भोपाल। । अपनी जाति के मतदाताओं में कम अन्य समाज के मतदाताओं के दिलों में जगह बनाकर भले ही जगदीश देवड़ा कई बार के विधायक रहे हों और उनकी ईमानदार छवि के लिये भी वह काफी चर्चित रहते हैं, लेकिन यह भी हकीकत है कि जब वह परिवहन मंत्री थे तभी उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में मकान बनाने का दावा करते थे? लेकिन जगदीश देवड़ा की जो कार्यशैली थी और आज है उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि वह भले ही मुख्यमंत्री के चहेते होने के कारण हमेशा मलाईदार विभाग के मंत्री रहे हों लेकिन वह प्रशासनिक पकड़ मजबूत नहीं है और उन्हें प्रशसनिक प्रतिक्रिया की जानकारी भी नहीं है
यही वजह है कि पहले वह गृह मंत्री हुआ करते थे तो उनके ही यहां से चली नोटशीट की बदौलत मप्र सरकार ने सिमी के एक कार्यकर्ता को जेल से रिहाई देने का आदेश जारी दिया था जब लोगों को इसकी खबर लगी और हंगामा होने लगा तो सरकार ने उक्त सिमी कार्यकर्ता को पकड़कर पुन: जेल में भेजा यही नहीं उनकी कार्यशैली के चलते परिवहन विभाग भी काफी चर्चाओं में बना रहता था तो उस समय जब प्रदेश के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता हुआ करते थे तो तत्कालीन परिवहन मंत्री जगदीश देवड़ा की कार्यशैली के चलते उस समय उमा शंकर गुप्ता की लाख कोशिशों के बावजूद परिवहन विभाग में पुलिस के द्वारा परिवहन जाने पर प्रतिनियुक्ति की परम्परा समाप्त करने का काम जगदीश देवड़ा ने ही किया था। उस जगदीश देवड़ा और उनके स्टाफ की कार्यशैली को लेकर लोग तरह-तरह की चर्चायें करते नजर आते थे, लेकिन आज पुन: ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक कांग्रेसी विधायकों द्वारा कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के पुत्रमोह के चलते जो ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपेक्षा हुई उससे नाराज होकर अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा का दामन थामने के बाद उधार के सिंदूर से बने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार में पुन: जब उनके चहेते जगदीश देवड़ा को वित्त विभाग के साथ कमाईदार आबकारी विभाग का दायित्व सौंपा गया तबसे लेकर आज तक उनकी कार्यशैली के चलते प्रदेश में अवैध शराब कारोबारियों की यह स्थिति है कि यह सभी जानते हैं कि इंदौर से लेकर झाबुआ तक अवैध शराब का कारोबार खूब फल-फूल रहा है
यदि हाल ही में आबकारी मंत्री के द्वारा इंदौर और धार के दो सहायक आबकारी आयुक्त के तबादले की अनुशंसा को लेकर मुख्यमंत्री को भेजे गये पत्र की जो चर्चा इन दिनों विभाग से लेकर प्रदेश की राजनीति में जोरों पर है उससे तो यही साफ जाहिर हो जाता है कि शिवराज सिंह चौहान के चहेते आबकारी मंत्री अवैध शराब के कारोबारियों को प्रोत्साहन देने में लगे हैं, मुख्यमंत्री को ही नहीं बल्कि प्रदेश के हर राजनैतिक यह जानता है कि अवैध शराब का कारोबार इंदौर से लेकर झाबुआ और अलीराजपुर तक खूब फल-फूल रहा है, हाल ही में इंदौर में शराब सिंडीकेट व्यापारियों में आहतों के कब्जों को लेकर चली जंग के बाद जो तथ्य सामने आये हैं उसमे भी इस बात का खुलासा हुआ है कि इंदौर के बड़े शराब माफिया पिंटू भाटिया ने अपने इस घाटे की पूॢत करने के लिये रमेशचंद राय और मनोज नामदेव को सिंडीकेट में शामिल किया, इस सिंडीकेट में ३२ अलग-अलग