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बाथरूम व किचन की फिटिंग कैसी होगी, जैसे सवाल डेवलपर से पूछ रहा रेरा; ऐसी प्रक्रिया से प्रदेश के 548 प्रोजेक्ट अटके

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इंदौर

रेरा में औपचारिकताओं की लंबी प्रक्रिया में प्रदेश के 548 प्रोजेक्ट अटके हैं, इनमें करीब आधे इंदौर के हैं। सितंबर 2020 से ही प्रोजेक्ट को नंबर जारी होना बंद हैं, अब जाकर नंबर देने की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन केवल सात-आठ प्रोजेक्ट को नंबर जारी हुए हैं, इसकी बड़ी वजह यह है कि रेरा में अब इसके लिए लंबी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

अब तो रेरा ने मंजूरी देने से पहले प्रोजेक्ट डेवलपर की व्यक्तिगत सुनवाई भी शुरू कर दी है। इस इंटरव्यू में सफल होने के बाद ही नंबर देने के लिए फाइल आगे बढ़ती है। रेरा की लेटलतीफी पर मंत्री भी नाराजगी जता चुके हैं, लेकिन काम में तेजी नहीं आई। रेरा ने कई तरह के फार्मेट जारी किए हैं, जिसमें किस तरह ग्राहक से राशि ली जाएगी, प्रोजक्ट में किस तरह की वायरिंग होगी, बाथरूम व किचन फिटिंग में किस तरह की सामग्री उपयोग में लाएंगे, इसकी जानकारी डेवलपर से ली जा रही है, साथ ही भू-स्वामी को भी प्रमोटर माना जाएगा।

क्रेडाई सचिव संदीप श्रीवास्तव का कहना है रेरा को केवल प्रोजेक्ट की स्थिति, वित्तीय स्थिति देखना है, उन्हें सारी मंजूरी व अन्य जानकारी की स्क्रूटनी नहीं करना है। यह सब तो टीएंडसीपी से नक्शा पास होने, कलेक्टोरेट व निगम से मंजूरी लेने में किया जा चुका है। एेसा करने के चलते प्रोजेक्ट में देरी हो रही है। हम फिर भी यह सभी जानकारी देने को तैयार हैं, लेकिन हमारी मांग सालभर से केवल यही है कि कम से कम पहले अस्थायी नंबर तो जारी किए जाएं, इसके बाद जो उन्हें पूछना है, जानकारी लेना है, वह लेते जाएं।

क्रेडाई सचिव बोले- हम सभी जानकारी देने को तैयार, पर कम से कम पहले अस्थायी नंबर तो जारी किए जाएं।

इंटरव्यू में इस तरह से पूछे जा रहे हैं सवाल

केस-1

शहर में सुपर कॉरिडोर पर एक प्रोजेक्ट ला रहे बिल्डर से सवाल

प्र. आपके प्रोजेक्ट में आप किस तरह का माल उपयोग करेंगे?
उ. अच्छी क्वालिटी का, जो ग्राहक की मांग रहेगी, उसी हिसाब से।
प्र. डिटेल दें सरिया कितने एमएम का रहेगा, वायरिंग की क्वालिटी क्या होगी, बाथरूम, और किचन फिटिंग किस तरह की होगी?
उ. जी।
प्र. आपने भू-स्वामी का शपथ पत्र भी नहीं दिया, वह भी प्रमोटर रहेगा, उस पर भी वही शर्तें रहेंगी?
उ. भू स्वामी को पहले प्रमोटर नहीं मानते थे।
प्र. नहीं, ऐसा नहीं होगा, उन्हें भी प्रमोटर माना गया है।

केस-2

शहर के एक पुराने डेवलपर से इस तरह के सवाल किए गए

प्र. आप अपना प्रोजेक्ट कब तक पूरा करेंगे?
उ. इसकी जानकारी सर दी है, तीन साल का समय लगेगा।
प्र. ठीक है, आपने बैंक खाता अलग से नहीं खुलवाया है?
उ. खुलवा लिया है, जानकारी दी है।
प्र. नहीं, आपने इसमें फर्म के नाम पर खाता खुला है, प्रोजेक्ट का नाम पर नहीं?
उ. सर फर्म के नाम पर ही खाता खुलता है, बैंक प्रोजेक्ट के नाम पर नहीं खोलते हैं।
प्र. आप बैंक से बात कीजिए, शपथ पत्र दीजिए, यह स्पेसिफिक खाता तो लगेगा।

रेशो डील में भू-स्वामी को भी अब प्रमोटर मानने से बढ़ी मुश्किलें
इसके पहले एंटनी डिसा के चेयरमैन रहते समय भू-स्वामी को प्रमोटर नहीं माना गया था, केवल डेवलपर पर ही अलग खाता रखने, उसमें राशि जमा रखने और डेवलपमेंट की जिम्मेदारी होती थी, लेकिन अब नए प्रावधान से जब तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं होता, भू-स्वामी की जमीन की कीमतों के भुगतान में देरी होगी। उसे अपने हिस्से के प्लाट बेचने में भी समय लगेगा।

ग्राहक से राशि लेने के भी नए नियम डेवलपमेंट काम के आधार पर भुगतान
रेरा ने ग्राहकों से राशि लेने के भी नए फार्मेट जारी कर दिए हैं। इसमें प्लॉट बुकिंग के समय दस फीसदी राशि और बाद में डेवलपमेंट काम के आधार पर राशि लेने का पूरा चरणबद्ध फार्मेट जारी किया है। वहीं डेवलपर का कहना है कि किसी प्रोजेक्ट में जमीन की कीमत सबसे ज्यादा होती है, यदि प्लॉट बुकिंग के समय केवल दस फीसदी राशि लेंगे तो ऐसे तो प्रोजेक्ट की लागत के अनुसार राशि ही नहीं मिल सकेगी।

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