पेट्रोलियम मंत्रालय ने पीएनजी (PNG) ग्राहकों के लिए एलपीजी (LPG) सिलेंडर के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. नए नियमों के तहत अब पाइप वाली गैस के उपभोक्ता न तो नया सिलेंडर ले पाएंगे और न ही रिफिल करा सकेंगे. सरकार का यह कदम इस मुश्किल वक्त में संसाधनों के सही इस्तेमाल के तौर पर देखा जा रहा है.
रसोई के बजट और गैस के अर्थशास्त्र में आज एक ऐसा भूचाल आया है जिसने मध्यमवर्गीय परिवारों की बैकअप प्लानिंग को हिलाकर रख दिया है. पिछले करीब एक दशक से भारतीय घरों में पीएनजी (PNG) की पाइपलाइन और कोने में रखे एलपीजी (LPG) सिलेंडर की जुगलबंदी भरोसे का प्रतीक थी कि अगर कनेक्शन प्रभावित होता है तो वो सिलेंडर का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन सरकार के ताजा आदेश ने इस जोड़ी को हमेशा के लिए जुदा कर दिया है. मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि जिस घर के पास पीएनजी कनेक्शन है उसे एलपीजी गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा. नए संशोधन के अनुसार अब उन उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सुविधा नहीं मिलेगी जिनके पास पहले से पाइप नेचुरल गैस यानी पीएनजी का कनेक्शन मौजूद है. नए आदेश के बाद अब पीएनजी ग्राहक न पुराने सिलेंडर को रिफिल नहीं कर पाएंगे.
सरकारी फैसले का मुख्य उद्देश्य
· संसाधनों का सही डिस्ट्रीब्यूशन: सरकार का मानना है कि इस मुश्किल वक्त में गैस सप्लाई को सुचारू बनाने के लिए जिन इलाकों में पीएनजी की पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वहां एलपीजी सिलेंडरों की खपत कम कर उन्हें उन ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों में भेजा जाए जहां पाइपलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं है.
रसोई के बजट और गैस के अर्थशास्त्र में आज एक ऐसा भूचाल आया है जिसने मध्यमवर्गीय परिवारों की बैकअप प्लानिंग को हिलाकर रख दिया है. पिछले करीब एक दशक से भारतीय घरों में पीएनजी (PNG) की पाइपलाइन और कोने में रखे एलपीजी (LPG) सिलेंडर की जुगलबंदी भरोसे का प्रतीक थी कि अगर कनेक्शन प्रभावित होता है तो वो सिलेंडर का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन सरकार के ताजा आदेश ने इस जोड़ी को हमेशा के लिए जुदा कर दिया है. मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि जिस घर के पास पीएनजी कनेक्शन है उसे एलपीजी गैस सिलेंडर नहीं मिलेगा. नए संशोधन के अनुसार अब उन उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सुविधा नहीं मिलेगी जिनके पास पहले से पाइप नेचुरल गैस यानी पीएनजी का कनेक्शन मौजूद है. नए आदेश के बाद अब पीएनजी ग्राहक न पुराने सिलेंडर को रिफिल नहीं कर पाएंगे.
सरकारी फैसले का मुख्य उद्देश्य
· संसाधनों का सही डिस्ट्रीब्यूशन: सरकार का मानना है कि इस मुश्किल वक्त में गैस सप्लाई को सुचारू बनाने के लिए जिन इलाकों में पीएनजी की पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वहां एलपीजी सिलेंडरों की खपत कम कर उन्हें उन ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों में भेजा जाए जहां पाइपलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं है.
सब्सिडी का बोझ कम करना: एलपीजी पर दी जाने वाली सब्सिडी सरकार के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ है. पीएनजी की उपलब्धता वाले शहरी क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर की रोक से सरकारी खजाने को राहत मिलेगी.
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· सुरक्षा और पर्यावरण: पीएनजी को एलपीजी की तुलना में अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है. पाइपलाइन से सप्लाई होने के कारण इसमें सिलेंडर खत्म होने या रिफिलिंग की झंझट नहीं रहती.
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आम जनता पर क्या होगा असर?
इस फैसले का सबसे सीधा असर उन शहरी परिवारों पर पड़ेगा जो सुरक्षा के तौर पर पीएनजी के साथ-साथ एक छोटा या बड़ा एलपीजी सिलेंडर बैकअप के तौर पर रखते थे.
1. बैकअप की समस्या: पीएनजी कनेक्शन में कभी-कभी मेंटेनेंस के कारण गैस सप्लाई रुक जाती है. ऐसे समय में लोग एलपीजी का उपयोग करते थे जो अब संभव नहीं होगा.
2. सरकारी तेल कंपनियों पर रोक: अब सरकारी तेल कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) किसी भी पीएनजी उपभोक्ता को रिफिल नहीं देंगी. डेटा शेयरिंग के जरिए ऐसे ग्राहकों की पहचान की जाएगी.
3. अनिवार्य सरेंडर: संभावना है कि आने वाले समय में पीएनजी ग्राहकों को अपना एलपीजी कनेक्शन अनिवार्य रूप से सरेंडर करने या उसे डॉरमेंट (निष्क्रिय) मोड में डालने के लिए कहा जाए.
सवाल-जवाब
क्या पीएनजी होने पर मैं कमर्शियल सिलेंडर रख सकता हूं?
सरकार का यह आदेश विशेष रूप से घरेलू एलपीजी के लिए है. घरेलू उपभोक्ताओं को पीएनजी के साथ सब्सिडी या बिना सब्सिडी वाला घरेलू सिलेंडर रखने की अनुमति नहीं होगी.
अगर मेरे इलाके में पीएनजी की सप्लाई बाधित होती है तो क्या विकल्प है?
सरकार गैस कंपनियों को पीएनजी नेटवर्क को अधिक विश्वसनीय बनाने के निर्देश दे रही है. फिलहाल, बैकअप के तौर पर बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हे एक प्रभावी विकल्प हो सकते हैं.
क्या यह नियम पूरे देश में लागू हो गया है?
जी हां, पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी सप्लाई ऑर्डर में संशोधन पूरे भारत के लिए प्रभावी है, विशेषकर उन शहरों में जहां पीएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर सक्रिय है.

