पत्रकार सुरक्षा कानून बनवाने के लिए राजस्थान के सभी 200 विधायकों पर दबाव बनाया जाए-विधायक अनिता भदेल।
पत्रकारों की समस्याओं का समाधान जरूरी-सांसद भागीरथ चौधरी व विधायक देवनानी
एस पी मित्तल, अजमेर
16 अप्रैल को अजमेर के लक्ष्मी नैन समारोह स्थल पर इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट का जिला स्तरीय सम्मेलन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में जिले भर के सौ से भी ज्यादा पत्रकार उपस्थित रहे। अधिकांश प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों, न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर न्यूज पोर्टल चलाने वाले पत्रकार शामिल रहे। पत्रकारों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर से कहा कि मौजूदा समय में विपरीत परिस्थितियों में पत्रकारिता करनी पड़ रही है। जहां पत्रकारों को भूमाफिया, शराब माफिया, खनन माफिया, पानी माफिया और अपराधियों के हमलों का शिकार होना पड़ता है, तो वहीं सरकार की ओर से भी कोई संरक्षण नहीं मिलता। सम्मेलन में मौजूद पूर्व मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ विधायक श्रीमती अनिता भदेल ने कहा कि राजस्थान में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून नहीं बनाएगी। इसलिए मैं विधानसभा में प्राइवेट बिल रखने को तैयार हंू। भदेल ने बताया कि विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी ने एक सत्र में एक दिन प्राइवेट बिल के लिए निर्धारित किया है। इसके लिए लॉटरी के माध्यम से विधायकों को प्राइवेट बिल प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। भदेल ने कहा कि आईएफडब्ल्यूजे का संगठन राजस्थान ही नहीं बल्कि देशभर में सक्रिय है। मैं चाहती हंू कि राजस्थान के सभी 200 विधायकों पर पत्रकारों की सुरक्षा कानून बनाने के लिए दबाव डाला जाए। हम विधायक जो पर्ची डाले उसमें एक पर्ची पत्रकारों की सुरक्षा के कानून की भी होनी चाहिए। एक विधायक को चार विषयों पर पर्ची डालने का अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि यदि सभी 200 विधायक एक पर्ची पत्रकार सुरक्षा कानून की डालेंगे तो लॉटरी में इस कानून की पर्चियां निकलेंगी। उन्होंने पत्रकारों को विश्वास दिलाया कि यदि उनकी पर्ची निकलती है तो वे पत्रकार सुरक्षा कानून पर प्राइवेट बिल विधानसभा में प्रस्तुत करेंगी। भदेल ने माना कि सरकार में जिन सुविधाओं की घोषणा कर रखी है वो सुविधाएं भी पत्रकारों को नहीं मिलती है। सरकार 60 वर्ष अधिक उम्र वाले अधिस्वीकृत पत्रकारों को पेंशन देने का ढिंढोरा तो पिटती है, लेकिन जनसंपर्क निदेशालय में पिछले डेढ़ वर्ष से वरिष्ठ पत्रकारों की पेंशन के प्रकरण लंबित पड़े हैं। यानी इस सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। सांसद भागीरथ चौधरी और विधायक वासुदेव देवनानी ने भी कहा कि पत्रकारों को रियायती दरों पर भूखंड, पत्रकारों का अधिस्वीकरण, छोटे मझोले साप्ताहिक पाक्षिक समाचार पत्रों को प्रतिमाह पांच डिस्प्ले विज्ञापन, अधिस्वीकृत पत्रकारों के वाहनों को टोल फ्री आदि की सुविधाएं तो मिलनी ही चाहिए। उन्होंने माना कि मौजूदा समय में छोटे-बड़े सभी पत्रकार राजस्थान में विपरीत परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। सम्मेलन में श्रीमती भदेल ने कहा कि यदि अजमेर में आईएफडब्ल्यूजे के कार्यालय का निर्माण होता है तो निर्माण के प्रथम चरण में खर्च होने वाली राशि का पचास प्रतिशत हिस्सा वे विधायक फंड से देंगी। इसी प्रकार सांसद चौधरी ने कार्यालय के लिए पांच लाख रुपए देने की घोषणा की। सम्मेलन में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ ने पत्रकारों की समस्याएं जनप्रतिनिधियों के सामने रखी। राठौड़ ने कहा कि आईएफडब्ल्यूजे राजस्थान का एक ऐसा संगठन है, जिसकी शाखाएं प्रदेश के उपखंड स्तर तक बनी हुई है। यही वजह है कि अजमेर में इतनी बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल हुए हैं। पत्रकार अधिवेशन की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सम्मेलन में दैनिक भास्कर के संपादक डॉ. रमेश अग्रवाल, उपमुख्य संपादक प्रताप सनकत, न्यूज 18 चैनल के प्रदेश प्रभारी अमित भट्ट, सुप्रसिद्ध ब्लॉगर और वरिष्ठ पत्रकार सुरेश चतुर्वेदी, गिरधर तेजवानी, कंवल प्रकाश किशनानी, प्रेम आनंदकर, राजेंद्र गुंजल, न्यूज़18 के जिला संवाददाता अभिजीत दवे, फर्स्ट इंडिया के संवाददाता शुभम जैन, दाता न्यूज के हैड अमित शास्त्री, नरेश राघानी के साथ साथ संगठन के छोटे बड़े सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे। इस अधिवेशन को सफल बनाने में जी न्यूज के संभाग प्रभारी मनवीर सिंह चुंडावत, संगठन के जिला अध्यक्ष आनंद शर्मा, अशोक भाटी, चंद्रशेखर शर्मा, सहर खान आदि की सक्रिय भूमिका रही। सम्मेलन में पत्रकारों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए। सम्मेलन का संचालन ब्यावर उपखंड के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने सफलतापूर्वक किया। इस अधिवेशन के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9928096254 पर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़ से ली जा सकती है।

