रहे। रामविलास गोस्वामी और प्रदेश महासचिव प्रमोद प्रधान द्वारा ने कहा है की उक्त स्थगन के खिलाफ सीटू ने अदालती हस्तक्षेप के साथ साथ पूरे प्रदेश भर में सरकार पर दबाव पैदा करने के लिए लगातार प्रदेश के जिलाधीश और श्रम विभाग के ऑफिसों पर धरने दिए।  इंदौर हाई कोर्ट में सीटू के ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बाबूलाल नागर ने न्यूनतम वेतन के सवाल पर मजदूरों का पक्ष बखूबी रखा। फलस्वरूप आज हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के खंडपीठ ने उक्त स्थगन को खारिज कर दिया।  यह मजदूरों की एक ऐतिहासिक जीत है। 

सीटू नेता रामविलास गोस्वामी और प्रमोद प्रधान ने मध्य प्रदेश की सरकार और मध्य प्रदेश के श्रम आयुक्त से मांग करते हुए कहा कि यह स्थगन एक अप्रैल से हो रहे भुगतान के खिलाफ था जो खारिज हो गया है। अब 1 अप्रैल 2024 से श्रमिकों का एरियर सहित भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।  

सीटू ने प्रदेश के आम मजदूर और कर्मचारियों से एकता बनाए रखने की अपील की है।

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