भागीदार हैं जिन्होंने ९८० करोड़ रुपये में इंदौर का आबकारी ठेका लिया है, जिसमें पिंटू भाटिया २५ प्रतिशत, रमेशचंद राय २५ प्रतिशत, मनोज नामदेव ११ प्रतिशत और अर्जुन ठाकुर सात प्रतिशत के भागीदार हैं, बाकी अन्य छोटे शराब के ठेकेदार हैं जो दो से तीन प्रतिशत से पाटर्नरशिप के भागीदार इस सिंडीकेट से जुड़े हुए हैं जानकार सूत्रों का कहना है कि पिछले वर्ष शराब की दुकानों में घाटा होने के बाद से छ: से सात प्रतिशत भागीदारी रिंकू व मोनू भाटिया ने अपना शेयर हटा लिया था इसके बाद इंदौर की व्यवस्था गड़बड़ा गई थी, इसके कारण इंदौर में व्यवसाय ठप्प होने लगा था जिसके बाद पिंटू भाटिया ने शराब के सप्लायर एके सिंह, झाबुआ के अल्पेश और धार के नन्हें सिंह को इस शराब सिंडीकेट में जोड़ा था वर्तमान में सिंडीकेट में बड़े नामों का हिस्सा लगभग ७० प्रतिशत है वहीं छोटे ठेकेदारों का तीस प्रतिशत हिस्सेदारी है, छोटे ठेकेदारों को मुनाफा न देना पड़े इस कारण एक बार डराकर सभी पार्टनरों को इस पूरे सिंडीकेट का कब्जा करने की जुगाड़ में हैं, यह इंदौर का शराब सिंडीकेट की बदौलत इंदौर से लेकर झाबुआ तक अवैध शराब के लिये वर्षों से धार से लेकर इंदौर तक कारोबार भी चर्चाओं में है, बल्कि खबर यह भी है कि इस सिंडीकेट को राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त है तो यह खबरें तक सुर्खियों में रहती हैं कि इंदौर से झाबुआ और अलीराजपुर जिले के जो-जो प्रभारी मंत्री रहे हैं वह इस सिंडीकेट के अप्रत्यक्ष भागीदार रहे हैं यही नहीं इन्हीं शिवराज सिंह के कार्यकाल में उनके मंत्रिमण्डल के राज्यमंत्री विश्वास सारंग झाबुआ व अलीराजपुर के प्रभारी मंत्री हुआ करते थे तब उन्होंने झाबुआ सर्किट हाउस में जिले के अधिकारियों व भाजपा नेताओं की एक बैठक बुलाई थी उस बैठक में यह बात खुलकर सामने आई थी कि जिले के शराब कारोबारियों के दबाव में आकर अधिकांश भाजपा के सरपंचों और नेताओं पर पुलिस द्वारा झूठे मामले में फंसाकर उन्हें जेल भेज दिया गया, भाजपा के अधिकांश नेताओं के द्वारा इस बात का खुलासा किये जाने के बाद भी अलीराजपुर झाबुआ के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग उन शराब कारोबारियों का कुछ नहीं बिगाड़ पाए थे, जिसको लेकर तरह-तरह की चर्चायें उस समय लोग करते नजर आये, यही नहीं सत्तारू़ए भाजपा के नेता शराब माफियाओं के खिलाफ कुछ कड़ा कदम उठाने के पक्ष में नहीं रहते बल्कि लगभग यही स्थिति झाबुआ जिले की वर्षों से राजनीतिक करने वाले अपने आपको आदिवासियों के स्वयंभू नेता मानकर झाबुआ ही नहीं बल्कि आसपास के युवा आदिवासियों को नेता न बनने देने की नीति अपनाते हुए कांतिलाल भूरिया ने भी कभी अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाने की जहमत नहीं उठाई? इसे अपवाद ही कहें कि उनके परिवार की स्वर्गीय कलावति भूरिया ने जरूर एक समय शराब के अवैध कारोबारियों के खिलाफ संघर्ष के लिये १५ दिन की चेतावनी देकर ऐलान किया था लेकिन १५ दिन गुजर जाने के बाद उन्होंने भी चुप्पी साध ली थी, इससे यह साफ जाहिर हो जाता है कि झाबुआ और अलीराजपुर में शराब कारोबारियों का दबदबा है, लेकिन फिर भी शिवराज सिंह के चहेते आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा इंदौर और धार के सहायक आबकारी आयुक्त के स्थानांतरण को लेकर अपना सिफारशी पत्र मुख्यमंत्री