UPSC CSE 2024 के IAS कैंडिडेट्स को कैडर अलॉट किए गए हैं। 20 कैंडिडेट्स को उत्तर प्रदेश कैडर मिला है। 4 को मध्यप्रदेश कैडर मिला है। इसके अलावा भी अन्य कैडर मिले हैं।
IAS कैडर लिस्ट
कैसे मिलता है होम कैडर?
उदाहरण के लिए अगर किसी स्टेट से 20 युवा आईएएस बन गए और उस स्टेट में संयोगवश कोई वैकेंसी नहीं है, तो किसी को होम कैडर नहीं मिलेगा. उन्हें दूसरे उन राज्यों में भेजा जाएगा, जहां वैकेंसी है. आयोग ऐसा भी नहीं करता कि एक ही राज्य के सभी सफल अभ्यर्थियों को वैकेंसी होने पर उनका होम कैडर अलॉट कर दे.
यह सेवा आल इंडिया के लिए है. ऐसे में कोशिश होती है कि एक स्टेट में दूसरे स्टेट के अधिकारी जाएं. इस कैडर के लिए जरूरी हो जाता है कि वे देश को देखें, समझें, जानें, क्योंकि जब भारत सरकार में तैनाती होती है. तब वही अनुभव बहुत काम का होता है. होम स्टेट में पढ़ाई, वहीं नौकरी तो देश के दूसरे हिस्से को समझने का मौका नहीं मिल सकेगा.
क्या है कैडर अलाॅटमेंट की प्रक्रिया?
भारत सरकार के मुताबिक आयोग होम स्टेट में दो : एक का अनुपात देखकर कैडर आवंटित करता है. मतलब सामान्य दशा में अगर किसी स्टेट में दो अफसर दूसरे स्टेट के तैनात किए गए हैं तो एक उसी स्टेट का हो सकता है. आयोग अभ्यर्थी से उसकी चॉइस भी पूछता है. अगर रैंक अच्छी है, तो चॉइस के मुताबिक होम कैडर मिल जाता है, लेकिन हर बार ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है. यह वैकेंसी पर तय होगा. मसलन टॉपर के राज्य में वैकेंसी न हो तो उसकी पोस्टिंग वहां चाहने के बावजूद नहीं हो सकती.
कैडर में क्या है मेरिट का रोल?
कुल मिलाकर यह होम कैडर का मामला उस राज्य की वैकेंसी और कैंडिडेट्स को मिले अंकों यानी मेरिट के आधार पर मिलता है. इसमें किसी का कोई वश नहीं है. वैकेंसी की कवायद विपरीत दिशा से शुरू होती है. राज्य अपनी जरूरत भारत सरकार को और केंद्र उसी अनुरूप अफसरों की जरूरत संघ लोक सेवा आयोग को भेजता है.
तभी वैकेंसी निकलती है. ऐसे में होम कैडर आवंटन पर मोटे तौर पर किसी का वश नहीं है. हां, बाद में अगर कोई युवा या युवती अपने ही कैडर में शादी करते हैं तो उन्हें कैडर बदलने की सुविधा मिलती है. विशेष परिस्थिति में अधिकारी अपने होम स्टेट में प्रतिनियुक्ति पर जरूर तैनात किए जाते रहे हैं. उसमें दोनों स्टेट गवर्नमेंट की सहमति जरूरी होती है.

