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*होशंगाबाद में शहीद किसानों की अस्थि कलश विसर्जन एवं किसान महापंचायत का आयोजन 14 जनवरी 2022 को

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राष्ट्रीय मांगों सहित मध्यप्रदेश के स्थानीय मुद्दों को लेकर प्रदेश में किया जाएगा किसान आंदोलन का विस्तार!*


4 दिसंबर 2021 को सयुंक्त किसान मोर्चा, मध्यप्रदेश की बैठक का आयोजन गांधी भवन, भोपाल में किया गया जिसकी अध्यक्षता नर्मदा बचाओ आंदोलन के साथी मुकेश भगौरिया ने की। *बैठक में किसान जागृति संगठन, नर्मदा बचाओ आन्दोलन, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS), क्रांतिकारी किसान मज़दूर संगठन, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा (AIKKS), जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस), भीम आर्मी, बहुजन युनाइटेड फ्रंट, राष्ट्रीय किसान मोर्चा, किसान सत्याग्रह संगठन, किसान मज़दूर प्रजा परिषद, भारतीय किसान यूनियन, श्रमिक जनशक्ति यूनियन, मध्यप्रदेश लोकतांत्रिक अधिकार मंच (MPDRF), भारत कृषक समाज, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), भारतीय किसान यूनियन, नर्मदा बचाओ संगठन, प्रगतिशील लेखक संघ, आम किसान यूनियन, भारतीय किसान मजदूर सेना, राष्ट्रीय लोक आंदोलन, भारतीय जन किसान संसद, शाजापुर किसान संगठन, मध्यप्रदेश किसान मज़दूर संगठन शामिल थे।*


बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा मध्यप्रदेश ने दिल्ली की सीमाओं में एक वर्ष से संघर्षरत किसान आंदोलन के साथ एकजुटता ज़ाहिर करते हुए मध्यप्रदेश में आगामी किसान आन्दोलन की दिशा और रणनीति पर चर्चा की। चर्चा के दौरान सभी संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के अखिल भारतीय नेतृत्व द्वारा लिये गए निर्णयों और उनके द्वारा जारी किये गए सभी दिशानिर्देशों को अमल में लाने का संकल्प लिया। चर्चा में उपस्थित सभी साथियों ने मध्यप्रदेश में किसान आन्दोलन को विस्तार ना दे पाने और दिल्ली के बोर्डरों पर डेरा डाले किसानों के बीच अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति ना दर्ज करवा पाने पर, चिंता प्रकट करते हुये प्रदेश में किसान आंदोलन को विकसित करने का संकल्प लिया। सभी ने ऐतिहासिक किसान आंदोलन की देशव्यापी मांगों सहित मध्यप्रदेश के खेती-किसानी के विभिन्न मुद्दों के आधार पर प्रदेश में किसान आन्दोलन को विकसित करने का निर्णय लिया।
*न्यूतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानूनी गारंटी, विद्युत संशोधन विधेयक की वापसी, शहीदों के परिजनों को मुआवजा देने, शहीद किसानों के लिये स्मारक बनाने, अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की केंद्रीय मांगों के साथ- साथ प्रदेश में किसान आन्दोलन के चलते दर्ज किए गये मुकदमों को खत्म करने, अधिक संख्या में कृषि उपज मंडियों का निर्माण करने, बिलजी बिल माफ़ी, किसानों के कर्जो की माफी, पर्याप्त राहत राशि का वितरण, किसानों को हुए नुकसान का फसल बीमा योजना के तहत तत्काल और उचित भुगतान, पर्याप्त मात्रा में खाद- बीज की उपलब्धता सहित अन्य स्थानीय मांगों के आधार पर प्रदेश में किसान आन्दोलन तेज़ करने का निर्णय लिया।*
बैठक में उपस्थित मज़दूर संगठनों के साथियों ने किसान – मज़दूर एकता पर बल देते हुये कहा कि कोरोना की आड़ में मोदी सरकार 44 मज़दूरों के कानूनों को बदलकर चार मज़दूर विरोधी लेबर कोड लेकर आयी है। यह मज़दूरों के ऊपर बहुत बड़ा हमला है इससे मज़दूरों के कई अधिकारों को छीन लिया गया है। इन चारों लेबर कोड को सरकार वापस ले, इस मांग को हमें किसान आंदोलन में प्रमुखता से उठाना चाहिए। इसके अलावा खेतिहर मजदूर, भूमिहीन किसान सहित दलित – आदिवासियों के मुद्दों को हमें किसान आन्दोलन में प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि इसे और अधिक व्यापक बनाया जा सके। 
*अंत मे आगे की रणनीति पर चर्चा करते हुए सभी साथियों ने लखीमपुर खीरी नरसंहार में शहीद हुए किसानों की अस्थि कलश यात्रा को जारी रखने और 14 जनवरी 2022 को होशंगाबाद में _अस्थि कलश विसर्जन और किसान महापंचायत_ आयोजित करने का निर्णय लिया जिसमें देश का नेतृत्व करने वाले किसान आंदोलन के  नेताओं को बुलाने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में आगामी 9 दिसंबर 2021 को इटारसी जिला होशंगाबाद में एक तैयारी बैठक करने का निर्णय लिया गया है।*
*संयुक्त किसान मोर्चा, मध्यप्रदेश*

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