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*TMC सांसद मौसम नूर कांग्रेस में शामिल; कितना बदलेगा सियासी समीकरण?*

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तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर कांग्रेस में शामिल हो गई हैं. 2026 विधानसभा चुनाव से पहले उनकी घर वापसी को कांग्रेस के लिए बड़ी खुशखबरी माना जा रहा है. इससे उत्तर बंगाल और मुस्लिम बहुल इलाकों में सियासी समीकरण बदलने की पूरी संभावना है.

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है. तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर ने आधिकारिक तौर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दामन थाम लिया है. लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए उनकी यह घर वापसी कांग्रेस के लिए बंगाल से आई बड़ी खुशखबरी मानी जा रही है.

2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मौसम नूर का कांग्रेस में शामिल होना सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में सियासी संतुलन बदलने वाला कदम माना जा रहा है. मालदा की प्रभावशाली खान चौधरी परिवार से आने वाली मौसम नूर की वापसी से कांग्रेस को संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ उत्तर बंगाल और मुस्लिम बहुल इलाकों में नया संबल मिला है.

क्या है पूरा मामला?

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर शनिवार को दिल्ली स्थित AICC मुख्यालय पहुंचीं, जहां कांग्रेस नेतृत्व की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार भी मौजूद रहे. कांग्रेस में शामिल होते ही मौसम नूर का जोरदार स्वागत किया गया और इसे पार्टी के लिए बंगाल ब्रेकथ्रू बताया गया.

मौसम नूर का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होना है. लेकिन इससे पहले कांग्रेस में उनकी एंट्री को चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. उनकी वापसी से कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि वह बंगाल में दोबारा सियासी जमीन मजबूत करने के मूड में है.

मौसम नूर की घर वापसी ने साफ कर दिया है कि बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में हलचल और तेज होगी. (फोटो X)

क्यों अहम है मौसम नूर की कांग्रेस वापसी?

मौसम नूर का नाम मालदा की राजनीति में दशकों से असरदार रहा है. वह दिवंगत दिग्गज नेता गनी खान चौधरी की भतीजी हैं, जिनका उत्तर बंगाल में गहरा प्रभाव रहा है. कांग्रेस में उनकी वापसी से पार्टी को पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक को फिर से साधने का मौका मिला है.

मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे इलाकों में कांग्रेस कभी मजबूत स्थिति में थी. समय के साथ टीएमसी और बीजेपी के उभार से कांग्रेस कमजोर पड़ी, लेकिन मौसम नूर की वापसी से इन क्षेत्रों में पार्टी को नई धार मिलने की उम्मीद है.

TMC को मालदा और आसपास के जिलों में झटका लग सकता है.

टीएमसी से दूरी की वजह क्या रही?

सूत्रों के मुताबिक मौसम नूर लंबे समय से टीएमसी में खुद को हाशिए पर महसूस कर रही थीं. 2019 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी जॉइन करने के बाद उन्हें जिला अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी उनसे छीन ली गई. पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी भूमिका सीमित होती चली गई और निर्णय प्रक्रिया से भी वह धीरे-धीरे बाहर होती गईं. यही असंतोष उनकी कांग्रेस वापसी की सबसे बड़ी वजह बना. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टीएमसी में उन्हें वह सम्मान और प्रभाव नहीं मिल पाया, जिसकी उन्हें उम्मीद थी.

कैसे हुई थी TMC में एंट्री?

मौसम नूर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी. (फाइल फोटो PTI)

बंगाल की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे 2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है.

आगे क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?

मौसम नूर की घर वापसी ने साफ कर दिया है कि बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में हलचल और तेज होगी. कांग्रेस के लिए यह संगठन, नेतृत्व और चुनावी गणित तीनों स्तरों पर बड़ी मजबूती है. जबकि टीएमसी को उत्तर बंगाल में अपनी रणनीति दोबारा तय करनी पड़ सकती है.

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