अग्नि आलोक

भिंड में नकलमाफिया पर लगाम कसनेवाले इलिया राजा इंदौर कलेक्टर

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इलैयाराजा टी को इंदौर का नया कलेक्टर बनाया गया है। अभी जबलपुर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।वहीं, करीब ढाई साल तक इंदौर की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मनीष सिंह को बड़ी जिम्मेदारी दी है। उन्हें प्रवासी भारतीय सम्मेलन, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के साथ-साथ औद्योगिक विकास निगम और मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का एमडी बनाया गया है।

सोमवार को प्रदेश में 14 जिलों के कलेक्टर सहित 27 आईएएस अफसरों के तबादले किए गए हैं। इंदौर के स्मार्ट सिटी सीईओ ऋषभ गुप्ता को देवास का कलेक्टर बनाया गया है। वहीं अपार आयुक्त भव्या मित्तल को बुरहानपुर की जिम्मेदारी मिली है। धार कलेक्टर पंकज जैन भी बदले गए हैं।

जबलपुर में इलैयाराजा डी की जगह सौरभ कुमार सुमन को कलेक्टर बनाया गया है। सौरभ कुमार छिंदवाड़ा में कलेक्टर है। बुरहानपुर कलेक्टर प्रवीण सिंह अढापच को सीहोर भेजा गया है। सीहोर में अब तक चंद्रमोहन ठाकुर कलेक्टर थे उन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सचिव के पद पर पदस्थ किया गया है।

 ड़ॉ इलिया राजा 2009 बैच के आय ए एस हैं । भिंड , रीवा , जबलपुर और अब इन्दौर जिले की कमान उन्हे सौपी गई है । पहले डॉ राजा ने वेटरनिटी की पढाई पूरी की फिर आय ए एस की परीक्षा दी जिसमें वे चयनित हुए । तमिलनाडु से आने के बावजूद उनकी कार्य शैली जोरदार बताई जा रही है।भिंड में नकलमाफिया पर लगाम कस जनता में इतने लोकप्रिय हुए थे की भिंड में तो उनके तबादले के बाद लोग सड़कों पर उतर आए थे वहां उनके द्वारा किये गए नवाचार को आज तक याद किया जाता है । अतिक्रमण हटाने में उनकी विशेष रुचि रहती है । यातायात सुगम करने में भी वे सक्रिय रहते हैं । नवाचार करने के आदी श्री राजा को इसी वर्ष फरवरी में जबलपुर कलेक्टर बनाया गया था । पहले वे जबलपुर के आस पास के जिले में रह चुके थे ।
वहीं शिक्षा पर काफी ध्यान देते हैं आमजनता के लिए नरमदील है वहीं गलत कार्य करने वालों के लिए सख्त है कभी भी किसी कर्मचारी की गलती को नजरंदाज नहीं करते हैं शिकायत मिलने पर तुरंत संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई करते हैं ।
इन्दौर पुर्व कलेक्टर मनीष सिंह के जाने और वर्तमान कलेक्टर इलिया राजा के आने के लिए मध्य रात्रि को कलेक्टर कार्यालय के सामने का यहां दृश्य देखने को मिला किस तरह से पटाखे की गुंज सुनाई दे रही है।

बुरहानपुर कलेक्टर प्रवीण सिंह अढायच को मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर भेजा गया है। सीहोर में अब तक चंद्रमोहन ठाकुर कलेक्टर थे, उन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोड में बतौर सचिव पदस्थ किया है। वहीं, देवास कलेक्टर चंद्रमौलि शुक्ला को हाउसिंग बोर्ड में कमिश्नर बनाया गया है।

सूत्रों का कहना है कि बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक मंगलवार को होने वाली है। उससे पहले जिलों के कलेक्टरों के तबादले किए गए हैं।

इन जिलों के कलेक्टर बदले- देवास, जबलपुर, इंदौर, उमरिया, सीधी, धार, सीहोर, नरसिंहपुर, बुरहानपुर, सिंगरौली, मुरैना, आगर-मालवा, कटनी।

