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*संकट आया तो इंदौर के 500 पूर्व सैनिक फिर पहनेंगे वर्दी*

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भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ते तनावपूर्ण हालात के बीच इंदौर से एक राष्ट्रभक्तिपूर्ण संदेश सामने आया है। इंदौर में बीएसएफ और अन्य अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्त 500 से अधिक जवानों और अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि यदि राष्ट्र को उनकी आवश्यकता पड़ती है, तो वे पुनः देश सेवा के लिए तत्पर और उपलब्ध रहेंगे। यह भावनात्मक पत्र आज इंदौर के सांसद शंकर लालवानी को सौंपा गया है, जिन्होंने इसे प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ली है।

सांसद ने जताया गर्व, कहा देश सच्चे सिपाहियों का ऋणी
सांसद शंकर लालवानी को सौंपे गए इस पत्र में पूर्व सैनिकों ने उल्लेख किया है कि उन्होंने अपने सेवा काल में युद्ध और संकट की घड़ी में राष्ट्र की सेवा की है और आज भी उनमें वही उत्साह, जोश और संकल्प कायम है। इस मौके पर सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि बीएसएफ सहित अन्य अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारी और जवान मुझसे मिलकर यह पत्र देने आए, जो कि गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह देखकर प्रसन्नता होती है कि देश के सच्चे सिपाही सेवा से निवृत्त होने के बाद भी भारत माता के लिए सदैव समर्पित रहते हैं। भारत ऐसे सैनिकों और सुरक्षाबलों का सदा ऋणी रहेगा।

पूर्व सैनिकों में अब भी जीवित है सेवा का जज़्बा
सांसद को सौंपे गए इस पत्र के माध्यम से इन पूर्व सैनिकों ने यह भावनात्मक संदेश दिया है कि वे केवल सेवा-काल में ही नहीं, बल्कि अब भी मातृभूमि की रक्षा के लिए समर्पित हैं। संकट की स्थिति में वे फिर से वर्दी पहनने को तैयार हैं और यदि देश उन्हें बुलाता है, तो वे सीमा पर खड़े होकर राष्ट्र की रक्षा करने से पीछे नहीं हटेंगे। यह देशप्रेम का उदाहरण न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि पूरे समाज को एक सकारात्मक संदेश भी देता है।

ऑल इंडिया बीएसएफ एक्स मैन वेलफेयर एसोसिएशन की अगुवाई
पूर्व सैनिकों की इस पहल की अगुवाई ऑल इंडिया बीएसएफ एक्स मैन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार जैन ने की। उन्होंने कहा कि हमने सांसद शंकर लालवानी को प्रधानमंत्री के नाम यह पत्र सौंपा है, जिसमें हमारी भावना स्पष्ट है कि देश जब भी पुकारेगा, हम कदम बढ़ाएंगे। अजय जैन ने कहा कि सभी पूर्व सैनिक राष्ट्र की सेवा के लिए पुनः तैयार हैं और संकट के समय हम एक बार फिर से वर्दी पहनने और सीमा पर डट जाने को तैयार हैं। यह संदेश ना केवल एकता और देशप्रेम को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सेवा समाप्त होने के बाद भी सच्चा सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता।

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