पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा हो चुकी है. दो चरणों में (6 और 11 नवंबर) मतदान संपन्न होंगे, जबकि 14 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे. इन सबके बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर एनडीए और इंडिया गठबंधन में कब सीट शेयरिंग फायनल होगा.
NDA में कहां फंसा है पेंच ? : वैसे तो दोनों ही गठबंधनों का कहना है कि 2 से 3 दिनों के अंदर सीट शेयरिंग हो जाएगी. ऐसे में एनडीए के सीट शेयरिंग को लेकर जो फॉर्मूला सामने आ रहा है वह हम आपको बताते हैं. मिल रही जानकारी के मुताबिक जनता दल यूनाइटेड ने 110 सीटों पर लड़ने की इच्छा जताई है. भाजपा किसी भी सूरत में बराबरी का समझौता चाहती है. जदयू बड़े भाई की भूमिका में रहना चाहती है तो भाजपा बराबरी का समझौता चाहती है.
अगर 110 -110 सीटों पर चुनाव लड़ती है तो वैसे स्थिति में सहयोगी दलों के लिए 23 सीटें बची रह जाएगी. 23 सीटों में तीन दलों के बीच बंटवारा संभव नहीं होगा. दूसरा फर्मूला यह है कि JDU 101, BJP 100, LJPR 26, HAM 8 और RLM 8 सीट पर चुनाव लड़े. इसके साथ ही कुछ कैंडिडेट को पार्टी अपना चुनाव चिह्न देगी.
चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास 28 या 29 सीटों से कम पर समझौता करने के मूड में नहीं है. इधर चिराग पासवान को 22 सीट के अलावा एक राज्यसभा और एक विधान परिषद सीट का ऑफर दिया जा रहा है. संभव है कि इस पर सहमति बन सकती है. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को चार के आसपास सीटें मिल सकती है. जीतन राम मांझी की पार्टी के खाते में 10 सीटें जाने के आसार हैं.
राज्य स्तर की पार्टी के लिए जद्दोजदह : ईटीवी भारत से खास बातचीत के दौरान हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के मंत्री डॉ संतोष सुमन ने कहा कि हमने अपनी अपेक्षा से एनडीए के नेताओं को अवगत करा दिया है. हमारे पास वर्तमान में चार विधायक हैं और पिछली बार हम सात सीटों पर लड़े थे. सिकंदरा सीट पर चिराग पासवान दावा कर रहे हैं क्योंकि जमुई से सांसद उनकी पार्टी से हैं. संतोष सुमन ने कहा कि हम किसी भी सूरत में सीटिंग सीट नहीं छोड़ेंगे.
”हमारी पार्टी को राज्य स्तर का दर्जा मिले इसके लिए हमें आठ विधायकों की जरूरत है. आठ विधायक हमारे तभी जीतेंगे जब हम इससे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेंगे.”– संतोष सुमन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, हम
संतोष सुमन ने आगे कहा कि हम सम्मानजनक सीटों पर समझौता नहीं करेंगे. जिनके पास विधायक नहीं हैं कम से कम उनसे अच्छी हैसियत हमारी है. हमारे पास उम्मीदवार भी हैं. अगर हमारी पार्टी के खाते में टिकट आती है तो हमारे लोग चुनाव जीतकर विधानसभा में जाएंगे. एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है. आने वाले एक-दो दिनों में बैठक होगी और बैठक में निर्णय ले लिया जाएगा. धर्मेंद्र प्रधान से हम लोगों ने अपनी इच्छा बता दी है और सीट के बारे में भी जानकारी दे दी है.
धर्मेंद्र प्रधान के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी : दरअसल, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में सीट शेयरिंग अंतिम दौर में है. भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने एनडीए के घटक दलों के नेताओं के साथ मुलाकात की है और उनकी अपेक्षाओं को लेकर फीडबैक लिया है. धर्मेंद्र प्रधान केंद्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट देंगे और एक-दो दिनों में सीट शेयरिंग पर बैठक के बाद फैसला ले लिया जाएगा.
धर्मेंद्र प्रधान और नीतीश कुमार की मुलाकात : कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्मेंद्र प्रधान के कंधों पर सीट शेयरिंग की जिम्मेदारी सौंपी है. केंद्रीय मंत्री और बिहार के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान बिहार दौरे पर आए थे. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की. उनके साथ भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद थे. धर्मेंद्र प्रधान ने नेताओं से सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत भी की.
15 से कम सीटों पर मानने को तैयार नहीं HAM : धर्मेंद्र प्रधान ने नीतीश कुमार से मुलाकात करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से मुलाकात की. मिल रही जानकारी के मुताबिक जीतन राम मांझी ने 15 सीटों पर अपनी मांग रखी है. तर्क यह दिया गया है कि 7-8 सीट जीतने के लिए कम से कम उसी अनुपात में हम पार्टी को चुनाव लड़ना होगा, ताकि हम पार्टी को राज्य स्तर की पार्टी का दर्जा मिल सके.
लोक जनशक्ति पार्टी जहां संसद के अनुपात में टिकट चाहती है वहीं हम पार्टी जीते हुए विधायकों के अनुपात में टिकट की चाह रखती है. उपेंद्र कुशवाहा के पास भले ही एक भी विधायक ना हो लेकिन उन्हें भी अन्य दलों के बराबरी में सीट चाहिए.