एक-दूसरे को अर्से तक याद करेंगे इंदौर और मनीष सिंह

आइएएस अफसर मनीष सिंह ने प्रशासनिक सेवा का 80-90 प्रतिशत समय इंदौर में ही पूरा किया है, वे यहां कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे, उनके इंदौर नगर निगम कमिश्नर रहते ही पहली बार इंदौर की स्वच्छता का डंका पूरे देश में बजा था।

सामान्य परिस्थितियों में तो हर कोई काम कर सकता है, लेकिन जो संकटकाल की चुनौती स्वीकारता है, वही योद्धा कहलाता है। कोरोना जैसी महामारी के बीच आइएएस अधिकारी मनीष सिंह का कलेक्टर बनकर इंदौर आना और चुनौतियों का डटकर मुकाबला करना उनको योद्धा अफसर बनाता है। वे शायद ऐसी ही मिट्टी के बने हैं जिनको लीक से हटकर काम करना और चुनौतियां स्वीकार करना पसंद रहा है। इंदौर जिले के प्रशासनिक मुखिया की अपनी भूमिका निभाकर वे राजधानी भोपाल में नई पारी शुरू करने जा रहे हैं… पर इंदौर और मनीष सिंह एक-दूसरे को अर्से तक याद करेंगे।

इंदौर के साथ सिंह का जुड़ाव इसलिए भी अधिक है कि अपनी अब तक की प्रशासनिक सेवा का 80-90 प्रतिशत समय उन्होंने यहीं पूरा किया और कई महत्वपूर्ण पद यहीं हासिल किए। डिप्टी कलेक्टर बनकर आए… फिर एडीएम, इसके बाद मंडी सचिव, एडीएम, इंदौर विकास प्राधिकरण के सीईओ, एकेवीएन के एमडी और फिर इंदौर नगर निगम कमिश्नर। यह वह समय था जब इंदौर की स्वच्छता का डंका पूरे देश में बजा। उनके निगम कमिश्नर रहते स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर ने पहली बार स्वच्छता का प्रथम राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया। यह उपलब्धि मील का पत्थर साबित हुई और तबसे अब तक लगातार छह बार से इंदौर देशभर में स्वच्छता के शिखर पर कायम है।

चुनौतियों के बीच संभाला मोर्चा – सिंह मार्च 2020 में इंदौर कलेक्टर बनकर ऐसे समय आए जब यह शहर कोरोना का हाट स्पाट बनता जा रहा था। चुनौतियां कम नहीं थीं। पर ऐसे समय सिंह ने मैदान संभालकर अपने साथी अधिकारियों को भी काम करने का हौसला दिया। इंदौर को अच्छी तरह जानने का यह लाभ मिला कि कोरोना में डाक्टरों, अस्पताल संचालकों, कारोबारियाें और समाजसेवियों को साथ लेकर उन्होंने कोरोना और उससे उत्पन्न हालातों से हर मोर्चे पर डटकर लोहा लिया। अस्पतालों में बेड, आक्सीजन प्लांट, दवाइयों, जनता को राशन उपलब्ध कराने का बेहतर प्रबंधन उनकी प्रशासनिक दक्षता का सबसे बड़ा उदाहरण रहा।

सख्ती के साथ उत्साहवर्धन भी आगे – सिंह एक तरफ कामचोर और लापरवाह मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर बेहद सख्त रहते हैं तो कर्मठ और ईमानदार अधिकारियाें का उत्साहवर्धन भी करते रहे हैं। प्रमुख जनप्रतिनिधियों को साधने में भी वे सिद्धहस्त रहे हैं। इसीलिए भाजपा ही नहीं, कांग्रेस के कुछ नेता भी उनसे खुश ही रहते आए हैं। किस नेता की कितनी पहुंच है, कितनी तवज्जो देना है और उससे जनहित में क्या काम कराया जा सकता है, वे भलीभांति जानते हैं।

सीएम ने जताया भरोसा – सरकार ने सिंह को अब मध्य प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम और मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन का एमडी बनाया है। यह पद भी उन्हें सोची-समझी रणनीति के तहत दिए गए हैं। अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और सरकार के लिए औद्योगिक विकास, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और इंदौर व भोपाल में मेट्रो का पहला चरण पूरा करना चुनौती होगी। शायद इन कामों के लिए भी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने सिंह को सबसे भरोसेमंद अफसर माना है।

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