क्या आप जानते हैं कि दुनिया के बड़े बड़े तानाशाह अंतत: क्यों हार जाते हैं? क्योंकि तानाशाही काल्पनिक डर का व्यापार है और इंसानियत एक दिन उस काल्पनिक डर से डरना छोड़ देती है.
एक 22 साल की बच्ची सीना तानकर अदालत में खड़ी है. वह जेल में रहने को तैयार है. वह देश के लाखों किसानों के साथ जो महीनों से सड़क पर हैं. उसे दुनिया की कथित सबसे बड़ी पार्टी और देश की कथित सबसे मजबूत सरकार से डर नहीं लग रहा है. सरकारों को इस बात से डरना चाहिए.
तमाम संसाधनों, ताकतों, पुलिस, सेना, हथियार, धूर्तता, हिंसा, क्रूरता के बावजूद एक दिन जनता डरना छोड़ देती है चाहे प्रदर्शन कर रहे किसान हों, चाहें उनके समर्थन में खड़े दिशा जैसे युवा, जो विरोध कर रहा है, वह फंसाए जाने, लाठी मारने, गोली चला देने, जेल में डाल देने से नहीं डर रहा है
तानाशाह ये भूल जाते हैैं कि ईएमआई भर रहा नौकरिहा बूढ़ा पत्रकार खरीदा जा सकता है, सात पुश्तों के लिए धन संचय का सपना देख रहा बूढ़ा अधिकारी खरीदा जा सकता है, पद के लिए लालायित उच्च पदस्थ माननीय और महामहिम खरीदे जा सकते हैं, लेकिन जुनूनी युवा खरीदे नहीं जा सकते.जिस दिन दिशा जैसे करोड़ों युवा उठ खड़े होते हैं तो जेलें कम पड़ जाती हैं. वे खड़े इसलिए होते हैं कि जब तक इंसानियत जिंदा रहेगी, कुछ इंसानों का जमीर तार्किक, न्यायप्रिय और कमजोर के पक्ष में बने रहने के लिए बेचैन रहेगा.
सबसे खास बात ये है कि अब तक दुनिया में ऐसा कोई तानाशाह पैदा नहीं हुआ जो अपनी पूरी रियाया को जेल में भर दे, हरा दे या उन्हें हमेशा के लिए जीत ले.
जैसा कि जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा है कि दिशा रवि ने अब तक कुछ भी अनुचित नहीं किया है. हम दिशा रवि और अपने देश के करोड़ों किसानों के साथ हैं.
यदि किसानों के प्रदर्शन को वैश्विक स्तर पर उठाना राजद्रोह है, तो मैं जेल में ही ठीक हूं.”- दिशा रवि (अदालत में)

