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आईएएस की टिप्पणी पर भड़के आईएफएस

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भोपाल। श्योपुर जिले के पालपुर कूनो को लेकर ग्वालियर राजस्व मंडल के सदस्य एवं आईएएस अधिकारी राजेश बहुगुणा की टिप्पणी को लेकर आईएफएस अधिकारी भड़क गए। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सत्यानंद कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘वन अधिकारियों को छोड़कर सभी विभागों के अधिकारियों एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं प्रबंधन के एक्सपर्ट है।’ वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी सत्यानंद ने आगे लिखा कि मैं 2008 में और फिर अभी दिसंबर में गया था । वनों की गुणवत्ता और ग्रास लैंड की गुणवत्ता में जो सुधार हुआ है, वह अद्भुत है। जो लोग केवल बाघ और शेर को जंगल देखने जाते हैं उनसे क्या अपेक्षा की जाए? कूनो पालपुर पार्क में सलई, खैर, करधई, बेर और अन्य प्रजातियों के पेड़ इतने स्वस्थ और ऊंचे हैं कि दूसरी जगहों पर ऐसे उदाहरण कम ही होंगे। डीएफओ श्योपुर ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बहुत सामान्य टिप्पणियां है। पालपुर कूनो को नेशनल पार्क के रूप में उन्नत किया गया है। एशियन लायन को प्राप्त करने के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी है। सेवानिवृत्त पीसीसीएफ आरडी शर्मा कहते हैं कि राजेश बहुगुणा को पालपुर कूनो से विस्थापित किए गए सहरिया आदिवासियों के पास भी जाना चाहिए था और वहां उनकी स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार कर सरकार को अवगत कराना चाहिए। वह काम तो उन्होंने नहीं किया, वन विभाग की खामियां जरूर उनको नजर आने लगीं। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बहुगुणा को वीवीआईपी ट्रीटमेंट नहीं मिला, इसलिए इस तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों राजस्व मंडल ग्वालियर के सदस्य राजेश बहुगुणा पालपुर कूनो भ्रमण के लिए गए थे। कूनो का भ्रमण करने के पश्चात अपने फेसबुक वॉल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पालपुर कूनो राष्ट्रीय पार्क की तारीफ कुछ लोगों से सुनी थी तो दिल नहीं माना बगैर गए। श्योपुर भ्रमण के साथ यहां भी गए लेकिन निराशा ही हाथ लगी। जहां एशियन सिंहों को लाने की योजना हो, वहां हिरन प्रजाति की संख्या तो 75-100 के समूह में दिखनी चाहिए। लेकिन बड़े झुण्ड के स्थान पर 1-2 ही दिखाई पड़े। जंगली सुअर जरूर बड़े, मजबूत और पर्याप्त संख्या में दिखे। वन विभाग के मैदानी कनिष्ठ अधिकारी भी उदासीन से दिखे। इनके प्रशिक्षण की आवश्यकता है। पालपुर कूनो में अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

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