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शरीर की आखिरी सांस तक मैं राजस्थानियों के साथ हूँ- अशोक गहलोत

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एस पी मित्तल,अजमेर

1 अक्टूबर को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बीकानेर संभाग के दौरे पर रहे। गहलोत ने ग्रामीण ओलंपिक खेलों के विभिन्न समारोह में भाग लिया। गहलोत ने राजस्थान कांग्रेस में उत्पन्न सियासी संकट के बीच 30 सितंबर की रात को ही दिल्ली से जयपुर लोटे थे। दिल्ली में गहलोत ने कहा था कि मेरे मुख्यमंत्री पद पर रहने के बारे में अब कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी फैसला करेंगी। लेकिन 1 अक्टूबर को बीकानेर में कहा कि मेरे शरीर की अंतिम सांस तक राजस्थानियों के साथ रहंूगा। इस बात पर अफसोस जताया कि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए राजस्थान में कांग्रेस की सरकार रिपीट नहीं हुई। गहलोत ने कहा कि 2003 में राज्य कर्मचारियों की हुई हड़ताल को लेकर सरकार का संवाद सही तरीके से नहीं हो पाया, इसलिए 2003 में मेरे मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस की हार हुई। इसके बाद वर्ष 2013 में नरेंद्र मोदी की हवा चली तो फिर कांग्रेस की हार हो गई। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए हमेशा जनता की भलाई के काम किए हैं। अभी भी चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना, शहरी रोजगार गारंटी योजना, सरकारी अस्पतालों में निशुल्क जांच और दवा योजना, इंदिरा रसोई योजना, पेंशन योजना ऐसे कार्य है जिनका फायदा आम जनता को सीधा मिल रहा है। मैं जब जब भी मुख्यमंत्री रहा तब तब विकास के कार्य करवाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। गहलोत ने स्वयं के मुख्यमंत्री नहीं रहने पर तो कोई टिप्पणी नहीं की, पर उनकी बात से प्रतीत हुआ कि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस की जीत न होना बहुत मायने रखता है। गहलोत ने इस बात को स्वीकार किया कि उनके हर शब्द का कुछ न कुछ मायने होता है। यानी गहलोत के मुख्यमंत्री पद पर रहने के फैसले के समय सोनिया गांधी के समक्ष यह मुद्दा भी रहेगा कि गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस की जीत नहीं हुई है। गहलोत ने विनम्र भाव से कहा कि प्रदेश की जनता को मुझे एक मौका और देना चाहिए। गहलोत ने युवाओं से अपील की कि राजस्थान की बेहतरी के लिए सुझाव दें, उन्होंने माना कि युवाओं के सुझाव बहुत अच्छे होते हैं।

मोदी और मैं:

सीएम गहलोत ने कहा कि पीएम मोदी मेरी तरह विनम्र (हम्बल) दिखना चाहते हैं, इसलिए 30 सितंबर की रात को आबू रोड में जनता के समक्ष दंडवत हुए। गहलोत ने कहा कि मेरे खिलाफ मोदी के पास कहने को कुछ भी नहीं है, इसलिए उन्होंने दंडवत कर अपनी यात्रा को पूरा किया। गहलोत ने कहा कि मोदी भले ही मेरी तरह दिखे लेकिन उन्हें देशवासियों से हिंसा न करने की अपील करनी चाहिए। मैं लंबे समय से मांग कर रहा हंू कि पीएम मोदी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करें। लेकिन मोदी शांति की अपील नहीं कर रहे हैं। मैं इस बात को स्वीकार करता हंू कि यदि मोदी अपील करेंगे तो देश में सद्भावना का माहौल बना रहेगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि 30 सितंबर को पीएम मोदी ने राजस्थान, गुजरात की सीमा पर बने अम्बा माता मंदिर के दर्शन किए थे। तभी कुछ देर के लिए राजस्थान के आबू रोड में भी रुके। चूंकि आबू रोड पहुंचते पहुंचते मोदी को रात 10 बजे गए, इसलिए उन्होंने सार्वजनिक सभा में भाषण नहीं दिया। मोदी का कहना रहा कि रात 10 बजे बाद माइक पर प्रतिबंध लगा हुआ है, इसलिए वे माइक पर भाषण नहीं देंगे। अलबत्ता मोदी ने शानदार स्वागत के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं का आभार जताया। साथ ही आबू रोड के लोगों को भरोसा दिलाया कि भविष्य में वे एक दिन आबू रोड जरूर आएंगे। 

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