जिस मिट्टी ने पिछले 15 सालों से सिर्फ अपनों का खून और बारूद का धुआं देखा हो वहां अचानक शांति की खबर किसी करिश्मे से कम नहीं लगती। साल 2011 में शुरू हुए उस खूनी गृह युद्ध ने सीरिया को एक ऐसे कब्रिस्तान में बदल दिया था, जिसकी चीखें पूरी दुनिया ने सुनीं। लेकिन जनवरी 2026 की इस सर्द सुबह ने एक ऐसी इबारत लिखी जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। कल तक जो अमेरिका समर्थित कुर्द लड़ाके (SDF) और सीरियाई सेना एक-दूसरे के सीने में गोलियां उतारने को उतारू थे, उन्होंने अचानक हाथ मिला लिए हैं। फरात नदी के किनारे हुई इस सीक्रेट डील ने न केवल बंदूकों को खामोश किया बल्कि रक्का और दीर अल-ज़ौर जैसे रणनीतिक इलाकों की चाबी भी सरकार को सौंप दी। सवाल यह है कि जिस देश में लाखों लाशें गिरने के बाद भी समझौता नहीं हुआ, वहां अचानक दुश्मन’ दोस्त कैसे बन गए? क्या यह सीरिया की अखंडता का नया उदय है या महज एक और खूनी तूफान से पहले की शांति?
सीरियाई सरकार और अमेरिका समर्थित SDF के बीच सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम का ऐतिहासिक समझौता हुआ है. इसके तहत SDF लड़ाके फरात नदी के पूर्व में पीछे हटेंगे और उन्हें सीरियाई सेना में एकीकृत किया जाएगा. रक्का, दीर अल-ज़ौर, तेल क्षेत्र और सीमा चौकियों का नियंत्रण अब पूर्णतः केंद्र सरकार के पास होगा. अमेरिकी दूत टॉम बराक ने इसे साझेदारी की दिशा में एक निर्णायक मोड़ और बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है.
अचानक दुश्मन दोस्त कैसे बन गए?
सीरिया में 15 साल से एक-दूसरे के खून के प्यासे ‘दुश्मन’ अचानक दोस्त इसलिए बन गए क्योंकि हालात और वक्त की जरूरत बदल चुकी थी. बशर अल-असद के पतन के बाद बनी नई अंतरिम सरकार को स्थिरता चाहिए थी, जबकि अमेरिका समर्थित कुर्द लड़ाकों (SDF) को तुर्की के हमले और ISIS के फिर से उभरने का डर सता रहा था. अमेरिकी मध्यस्थता ने आग में घी के बजाय पानी का काम किया. कुर्दों को अपनी सुरक्षा की गारंटी मिली और सरकार को रक्का व तेल क्षेत्रों का खजाना. इसी ‘गिव एंड टेक’ फॉर्मूले ने कल के दुश्मनों को आज का पार्टनर बना दिया.
14 सूत्रीय शांति समझौते की बड़ी बातें
· पूर्ण युद्धविराम: सीरिया के सभी युद्धक मोर्चों पर तत्काल प्रभाव से सैन्य गतिविधियां रोक दी गई हैं.
· सेना की वापसी: समझौते के तहत सभी SDF संबद्ध बल अब फरात नदी (Euphrates River) के पूर्वी किनारे पर वापस लौट जाएंगे.
· सरकारी नियंत्रण: सीरिया सरकार अब दीर अल-ज़ौर और रक्का प्रांतों का पूर्ण सैन्य और प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लेगी.
· ऊर्जा संसाधनों का हस्तांतरण: क्षेत्र के सभी तेल और गैस क्षेत्रों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकियों को भी राज्य को सौंप दिया जाएगा.
· SDF का विलय: सुरक्षा जांच के बाद SDF लड़ाकों को सीरिया के रक्षा और आंतरिक मंत्रालयों (सेना और पुलिस) में एकीकृत किया जाएगा.
· अमेरिकी मध्यस्थता: अमेरिकी दूत टॉम बराक ने दमिश्क में राष्ट्रपति शरा और इरबिल में मजलूम अब्दी से मिलकर इस डील को अंतिम रूप दिया.
· ISIS कैदियों की जिम्मेदारी: कुर्द जेलों और शिविरों में बंद इस्लामिक स्टेट के कैदियों और उनके परिवारों की कस्टडी अब सीरियाई सरकार संभालेगी.
· सुरक्षा गारंटी: यह समझौता क्षेत्र में सुरक्षा स्थिरता सुनिश्चित करने और मानवीय संकट को कम करने के उद्देश्य से किया गया है.
· सीरियाई एकता: राष्ट्रपति शरा ने कहा कि यह निर्णय देश में शांति बहाल करने और नागरिकों को राहत देने के लिए लिया गया है.
5 सवाल-जवाब
1. सीरिया सरकार और SDF के बीच युद्धविराम का मुख्य कारण क्या है?
हालिया दिनों में उत्तरी और पूर्वी सीरिया में बढ़ती सैन्य झड़पों को रोकने और देश की एकता बहाल करने के लिए यह फैसला लिया गया.
2. रक्का और दीर अल-ज़ौर प्रांतों का अब क्या होगा?
इन प्रांतों का पूरा प्रशासनिक और सैन्य नियंत्रण अब कुर्द बलों के बजाय सीरिया की केंद्र सरकार के पास होगा.
3. क्या SDF लड़ाके अब सीरियाई सेना का हिस्सा बनेंगे?
हां, समझौते के अनुसार आवश्यक सुरक्षा जांच के बाद उन्हें रक्षा और आंतरिक मंत्रालयों में शामिल किया जाएगा.
4. इस समझौते में अमेरिका की क्या भूमिका रही?
अमेरिकी दूत टॉम बराक ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई और इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया.
5. फरात नदी का इस समझौते में क्या महत्व है?
फरात नदी को एक विभाजन रेखा माना गया है, जिसके पूर्व की ओर SDF बलों को पीछे हटना होगा.

