इंदौर/ भोपाल
रविवार को लॉकडाउन के बीच देर शाम होलिका दहन का आयोजन किया गया। सुबह से सूनी सड़कों पर शाम को चहलकदमी दिखी। राजबाड़ा पर 250 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए होलिका दहन किया गया। महाकाल मंदिर प्रांगण उज्जैन में कंडों की होली जलाई गई। इसके बाद बाबा महाकाल दर पर रंग-गुलाल उड़ाया गया। इसके साथ ही इंदौर- उज्जैन में होली की शुरुआत हो गई।
खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटी ट्रस्ट मैनेजर राजेंद्र जोशी के मुताबिक परंपरानुसार राजबाड़ा के मुख्य द्वार पर करीब 250 साल से सरकारी होली का दहन हो रहा है। इस बार परंपरा का निर्वहन करते हुए प्रतीकात्मक रूप से मल्हारी मार्तंड मंदिर राजबाड़ा में पूजन कर होलिका दहन किया गया। इसमें सार्वजनिक प्रवेश निषेध रहा। इतने वर्षों में यह पहला मौका है जब मंदिर प्रांगण में दहन हुआ। वैसे हर साल मुख्य द्वार पर ही होलिका दहन होता था। उधर, महाकाल मंदिर में भी संझा आरती के बाद जमकर गुलाल उड़ा। महाकाल का गुलाल से श्रंगार टीका कर कोरोना मुक्ति के लिए प्रार्थना की गई।
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए रविवार को लाॅकडाउन रखा गया है, यह दूसरा रविवार था, जब लोगों ने घर पर ही रहकर दिन गुजारा। शनिवार रात 9 बजे से बाजार बंद होने के साथ ही लॉकडाउन शुरू हो गया था। पुलिस ने मोर्चा संभाला और रात में दुकानों को बंद करवाया। वहीं, सुबह से एक बार फिर से पुलिस एक्शन मोड पर आई और चौराहों पर तैनात हो गई। सुबह एक-दो चौराहों पर पुलिस ने जरूर सख्ती की, लेकिन ज्यादातर चौराहों पर खुद ही लोग ज्यादा नहीं गुजरे। जो निकले वे किसी ना किसी काम से जा रहे थे। पुलिस ने भी पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया। दूसरे रविवार को पुलिस को ज्यादा मशक्कत नहीं करना पड़ी।
देवास नाका चौराहे इस प्रकार से सूना रहा, जबकि यहां से हजारों की संख्या में रोज ट्रक गुरजते हैं।
सुबह से ही होली बनाने में जुटे लोग
क्राइसिस मैनेजमेंट के होली दहन के आयोजन पर पाबंदी लगाने के फैसले के विरोध के बाद सरकार के रुख को देख लोगों ने शनिवार को ही लकड़ी और कंडों की व्यवस्था कर ली थी। सुबह से वे सड़कों पर तो नहीं निकले, लेकिन अपने घरों के सामने कंडे जमाते जरूर नजर आए। जो व्यवस्था नहीं कर पाए थे, वे अलसुबह ही जुगाड़ में निकल गए। होली के लिए लकड़ी लेकर जाने वालों पर भी पुलिस ने ज्यादा सख्ती नहीं दिखाई। पूछताछ के बाद उन्हें बाहर नहीं निकलने की हिदायत देते हुए घर जाने को कहा। होली बनाने के बाद लोगों ने पूजन किया और कोराेना महामारी से जल्द मुक्ति के लिए प्रार्थना भी की।
होलिका दहन गोधूलि वेला में
ज्योतिर्विदों के अनुसार 27 की अलसुबह 3.27 बजे पूर्णिमा तिथि लगेगी, जो कि दूसरे दिन अर्थात् 28 मार्च की देर रात 12.17 बजे तक रहेगी। 27 की रात 3.27 बजे भद्रा लगेगी, जो 28 मार्च की दोपहर 1.51 बजे तक रहेगी। होलिका दहन शाम को गोधूलि वेला के समय शुरू होगा। इसका मुख्य मुहूर्त प्रदोष वेला में शाम 6.49 बजे से रात 9.13 बजे तक रहेगा, जिसमें होली का पूजन एवं दहन किया जाएगा।कोरोना का असर: होली की रंगत नहीं दिखी, फीके रहे बाजार हर साल के मुकाबले इस बार रंगों का बाजार फीका नजर आया। मालवा मिल, पाटनीपुरा, रानीपुरा, संजय सेतु, अन्नपूर्णा रोड, विजय नगर चौराहा, तिलक नगर, मल्हारंगज, छावनी में अस्थायी दुकानें हर साल के मुकाबले कम ही लगीं। रानीपुरा के थोक विक्रेता देवानंद बालचंदानी ने कहा कि इस बार बोरियों से रंग-गुलाल खरीदने वाले ग्राहक नदारद हैं। लोग बच्चों के लिए थोड़ी-बहुत पिचकारी खरीद रहे हैं। लॉकडाउन होने से रंग-गुलाल की बिक्री बेरंग रही।
