भोपाल। जिन अफसरों पर सुशासन के साथ ही कानून का राज स्थापित करने की जिम्मेदारी होती है, वे ही अगर कानून को ठेंगा दिखाएं तो फिर भगवान ही मालिक है। ऐसा ही कुछ प्रदेश में आईएएस ललित दाहिमा का मामला है। दरअसल जब वे इंदौर कृषि मंडी में बतौर सचिव पदस्थ थे, तब 19 साल पहले वहां पर 8 करोड़ रुपए का टैक्स घोटाला हुआ था। इस मामले में जिला न्यायालय ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया हुआ है। जब उन्हें गिरफ्तार करने इंदौर से राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू ) की टीम आई तो वे फरार हो गए। लिहाजा टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा।
यह टीम जब उनकी गिरफ्तारी के लिए मंत्रालय स्थित उनके दफ्तर पहुंची तो बताया गया कि वे अवकाश पर हैं। इसके बाद टीम उनके आवास पर गई तो वहां ताला लटका मिला। इस बीच उनके द्वारा लगाई गई अग्रिम जमानत याचिका भी हाईकोर्ट द्वारा निरस्त करते हुए उनसे उसी अदालत में जमानत के लिए आवेदन लगाने को कहा है जिस अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि संबंधित अदालत ने वारंट उसी की आवेदन पर सुनवाई कर निर्णय लेगी। वर्तमान में सामान्य प्रशासन विभाग में उपसचिव दाहिमा का जिला कोर्ट इंदौर ने गत 9 फरवरी को गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। दाहिमा को गिरफ्तार करने ईओडब्ल्यू इंदौर की टीम भोपाल आयी थी।
यह है मामला
गौरतलब है कि दाहिमा पर 19 साल पहले इंदौर में मंडी सचिव रहते हुए फर्जी पदों पर खोली गई व्यापारिक फर्मों से सांठगांठ कर 8 करोड़ रुपए का टैक्स घोटाले का आरोप है। ईओडब्ल्यू ने 7 साल तक की गई जांच के बाद दाहिमा और मंडी कर्मियों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया था। इनमें 28 दिसंबर 2011 को मंडी करनी ओमप्रकाश कानूनगो सहित 23 फर्मों के मालिकों के खिलाफ मुख्य चालान पेश किया जा चुका है। इस मामले में 23 व्यापारी 5 मंडी कर्मचारी सहित 28 आरोपी बनाए गए थे। दिसंबर 2013 में तत्कालीन मंडी प्रांगण प्रभारी सतीश परिता व दैनिक वेतन भोगी संतोष पटेल के खिलाफ भी धोखाधड़ी में चालान पेश किया गया था , लेकिन दाहिमा के खिलाफ चालान पेश न कर उन्हें बचाने के प्रयास चलते रहे, जबकि ईओडब्ल्यू की जांच में 5 बिंदुओं में दाहिमा को ही दोषी बताया गया था। विधि विभाग से अभियोजन स्वीकृति के बाद भी दाहिमा के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने 3 साल बाद विशेष न्यायालय में पूरक चालान पेश किया था। इसके बाद दाहिमा ने इस मामले में हाई कोर्ट इंदौर में याचिका दायर की थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने दाहिमा को प्रकरण से डिस्चार्ज कर दिया था। जिसके बाद विधि विभाग ने विशेष न्यायालय में आवेदन दिया था, जिसे न्यायालय द्वारा मंजूर कर दाहिमा के खिलाफ प्रकरण खोला है।
आईएएस दाहिमा गिरफ्तारी से बचने के लिए हुए फरार