को भेजते हैं जबकि इस तरह के स्थानान्तरण करने की क्षमता स्वयं वित्त मंत्री की होती है। जगदीश देवड़ा के इस तरह के दो आबकारी सहायक आयुक्तों के स्थानान्तरण को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र को लेकर उनकी कार्यशैली भी उजागर होती है और इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि उनमें प्रशासनिक क्षमता नहीं है हालांकि यह सभी जानते है कि आबकारी विभाग की प्रमुख सचिव जिनकी ईमानदारी छवि के बारे में आईएएस ही नहीं बल्कि विभाग के अधिकारी चर्चा करते नजर आते हैं, उनसे उनकी शायद इसी वजह से नहीं पटती कि जगदीश देवड़ा को प्रशासनिक प्रक्रिया का ज्ञान नहीं है, पता नहीं आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा इंदौर और धार के सहायक आबकारी के स्थानान्तरण में इतनी रुचि दिखाते हुए मुख्यमंत्री को क्यों सिफारशी पत्र लिखते हैं, हालांकि उनकी इस तरह की कार्यशैली को लेकर तरह-तरह की चर्चायें लोग चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं तो वहीं प्रशासनिक और आबकारी विभाग के अधिकारी उनकी कार्यशैली में भजकलदरम् की प्रमुखता मानकर चल रहे हैं तो वहीं उनकी इस कार्यशैली से यह भी संकेत मिलते हैं कि इंदौर से लेकर झाबुआ और अलीराजपुर तक अवैध शराब के कारोबार के लिये चर्चित रहने वाले इंदौर और धार के सहायक आबकारी आयुक्त के स्थानान्तरण को लेकर कहीं इस क्षेत्र में सक्रिय अवैध शराब के कारोबारियों के दबाव में तो मुख्यमंत्री को यह पत्र नहीं लिखा गया हो, लोग इस बात को लेकर भी चर्चा करते आ रहे हैं कि यह सब खेल अवैध शराब के कारोबारियों के लिये रास्ता साफ करने की दृष्टि से खेला गया होगा? हालांकि यह सभी जानते हैं कि उन्हीं के आबकारी विभाग में एक नहीं अनेकों जिले सहायक आबकारी आयुक्त की पदस्थापना न होने की वजह से खाली पड़े हैं और योग्य अधिकारी या तो विभाग के मुख्यालय में बैठे हैं और कनिष्ठों को कई जिलों का प्रभार दे रखा है जिसकी वजह से प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है तो वहीं आबकारी आयुक्त के द्वारा हाल ही में जारी किए गए निर्धारित दर से ज्यादा शराब न बेचने के आदेश का भी शराब कारोबारियों और विभाग के अधिकारियों द्वारा पालन न करने के कारण धज्जियां उड़ रही हैं और लोग महंगी दर पर शराब खरीदने को मजबूर हैं। जानकारों की यदि माने तो प्रदेश में फल-फूल रहे अवैध शराब के कारोबारियों के लिये लोग और सरकारी शराब कारोबारी जगदीश देवड़ा की कार्यशैली को ही दोषी मानने में लगे हुए हैं, पता नहीं मुख्यमंत्री अपने चहेते मंत्री जगदीश देवड़ा की इस तरह की कार्यशैली के चलते इस प्रदेश में जब कमलनाथ की कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी तो वह अवैध शराब के कारोबार को लेकर भाजपा के लोग कमलनाथ सरकार के खिलाफ बयानबाजी किया करते थे लेकिन अब भाजपा की ही सरकार में अपने चहेते आबकारी मंत्री की कार्यशैली के चलते इस प्रदेश में अवैध शराब के कारोबारियों के द्वारा प्रदेश में शराब को घर पहुंच सेवा बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं, मुख्यमंत्री शिवराज और उनके चहेते आबकारी मंत्री देवड़ा की कार्यशैली को लेकर प्रदेशभर में चर्चायें लोग चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं?
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