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पिता को मिलता है भारत रत्न, तो आने वाली पीढ़ी को मिलेगी प्रेरणा-अशोक ध्यानचंद

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भारत में हॉकी के 100 साल पूरे होने पर मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद ने न्यूज 18 से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि हॉकी में रोमांच लौटाना होगा. वहीं पिता को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना चाहिए. इससे आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी.

भोपाल. भारत की हॉकी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले मेजर ध्यानचंद (Major Dhyan Chand) का नाम आज भी ‘हॉकी के जादूगर’ के तौर पर लिया जाता है. भारत की हॉकी को 100 साल पूरे होने पर उनके बेटे अशोक ध्यानचंद (Ashok Dhyan Chand) ने न्यूज 18 से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद ने अपने खेल से देश को वो पहचान दी, जो किसी ने नहीं दी. भारत रत्न का सम्मान अगर उन्हें मिलता है, तो आने वाली पीढ़ी को बड़ी प्रेरणा मिलेगी. मेजर ध्यानचंद ने अपने जीवन में जो समर्पण दिखाया, वह हर खिलाड़ी के लिए मिसाल है.

अशोक ध्यानचंद ने कहा, ‘मेरे पिताजी कहते थे कि मैं कुछ नहीं लूंगा. यह देश के लोगों का काम है कि वो तय करें कि मेरा कार्य कैसा रहा. अगर योग्य हूं, तो सम्मान दें. पिता को भारत रत्न मिलेगा, तो आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा जरूर मिलेगी.’ उन्होंने कहा कि 1983 में क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने के बाद लोगों का रुझान हॉकी से हटकर क्रिकेट की ओर चला गया. सरकारों ने हॉकी को बंद नहीं किया लेकिन हॉकी ग्राउंड्स और सुविधाओं की कमी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. आज देश में हॉकी ग्राउंड्स का अभाव है. अगर सुविधाएं बढ़ेंगी, तो बच्चे फिर से हॉकी की ओर लौटेंगे.

महिला क्रिकेट टीम को दी बधाई
उन्होंने महिला क्रिकेट टीम को वर्ल्ड कप जीतने पर बधाई दी और कहा कि क्रिकेट और हॉकी की तुलना नहीं की जा सकती. सरकार की नई स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी योजना को उन्होंने सराहा. कहा कि यह खिलाड़ियों को सुरक्षा और सम्मान दोनों देगी. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि यह सिर्फ पिता के सम्मान की नहीं बल्कि उस खेल के पुनर्जागरण की पुकार है, जिसने कभी भारत को दुनिया के खेल नक्शे पर सबसे ऊपर खड़ा किया था. इस दौरान अशोक ध्यानचंद ने एक गीत भी गुनगुनाया.

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